देश की खबरें | कांग्रेस ने एमएसपी को लेकर तीन शर्तें रखीं, संसद की कार्यवाही के बहिष्कार का फैसला किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 22 सितंबर कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर नए कृषि विधेयकों के माध्यम से किसानों को जड़ से खत्म करने का प्रयास करने का आरोप लगाया और कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर उसकी मांग माने जाने तक संसद की कार्यवाही का बहिष्कार जारी रहेगा।

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि किसानों को जड़ से साफ करके कुछ पूंजीपतियों का विकास करने का प्रयास हो रहा है।

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उन्होंने ट्वीट किया कि 2014 में मोदी जी का चुनावी वादा किसानों को स्वामीनाथन आयोग वाला एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) दिलाने का था। साल 2015 में मोदी सरकार ने अदालत में कहा कि उनसे ये न हो पाएगा। 2020 में ‘काले क़ानून’ लाए गए।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘ मोदी जी की नीयत ‘साफ़’, कृषि-विरोधी नया प्रयास, किसानों को करके जड़ से साफ़, पूंजीपति ‘मित्रों’ का ख़ूब विकास।’’

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘राज्यसभा की हमेशा से परंपरा रही है कि कोई भी विधेयक शोर-शराबे में पारित नहीं कराया जाता। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि करोड़ों किसानों से संबंधित विधेयकों को मतदान के बगैर पारित किया गया। विपक्ष की ओर से दिए गए संशोधनों पर भी कोई मतदान नहीं हुआ।’’

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, ‘‘हमने कल राष्ट्रपति जी को लिखा है कि जो विधेयक पारित हुए हैं उनमें प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। ऐसे में वह इनको स्वीकृति नहीं दें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एमएसपी को लेकर हमारी तीन शर्तें हैं। पहली यह कि सदन में एक और विधेयक लाया जाए या फिर प्रधानमंत्री अथवा कृषि मंत्री सदन में बयान दें कि एमएसपी से कम खरीद को गैर कानूनी बनाया जाएगा। दूसरी बात यह है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एमएसपी का सी 2 फार्मूला लागू हो।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि तीसरी शर्त यह है कि राज्यों की एजेंसियां या एफसीआई भी खरीद करे तथा एमएसपी के हिसाब से खरीद हो।’’

आजाद ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘जब तक ये तीन शर्तें लागू नहीं होंगी तब तक हम कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे।’’

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने राज्यसभा के निलंबित सदस्यों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए किसानों के मुद्दे पर लोकसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

निचले सदन में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘‘एक भाई को तकलीफ हो, तब दूसरे भाई को भी तकलीफ होती है। किसानों के मुद्दे पर किसान आंदोलन कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कृषि मंत्री कृषि संबंधी विधेयक वापस लेते हैं तब हमें कोई परेशानी नहीं होगी। यह सरकार किसान विरोधी है, मजदूर विरोधी है।’’

पार्टी महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एमएसपी को कृषि कानूनों से बाहर रखना खेती के खिलाफ मोदी सरकार का षड्यंत्र है। देश का किसान और खेत मजदूर सड़कों पर है और सत्ता के नशे में मदमस्त मोदी सरकार उनकी रोजी रोटी छीन खेत खलिहान को पूंजीपतियों के हवाले करने का षड्यंत्र कर रही है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कृषि विरोधी तीन काले कानूनों ने समूची मोदी सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मुखौटे को उतार दिया है।’’

सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘किसान आंदोलन के चलते कल मोदी सरकार ने आनन-फानन में रबी फसलों, विशेषतः गेहूं का एमएसपी घोषित किया। अब मोदी सरकार एमएसपी की प्रणाली को ही लागत+परिवारिक मजदूरी+जमीन का किराया भी न देकर खत्म करने में लगी है।’’

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘‘सरकार ने कृषि विधेयकों का बचाव करते हुए विज्ञापन जारी किया है। विज्ञापन में एक पंक्ति कहती है कि 'वन नेशन वन मार्केट' किसानों को आजादी देगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘छोटे किसान लगभग 85 प्रतिशत हैं, जिनके पास बेचने के लिए बहुत कम सरप्लस बचता है। अगर उन्हें धान या गेहूं की कुछ मात्रा बेचनी पड़े तो उन्हें पूरे देश में हजारों बाजार की जरूरत है, एकल बाजार की नहीं। बड़े गांवों और छोटे शहरों में किसानों के हजारों बाजार बनाने के लिए विधेयक में क्या प्रावधान है? हजारों बाजार किसानों को आजादी देंगे।’’

चिदंबरम ने सवाल किया, ‘‘यदि सरकार की मंशा एमएसपी की गारंटी देने की है, तो उस विधेयक में ऐसा कोई खंड क्यों नहीं है,जो यह बताए कि उपज का मूल्य एमएसपी से कम नहीं होगा?’’

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