Kadaknath cock(Photo credit: Pixabay )
इंदौर, 14 अगस्त : मध्य प्रदेश के झाबुआ मूल का कड़कनाथ मुर्गा डेढ़ दशक पहले विलुप्ति की ओर बढ़ रहा था, लेकिन नस्ल बचाने के वैज्ञानिक प्रयासों और जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स (जीआई) का अहम तमगा मिलने के बाद इसके दिन बदल गए हैं.
काले रंग के पौष्टिक मांस के लिए मशहूर यह कुक्कुट प्रजाति इस आदिवासी बहुल जिले से निकलकर देश के अधिकांश हिस्सों में फैल चुकी है. यह भी पढ़ें : देश की खबरें | मुंबई के निवासियों ने कहा, आम निवेशकों के लिए आदर्श थे झुनझुनवाला
झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के प्रमुख डॉ. आईएस तोमर ने पीटीआई- से कहा,‘‘इन दिनों देश के लगभग हर राज्य के कुक्कुट पालन केंद्रों के संचालक कड़कनाथ मुर्गे की शुद्ध नस्ल के चूजों के लिए झाबुआ की अलग-अलग हैचरी (मशीन से अंडे सेकर इनसे चूजे निकालने का उपक्रम) का रुख कर रहे हैं."













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