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डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, होरमुज खुलवाने के लिए सहयोगियों की मदद नहीं चाहिए
सहयोगियों और नाटो की ओर से मदद के लिए इनकार मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें "मदद नहीं चाहिए." नाटो और दूसरे सहयोगियों ने होरमुज जलडमरुमध्य को सैन्य तरीकों से खुलवाने में अमेरिका को मदद देने से साफ इनकार कर दिया है. डॉनल्ड ट्रंप ने नाटो के इस रुख को "बेहद बेवकूफाना गलती" बताया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है, "हमें जिस तरह की सैन्य सफलता मिली है उसकी वजह से सच्चाई यह है कि हमें नाटो के सहयोग की ना तो इच्छा है ना ही जरूरत."
दो दिन पहले ट्रंप ने कई देशों से मदद मांगी थी लेकिन चीन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान, पोलैंड समेत तमाम देशों ने इससे साफ इनकार कर दिया. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने एक इंटरव्यू में कहा है कि जलडमरुमध्य की रक्षा के लिए कोई देश अपने लोगों का जीवन खतरे में डालने को तैयार नहीं है. कलास का यह भी कहना है, "हमें इसे खुला रखने के लिए कूटनीतिक तरीका ढूंढना होगा जिससे कि हमारे सामने भोजन संकट, उर्वरक संकट और साथ ही ऊर्जा संकट ना हो."
अमेरिका का कहना है कि उसने होरमुज इलाके में जमीन की गहराई तक मार करने वाले बमों का इस्तेमाल कर ईरानी मिसाइलों के भंडार को खत्म किया है.
फ्लाइट की 60 फीसदी सीटों के लिए नहीं देने होंगे अतिरिक्त रुपये
भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइनों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे किसी भी फ्लाइट की कम से कम 60 फीसदी सीटों के लिए यात्रियों से कोई अतिरिक्त चार्ज ना लें. मौजूदा समय में यात्रियों को अधिकतर सीटों को चुनने के लिए बेसिक किराए के अलावा अतिरिक्त रुपये देने होते हैं. उदाहरण के लिए अगर कोई यात्री खिड़की या गलियारे वाली सीट पर बैठना चाहता है तो उसे अधिक रुपये चुकाने होते हैं. अब नए नियम के बाद 60 फीसदी सीटें यात्रियों के चुनाव के लिए मुफ्त में उपलब्ध रहेंगी.
डीजीसीए ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को साथ-साथ बिठाया जाएगा. वहीं, खेल के सामानों और संगीत से जुड़े वाद्ययंत्रों की ढुलाई पारदर्शी और यात्री-अनुकूल तरीके से की जाएगी और इस दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाएगा. डीजीसीए ने एयरलाइनों से कहा है कि वे पालतू जानवरों को ले जाने के बारे में भी स्पष्ट और पारदर्शी नीतियां बनाएं.
डीजीसीए ने यह भी कहा है कि एयरलाइन, यात्री अधिकार ढांचे का सख्ती से पालन करें, खासतौर पर फ्लाइट में देरी होने, रद्द होने या बोर्डिंग नहीं मिलने की स्थिति में. एयरलाइनों को यात्री अधिकारों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बुकिंग प्लेटफॉर्म और एयरपोर्ट काउंटरों पर दिखाने के निर्देश भी दिए गए हैं. इसके साथ ही यात्रियों से स्पष्ट और उनकी भाषा में संवाद करने के लिए कहा गया है. इन नियमों के आने के बाद यात्रियों के हवाई सफर के अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है.













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