जरुरी जानकारी | गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश की समीक्षा कर रही फ्रैंकलिन टेम्पलटन एमएफ

नयी दिल्ली, पांच जून फ्रेंकलिन टेम्पलटन एमएफ ने कहा है कि वह छह ऋण योजनाओं को बंद करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मतदान की प्रक्रिया पर रोक लगाने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश की समीक्षा कर रही है।

ई-मतदान की प्रक्रिया नौ जून को शुरू होनी थी और ये 11 जून तक चलती और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 12 जून को निवेशकों की बैठक होनी थी।

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फंड हाउस ने प्रभावित निवेशकों को दो विकल्प दिए हैं- या तो न्यासियों द्वारा संपत्ति का विमुद्रीकरण किया जाए या फिर इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीसरे पक्ष की सेवाएं ली जाएं। इन पेशकश के अलावा निवेशकों के पास इन दोनों प्रक्रियाओं को नकारने का विकल्प भी था, लेकिन इससे संपत्ति के विमुद्रीकरण में देरी ही होगी।

इस संबंध में निवेशकों ने गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि फंड हाउस द्वारा ऋण योजनाओं को बंद करना गैरकानूनी था।

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फ्रैंकलिन टेम्पलटन एमएफ के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम इस समय मामले की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यकतानुसार उचित कदम उठाएंगे।’’

कंपनी ने बॉन्ड बाजार में नकदी की कमी और निवेशकों द्वारा अपनी धनराशि वापस लेने के दबाव का हवाला देते हुए अप्रैल में छह ऋण योजनाओं को बंद कर दिया था।

ये योजनाएं थीं फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनेमिक एक्यूरल फंड, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम अपॉर्चुनिटी फंड।

इन योजनाओं में निवेशकों के करीब 28,000 करोड़ रुपये फंसे हैं।

इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने एक निवेशक समूह चेन्नई फाइनेंशियल मार्केट्स अकाउंटेबिलिटी की याचिका पर इस संबंध में फ्रैंकलिन टेम्पलटन एमएफ और बाजार नियामक सेबी को नोटिस जारी किया था।

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