अगरतला, 26 जून भारत और बांग्लादेश के अर्थशास्त्रियों ने ‘सीमावर्ती हाटों’ को फिर से तुरंत खोलने की मांग करते हुए कहा कि ज्यादा समय तक इन बाजारों को बंद करने से स्थानीय लोग आर्थिक रूप से पिछड़ जाएंगे जिसके बाद वे अनौपचारिक रूप से सीमा पार व्यापार करने के लिए बाध्य होंगे।
एक वेबिनार में हिस्सा लेते हुए अर्थशास्त्रियों ने कहा कि सीमावर्ती हाटों को शुरू करना इसलिए भी जरूरी है कि उन इलाकों में ‘‘शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित’’ हो सके।
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भारत-बांग्लादेश सीमा पर चार सीमावर्ती हाट स्थित हैं -- त्रिपुरा और मेघालय में दो- दो हाट हैं। कोरोना वायरस फैलने के कारण ये बाजार अब बंद हैं।
वेबिनार में बांग्लादेश बैंक के पूर्व गवर्नर अतीउर रहमान ने कहा, ‘‘स्थानीय स्तर और खास तौर पर सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था को जीवंत बनाए रखने के महत्व को देखते हुए सीमा पर हाटों को अविलंब खोलने की जरूरत है।’’
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बांग्लादेश बैंक पड़ोसी देश का केंद्रीय बैंक है।
रहमान ने कहा कि सीमावर्ती हाटों ने इस बात को रेखांकित किया है कि सीमा पार व्यापार होने से स्थानीय लोगों की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।
डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के नयी दिल्ली कार्यालय में पॉलिसी प्रबंधक मोहित सिप्पी ने कहा कि सीमावर्ती हाटों का उस क्षेत्र में महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव होता है।
सिप्पी ने कहा, ‘‘इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है ताकि वे आर्थिक रूप से ज्यादा स्वतंत्र और सशक्त बन सकें।’’
आर्थिक और लोक नीति के मुद्दों पर काम कर रहे जयपुर के थिंक टैंक सीयूटीएस इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक बिपुल चटर्जी ने कहा, ‘‘भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई के मानकों को पूरा करते हुए हाटों को तुरंत फिर से खोला जाना चाहिए।’’
सीमावर्ती हाटों पर वेबीनार चर्चा में भारत और बांग्लादेश के कई अन्य अर्थशास्त्रियों ने भी हिस्सा लिया।
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