विश्व स्वास्थ्य संगठन ने छोटे शिशुओं के लिए विशेष रूप से तैयार की गई पहली मलेरिया दवा को मंजूरी दे दी है. यह नई दवा 5 किलोग्राम से कम वजन के बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है.अब तक छोटे बच्चों का मलेरिया का इलाज बड़े बच्चों के लिए बनी दवाओं से किया जाता था. ये दवाएं कई समस्याओं का कारण बनती थीं. पहली समस्या यह थी कि इन दवाओं को नवजातों के लिए सही मात्रा में देना बहुत कठिन होता था. दूसरी बड़ी समस्या यह थी कि ये दवाएं नवजात शिशुओं के लिए खतरनाक हो सकती थीं और उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती थीं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह समझा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. दुनिया भर में मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में से करीब 70 प्रतिशत मौतें इसी उम्र के बच्चों की होती हैं. इसलिए एक विशेष दवा बनाना बहुत जरूरी था, जो पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हो.
नई दवा के फायदे क्या हैं
नई दवा आर्टेमेथर और लूमेफेंट्राइन का संयोजन है. यह दवा 5 किलोग्राम से कम वजन के नवजातों के लिए पूरी तरह सुरक्षित साबित हुई है. डब्ल्यूएचओ की इस नई मंजूरी के बाद, अब वे देश भी इस दवा को अपने यहां अधिकृत कर सकेंगे जिनके पास दवा का पूर्ण क्लीनिकल ट्रायल करने की क्षमता नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां अब इस दवा को खरीद सकती हैं और उन सभी देशों में बांट सकती हैं जहां मलेरिया का संक्रमण अधिक है. इस दवा के आने से मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में लाखों बच्चों की जान बचाई जा सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख तेद्रोस अधनोम गेब्रयेसुस ने कहा है कि सदियों से मलेरिया बच्चों को उनके माता-पिता से छीन रहा है, लेकिन आज स्थिति बदल रही है. नई दवाएं, नए डायग्नोस्टिक टेस्ट और उन्नत मच्छर जाली मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को बदल रहे हैं.
गर्भावस्था में मलेरिया का खतरा
मलेरिया सिर्फ छोटे बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए भी बहुत खतरनाक है. हर साल मलेरिया की वजह से लगभग 10,000 माताओं की मौत हो जाती है. साथ ही, करीब 2 लाख बच्चे मलेरिया की वजह से जन्म के समय मर जाते हैं. इसके अलावा, लगभग 5.50 लाख बच्चे कम वजन के साथ पैदा होते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, साल 2000 के बाद से वैश्विक कोशिशों से मलेरिया से होने वाली 1.4 करोड़ मौतों को रोका जा सका है. लेकिन अभी भी मलेरिया एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है. साल 2024 में दुनिया भर में लगभग 28.2 करोड़ मलेरिया के मामले सामने आए और 5 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई.
अफ्रीका में मलेरिया की भयानक स्थिति
दुनिया भर में मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में से 90 प्रतिशत अफ्रीका के सहारा इलाके के दक्षिण में होती हैं. यानी विश्व में होने वाली 90 फीसदी मलेरिया की मौत सिर्फ इसी क्षेत्र में होती हैं. इस नई दवा से यहां 3 करोड़ नवजातों को फायदा मिलेगा जो हर साल मलेरिया प्रभावित इलाकों में पैदा होते हैं.
अफ्रीका में मलेरिया के डायग्नोसिस में भी समस्या है. होर्न ऑफ अफ्रीका के देशों में तो 80 फीसदी तक मामलों को गलत समझ लिया जाता है. इसका मतलब यह है कि मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता और उनकी मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है. हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तीन नए, तेजी से परिणाम देने वाले टेस्ट को भी मंजूरी दी है, जो बेहतर डायग्नोसिस में मदद करेंगे.
यह नई दवा मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम है, लेकिन यह अकेली नहीं है. साल 2021 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली मलेरिया वैक्सीन की सिफारिश की थी. तब से लेकर अब तक, इस वैक्सीन को अफ्रीका के कई देशों में बड़े पैमाने पर छोटे बच्चों को दिया जा रहा है. हाल ही में नए डायग्नोस्टिक टेस्ट को भी मंजूरी मिली है क्योंकि मलेरिया के परजीवी धीरे-धीरे बदल रहे हैं और उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया है.









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