नयी दिल्ली, 23 अप्रैल : उच्चतम न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को दिल्ली सरकार से पूछा, ‘‘विकास यादव की मां को कुछ हो जाए तो क्या आप जिम्मेदारी लेंगे.’’ यादव 2002 के हत्याकांड में 25 साल की सजा काट रहा है और अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत का अनुरोध कर रहा है.
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने अंतरिम जमानत देने का संकेत देते हुए दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वह यादव पर सख्त प्रतिबंध लगाएगी. पीठ ने एएसजी से पूछा, ‘‘यह सही नहीं है. इस व्यक्ति (यादव) ने 23 साल जेल में बिताए हैं. यह भी पढ़ें : Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का एक्शन, पाकिस्तानी उच्चायुक्त को समन कर बता दिया अपना दो टूक फैसला
क्या हमें उसकी मां की हालत को ध्यान में रखते हुए अस्थायी जमानत देने का अधिकार नहीं है? मां का क्या दोष है? अगर उसकी मां को कुछ हुआ तो क्या आप जिम्मेदारी लेंगे.’’ जमानत का विरोध करते हुए भाटी ने कहा कि दोषी बहुत प्रभावशाली व्यक्ति है और उसने अपनी मेडिकल जमानत का दुरुपयोग किया है. मामले की सुनवाई 24 अप्रैल को होगी.













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