जरुरी जानकारी | कृत्रिम मेधा, डिजिटल वित्तीय सेवाएं समेत 20 बाजार ला सकते हैं अर्थव्यवस्थाओं में बदलाव: डब्ल्यूईएफु

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने बुधवार को शिक्षा प्रौद्योगिकी और कौशल विकास सेवा, कृत्रिम मेधा, डिजिटल वित्तीय सेवाएं जैसे भविष्य की 20 बाजारों की सूची जारी की जो अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी और टिकाऊ रूप से बदलाव ला सकते हैं। मंच ने भारत को उन देशों के साथ रखा है जहां फिलहाल इस प्रकार के बदलाव को लेकर मजबूत प्रौद्योगिकीय व्यवस्था है।

जिनेवा के इस संगठन ने ‘जॉब री-सेट’ (रोजगार बदलाव) विषय पर आयोजित ऑनलाइन सम्मेलन में श्वेत पत्र जारी करते हुए यह भी कहा कि भारत समेत कई देशों को इन बाजारों को आगे ले जाने के लिये सामाजिक और संस्थागत ताने-बाने को विकसित करने की जरूरत होगी।

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कल यानी भविष्य की इन बाजारों की सूची में कृत्रिम मेधा, शिक्षा प्रौद्योगिकी और कौशल विकास सेवा, अंतरिक्ष यात्राएं, जीन और डीएनए अनुक्रम, बीमारी के इलाज और उसकी रोकथाम के लिये उभरता नया रुख (प्रीसिशन मेडिसिन) और दुर्लभ बीमारियों को ठीक करने से जुड़ी दवाएं, उपग्रह सेवा, ग्रीनहाउस गैस भत्ता, पुन:वनीकरण सेवाएं और हाइड्रोजन को रखा गया हैं।

इसके अलावा सूची में इलेक्ट्रिक वाहन, प्लास्टिक पुनर्चक्रण, डेटा, हरइपरलूप आधारित परिवहन सेवाएं, डिजिटल वित्तीय सेवाएं, बेरोजगारी बीमा आदि को जगह दी गयी हैं।

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मंच ने कहा कि इनमें से कुछ बाजार विशेष रूप से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर निर्भर करेंगी जबकि अन्य के लिये नये सामाजिक और संस्थागत ढांचे की जरूर होगी। कुछ बाजारों में दोनों तत्व मिले-जुले रूप में होंगे।

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि ये बाजार समाज के संरक्षण और लोगों को सशक्त बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार हो सकते हैं।

मंच ने कहा कि जिन देशों में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ मजबूत सामाजिक पूंजी और भविष्योन्मुख संस्थानें हैं, वे आर्थिक बदलाव के लिये जरूरी इस बाजारों को बेहतर तरीके से सृजित कर सकते हैं।

डब्ल्यूईएफ ने कहा, ‘‘इस समय दुनिया कोविड-19 महामारी के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव से जूझ रही है। ऐसे में नई अर्थव्यवस्था को आकार देने की मांग बढ़ रही है जो व्यापक रूप से सामाजिक और पर्यावरण चुनौतियों का समाधान करने के साथ आर्थिक वृद्धि सृजित कर सके।’’

मंच ने कहा, ‘‘इसे हासिल करने और नये बाजारों को संबल देने के लिये दुनिया को प्रौद्योगिकी और सामाजिक-संस्थागत नवप्रवर्तन का महत्वकांक्षी एजेंडा तय करने की जरूरत है। इसी से इन चुनौतियों के समाधान में मदद मिल सकती है।’’

डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी की क्षमता है, मजबूत सामाजिक पूंजी और भविष्योन्मुख संस्थाएं हैं, वे संभवत: नये बाजारों के विकास में सफल होंगे।

इस लिहाज से नीदरलैंड, लक्जमबर्ग, डेनमार्क, जर्मनी और नार्वे के पास सामाजिक-संस्थागत नवप्रवर्तन की काफी क्षमता है। वहीं जापान, जर्मनी, अमेरिका, कोरिया गणराज्य और फ्रांस में प्रौद्योगिकीय विकास के मामले में सर्वाधिक संभावना है।

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि ज्यादातर विकसित अर्थव्यस्थाएं इन दोनों मामले में अच्छी स्थिति में हैं। कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाएं चेक गणराज्य, इस्र, इटली, जापान और स्पेन के साथ ब्रिक देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) तथा कुछ अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं (हंगरी और पोलैंड) में इस प्रकार के बाजारों के लिये मजबूत प्रौद्योगिकीय व्यवस्था है लेकिन उन्हें सामाजिक और संस्थागत ताना-बाना विकिसत करने की जरूरत होगी।

रिपोर्ट के अनुसार भारत, स्पेन और जापान सामाजिक-संस्थागत नवप्रवर्तन के मामले में तय मानदंड से थोड़े नीचे हैं जबकि ताइवान, चीन की अर्थव्यवस्थाएं उससे ऊपर हैं।

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