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4 सितंबर की बड़ी खबरें

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

स्वागत है DW हिन्दी के लाइव ब्लॉग में. यहां आपको दिनभर की तमाम जरूरी और बड़ी खबरें एक साथ मिलेंगी. हम इस पेज को लगातार अपडेट कर रहे हैं.नेपाल ने भारत से कोई मुआवजा नहीं मांगा: नेपाली विदेश मंत्री

फोल्क्सवागन इस दशक के अंत तक 1,00,000 नौकरियां खत्म करेगी

फोल्क्सवागन इस दशक के अंत तक 1,00,000 नौकरियां खत्म करेगी

जर्मनी की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी फोल्क्सवागन ने गुरुवार, 3 सितंबर को इस दशक के अंत तक कुल 1,00,000 नौकरियों की कटौती करने की घोषणा की है. वैश्विक ऑटो उद्योग के इतिहास में इसे अब तक का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है. कंपनी के प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों ने पहले से स्वीकृत 50,000 छंटनियों के अलावा 50,000 और नौकरियों को कम करने की योजना को मंजूरी दे दी है.

मल्टी-ब्रांड फोल्क्सवागन समूह ने एक बयान में कहा कि आर्थिक वास्तविकताओं के साथ कार्यबल के स्तर को व्यवस्थित रूप से तालमेल में लाना आवश्यक है. इस समूह में फोल्क्सवागन के अलावा आउडी और पोर्शे जैसे ब्रांड भी शामिल हैं. कुल 1,00,000 नौकरियों की यह कटौती दुनिया भर में फोल्क्सवागन के कुल कर्मचारियों का लगभग 15 प्रतिशत है. यह संख्या 2009 में दिवालिया घोषित होने के बाद जनरल मोटर्स द्वारा की गई 50,000 छंटनियों से भी बड़ी है.

इन योजनाओं पर हस्ताक्षर करने से पहले यूनियनों और प्रबंधन के बीच सार्वजनिक रूप से विवाद हुआ था. मीडिया में 1,00,000 संभावित छंटनियों का आंकड़ा लीक होने के बाद यूनियनों ने प्रबंधन पर कर्मचारियों के साथ ईमानदार ना रहने का आरोप लगाया था. इसके बावजूद दोनों पक्षों ने इस बड़े पुनर्गठन समझौते को मंजूरी दे दी.

नेपाल ने भारत से कोई मुआवजा नहीं मांगा: नेपाली विदेश मंत्री

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया है कि जिनमें दावा किया गया था कि नेपाल ने प्रमुख कार्बन उत्सर्जक देशों अमेरिका, चीन और भारत से जलवायु मुआवजे की मांग की है. उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "ना मैंने और ना ही विदेश मंत्रालय या नेपाल सरकार में से किसी और ने भारत, चीन या अमेरिका समेत किसी अन्य देश से मुआवजे का दावा किया है या मुआवजे की मांग की है."

खनाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उनकी मांग यह रही है कि आपदा को जलवायु परिवर्तन और उससे नेपाल पर पड़ रहे प्रभाव की दृष्टि से देखा जाए. उन्होंने कहा कि चीन, भारत और नेपाल एक जैसा पर्यावरणीय पारिस्थितिकी तंत्र साझा करते हैं और हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होते हैं. उन्होंने मांग की है कि तीनों देश साथ आकर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बेहतर तैयारी करें और वैश्विक समुदाय इसमें उनकी मदद करे.

26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर आई बाढ़ के चलते अब तक 1,200 से अधिक लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा, दोनों देशों में 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं. इनमें करीब 800 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो घूमने-फिरने या तीर्थस्थलों के दर्शन करने के लिए नेपाल या चीन गए थे. इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि सड़कें बंद होने की वजह से बाढ़-प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 04, 2026 03:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).