यह उपाय ऐसे समय किया गया है जब इससे पहले ही यूरोपीय देशों की सरकारें अपने खर्च बढ़ा चुकी हैं। इसके अलावा अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व समेत बैंक ऑफ इंग्लैंड, बैंक ऑफ जापान व अन्य केंद्रीय बैंकों ने भी इस तरह के राहत उपाय किये हैं।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक यूरो मुद्रा का इस्तेमाल करने वाले यूरोप के 19 देशों का केंद्रीय बैंक है।
ईसीबी ने मौद्रिक उपाय कार्यक्रम को भी जून 2021 तक के लिये बढ़ा दिया है। पहले यह कार्यक्रम दिसंबर 2020 तक के लिये था।
ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड बैंक के संचालन परिषद की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में अर्थव्यवस्था का अपना आकलन भी सामने रखेंगी। संचालन परिषद के 25 सदस्य टेली कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक करने वाले हैं।
ईसीबी महामारी सहायता कार्यक्रम के तहत वाणिज्यिक बैंकों से कॉरपोरेट व सरकारी बांड तथा अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों को खरीदता है। इनका भुगतान नयी मुद्रा से किया जाता है।
आपात सहायता कार्यक्रम के तहत बड़े स्तर पर बांड व अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां खरीदने की ईसीबी की योजना से इस बात का भी पता चलता है कि वह ब्याज दरों को कम बनाये रखने के लिये प्रयासरत है। इससे भारी कर्ज के बोझ में दबे इटली जैसे देशों को कम लागत पर नया कर्ज मिल पाना भी सुनिश्चित होगा।
हालांकि ईसीबी का कहना है कि बांडों की उसकी खरीद इटली की मदद करने को लक्षित नहीं हैं। लेकिन ईसीबी ने आपात सहायता कार्यक्रम के तहत अभी तक अन्य देशों की तुलना में इटली के बांड अधिक खरीदे हैं।
ईसीबी के इस कदम से पहले यूरो क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी ने बुधवार को कर राहत तथा इलेक्ट्रिक कार पर सब्सिडी आदि के जरिये 130 अरब यूरो की अतिरिक्त राहत के उपायों का प्रस्ताव किया।
ईसीबी ने बृहस्पतिवार को अपनी ब्याज दर को ऐतिहासिक निम्न स्तर पर बनाये रखा। अभी ईसीबी शून्य प्रतिशत की दर पर बैंकों को उधार दे रहा है। इसके अलावा ईसीबी ने बैंकों द्वारा केंद्रीय बैंक के पास धन जमा रखने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने के लिये एक दिन की परिपक्वता वाले जमा पर ब्याज दर को 0.50 प्रतिशत ऋणात्मक कर दिया है।
एपी
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