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ईरानी तेल की खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने दी 30 दिनों की ढील

शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने जानकारी दी कि ट्रंप प्रशासन ने अगले 30 दिनों तक समुद्र में ईरानी तेल की खरीद पर जारी प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला किया है.

ईरानी तेल की खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने दी 30 दिनों की ढील
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने जानकारी दी कि ट्रंप प्रशासन ने अगले 30 दिनों तक समुद्र में ईरानी तेल की खरीद पर जारी प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला किया है.ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को समुद्र में ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी है. यह कदम तेल की उन कीमतों को कम करने की कोशिश है, जो अमेरिका-इस्राएल और ईरान के बीच युद्ध के कारण बढ़ गई हैं. अमेरिका के इस कदम से वैश्विक बाजार में 14 करोड़ बैरल तेल आएगा और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी. ट्रंप सरकार में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर इसकी जानकारी दी है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट तौर पर यह भी कहा कि ये ढील सिर्फ उस तेल तक सीमित है जो पहले से ही रास्ते में है और यह नई खरीद या उत्पादन की अनुमति नहीं देती है.

ईरान के साथ अमेरिका और इस्राएल की जंग पिछले तीन हफ्तों से जारी है. इस युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. जंग के बीच ट्रंप सरकार तेल की कीमतों को काबू करने में अब तक नाकाम रही है. माना जा रहा है कि तेल की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी व्यापार और आम नागरिकों को हो रहे नुकसान के कारण ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला किया है.

ट्रंप प्रशासन के सामने विकल्पों की कमी?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप के करीबी अधिकारियों का मानना है कि बेकाबू होती तेल की कीमतों का असर अगले कुछ महीनों तक देखने को मिलेगा क्योंकि अभी इस जंग के थमने के आसार भी नहीं नजर आ रहे हैं. अमेरिकी वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर छपे लाइसेंस में मौजूद जानकारी कहती है कि अमेरिका में ईरानी तेल को इस छूट के तहत आयात किया जा सकता है. हालांकि, क्यूबा, उत्तर कोरिया और क्रीमिया को इस छूट से बाहर रखा गया है.

इस फैसले से एशियाई देशों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो ईरानी तेल के सबसे बड़े खरीददार हैं. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि सप्लाई अगले तीन चार दिनों के अंदर एशिया पहुंच सकती है और अगले एक महीने में ये सप्लाई रिफाइन होकर बाजार में आ जाएगी.

जंग के बीच अमेरिका की तीसरी ढील

पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब ट्रंप सरकार ने अमेरिका के विरोधियों के तेल पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटाया है. ट्रंप सरकार ऊर्जा की कीमतों को काबू करने की कोशिश कर रहा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. यह 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है. इससे पहले अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों में ढील दी थी और बीते शुक्रवार को एक सामान्य लाइसेंस जारी किया, जिसके तहत शुक्रवार तक जहाजों पर लादे गए ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी गई.

बेसेंट ने कहा, "अनिवार्य रूप से, हम 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को जारी रखते हुए कीमतों को कम रखने के लिए तेहरान के खिलाफ ईरानी बैरल का ही उपयोग करेंगे." अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी तेल की वैश्विक आपूर्ति से कीमतों को 10 से 14 दिनों तक नीचे रखने में मदद मिलेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा कि अमेरिका की इस ढील से होने वाली आय तक पहुंचना ईरान के लिए मुश्किल होगा और इसके लिए अमेरिका भी ईरान पर ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाए रखेगा.

28 फरवरी के बाद से तेल की कीमतों में 50 फीसदी का उछाल आया है. इस जंग में ईरान और पड़ोसी खाड़ी देशों के बेहद अहम ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले हुए हैं, और ईरान ने प्रभावी रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है. इस रास्ते से दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और एलपीजी का व्यापार होता है. हालांकि, ओब्सीडियन रिस्क एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक ब्रेट एरिकसन और दूसरे ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए नहीं खोला जाता, तब तक इन कोशिशों का कोई सार्थक असर देखने को नहीं मिलेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 21, 2026 02:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).