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Thailand Cambodia Conflict Reason: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच झगड़े की जड़ प्राचीन हिंदू मंदिर क्यों हैं? जानें 2 बौद्ध देशों के बीच क्या है विवाद

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों पुराना विवाद प्राचीन हिंदू मंदिरों, विशेष रूप से प्रिह विहियर और ता मुएन थोम को लेकर है. इस झगड़े की जड़ औपनिवेशिक काल के फ्रांसीसी नक्शे हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने भी कंबोडिया के पक्ष में सही ठहराया है. यह सीमा विवाद राष्ट्रीय गौरव से जुड़कर अक्सर दोनों देशों के बीच हिंसक सैन्य झड़पों का कारण बनता है.

Thailand Cambodia Conflict Reason: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच झगड़े की जड़ प्राचीन हिंदू मंदिर क्यों हैं? जानें 2 बौद्ध देशों के बीच क्या है विवाद

Thailand Cambodia Conflict Reason: थाईलैंड और कंबोडिया, दो पड़ोसी देश, जिनके बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते हैं. लेकिन इन्हीं रिश्तों के बीच एक ऐसा विवाद भी है जो 50 साल से भी ज़्यादा पुराना है और जिसकी वजह से कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं. इस विवाद के केंद्र में हैं कुछ प्राचीन हिंदू मंदिर.

चलिए समझते हैं कि ये पूरा विवाद है क्या और क्यों ये मंदिर इतने अहम हैं.

विवाद के केंद्र में दो मुख्य मंदिर

  1. प्रिह विहियर मंदिर (Preah Vihear Temple): यह 900 साल पुराना एक शानदार मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर कंबोडिया के डांगरेक पहाड़ों में एक 525 मीटर ऊंची चोटी पर बना है. इसे प्राचीन खमेर साम्राज्य ने बनवाया था. यह मंदिर न सिर्फ कंबोडिया, बल्कि थाईलैंड के लोगों के लिए भी एक पवित्र स्थल है.
  2. ता मुएन थोम मंदिर (Ta Muen Thom Temple): यह 12वीं सदी का एक शिव मंदिर है. हाल ही में जो हिंसक झड़पें हुईं, वे इसी मंदिर के पास शुरू हुईं. यह मंदिर भी खमेर वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है और इसके गर्भगृह में आज भी एक प्राकृतिक शिवलिंग स्थापित है.

हालांकि दुनिया में अंकोरवाट मंदिर ज़्यादा प्रसिद्ध है, लेकिन ये मंदिर दोनों देशों के बीच तनाव की मुख्य वजह बने हुए हैं.

हाल में क्या हुआ?

हाल ही में, थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर दशकों की सबसे हिंसक झड़प हुई. इस लड़ाई में 12 लोग मारे गए, दर्जनों घायल हुए और हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा.

लड़ाई ता मुएन थोम मंदिर के पास शुरू हुई. थाईलैंड का कहना है कि कंबोडिया के सैनिक उनके इलाके में ड्रोन से जासूसी कर रहे थे, जिसके जवाब में उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी. वहीं, कंबोडिया का आरोप है कि थाईलैंड ने उनकी संप्रभुता का उल्लंघन किया और उन पर हमला किया. इस घटना के बाद, थाईलैंड ने सीमा पूरी तरह से बंद कर दी और करीब 40,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया.

झगड़े की असली जड़ क्या है?

इस पूरे विवाद की जड़ औपनिवेशिक काल (Colonial Era) से जुड़ी है, जब फ्रांस ने इस इलाके के नक्शे बनाए थे.

  • पुराने नक्शे का विवाद: 1907 में, फ्रांस ने एक नक्शा बनाया था जिसने प्रिह विहियर मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा दिखाया, जो उस समय एक फ्रांसीसी संरक्षित राज्य था. उस वक्त थाईलैंड (तब सियाम) ने नक्शा मान लिया था.
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का फैसला: कई सालों बाद, थाईलैंड ने इस नक्शे को मानने से इनकार कर दिया. मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में गया. 1962 में, ICJ ने कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि मंदिर कंबोडिया का है.
  • विवाद खत्म नहीं हुआ: इसके बावजूद, विवाद चलता रहा. 2011 में फिर से झड़पें हुईं. इसके बाद 2013 में, ICJ ने अपने फैसले को और साफ करते हुए कहा कि न सिर्फ मंदिर, बल्कि उसके आसपास का पूरा इलाका कंबोडिया का है और थाईलैंड को अपनी सेना वहां से हटानी होगी.

राजनीति और राष्ट्रीय गौरव

यह विवाद सिर्फ ज़मीन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और राजनीति का भी है.

जब 2008 में कंबोडिया ने प्रिह विहियर मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage site) के रूप में सूचीबद्ध करवाया, तो थाईलैंड में इसका भारी विरोध हुआ. इस फैसले का समर्थन करने वाले थाईलैंड के विदेश मंत्री को घरेलू दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें दोनों तरफ के सैनिक मारे गए.

संक्षेप में, यह विवाद प्राचीन विरासत, औपनिवेशिक काल में खींची गई सीमाओं और आधुनिक राष्ट्रवाद का एक जटिल मिश्रण है. भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर जो कभी साझा संस्कृति का प्रतीक थे, आज दोनों देशों के बीच तनाव का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 25, 2025 10:19 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).