Ebola Outbreak: कांगो-युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों के बीच WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, जानें यह दुर्लभ महामारी क्या है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया है. बुंडिबुग्यो नामक एक दुर्लभ स्ट्रेन के कारण अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी किया गया है.
Ebola Outbreak: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) और पड़ोसी देश युगांडा में पैर पसार रहे इबोला प्रकोप को वैश्विक चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया है. स्वास्थ्य संगठन ने यह कदम इस बात की पुष्टि होने के बाद उठाया है कि इबोला वायरस के एक दुर्लभ स्ट्रेन 'बुंडिबुग्यो' (Bundibugyo virus) ने कांगो के पूर्वी क्षेत्र में कम से कम 65 लोगों की जान ले ली है. अब यह वायरस सीमाओं को पार कर अन्य क्षेत्रों में भी फैलने लगा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस उच्चतम स्तर के अलर्ट का उद्देश्य वायरस को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वैश्विक फंडिंग और चिकित्सा संसाधनों में तेजी लाना है.
दुर्लभ स्ट्रेन का सीमा पार प्रसार और चुनौतियां
मौजूदा महामारी का केंद्र मुख्य रूप से कांगो (DRC) के पूर्वी प्रांत हैं. यह क्षेत्र अपनी उच्च जनसंख्या गतिशीलता और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के कारण ऐतिहासिक रूप से वायरल संक्रमणों के प्रति संवेदनशील रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य प्रणालियों द्वारा इस क्लस्टर की आधिकारिक पहचान किए जाने से पहले यह वायरस लगभग तीन हफ्तों तक बिना किसी सुराग के फैल रहा था. इसके चलते शुरुआती दौर में संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है. यह भी पढ़े: Ebola Virus Alert: कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहा इबोला वायरस, मौतों के बढ़ते आंकड़ों से दुनिया में बढ़ी चिंता; WHO ने लोगों को किया सतर्क
युगांडा में एक आयातित (Imported) मामले की पुष्टि होने के बाद इस आपातकालीन प्रतिक्रिया को और तेज कर दिया गया, जो सक्रिय सीमा पार संक्रमण का स्पष्ट संकेत है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस नामक एक दुर्लभ स्ट्रेन के कारण फैल रहा है. आमतौर पर पाए जाने वाले जाइरे (Zaire) स्ट्रेन के विपरीत, जिसे पिछले महामारियों के दौरान स्थापित टीकों के माध्यम से नियंत्रित कर लिया गया था, इस नए स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत या व्यावसायिक रूप से उपलब्ध टीका मौजूद नहीं है.
क्या है इबोला वायरस बीमारी (EVD)?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला वायरस बीमारी (जिसे पहले इबोला रक्तस्रावी बुखार के रूप में जाना जाता था) मनुष्यों में होने वाली एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर और घातक बीमारी है. यह एक जूनोटिक (Zoonotic) वायरस है, जिसका अर्थ है कि यह शुरू में जंगली जानवरों जैसे कि फ्रूट बैट्स (चमगादड़), साही और बंदरों से मनुष्यों में फैलता है. इसके बाद यह मानव-से-मानव संपर्क के माध्यम से आगे बढ़ता है.
इस वायरस के मुख्य लक्षण और विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
-
प्रसार (Transmission): यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त, स्राव, अंगों या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके अलावा संक्रमित फ्लूइड से दूषित सतहों (जैसे कपड़े या बिस्तर) के संपर्क में आने से भी इसका प्रसार होता है.
-
शुरुआती लक्षण (Symptoms): बीमारी की शुरुआत अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश के साथ होती है. इसके बाद उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते (Rash) और किडनी व लिवर की कार्यप्रणाली में गिरावट आने लगती है.
-
रक्तस्राव (Haemorrhaging): गंभीर स्थिति में पहुंचने पर कुछ मरीजों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव शुरू हो जाता है. इसमें मसूड़ों से खून आना या मल में खून आना शामिल है.
-
संक्रमण की अवधि: कोई भी व्यक्ति तब तक दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकता जब तक कि उसमें इस बीमारी के सक्रिय लक्षण दिखाई न देने लगें. इस वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड (लक्षण दिखने का समय) 2 से 21 दिनों तक का होता है.
वैश्विक आपातकाल (PHEIC) लागू होने के मायने
'सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) एक औपचारिक वैश्विक व्यवस्था है. इसका उपयोग WHO द्वारा ऐसी असाधारण स्वास्थ्य घटनाओं के लिए किया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलकर कई देशों के लिए जोखिम पैदा करती हैं. इस दर्जे के लागू होने के बाद बीमारी के अनियंत्रित विस्तार को रोकने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया अनिवार्य हो जाती है.
इस घोषणा के बाद WHO प्रभावित क्षेत्रों में विशेष आपातकालीन चिकित्सा टीमों को तैनात कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय सहायता के रास्ते खोल सकता है. इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालयों को फील्ड प्रयोगशालाएं स्थापित करने, मरीजों को अलग (Isolate) करने और व्यापार या यात्रा पर प्रतिकूल प्रतिबंध लगाए बिना सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने में मदद करना है.
उपचार और रोकथाम के प्रयास
इबोला वायरस बीमारी की औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है. हालांकि, पिछले अनुभवों को देखें तो अलग-अलग स्ट्रेन और चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता के आधार पर यह मृत्यु दर 25 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक भिन्न रही है. चूंकि इस मौजूदा बुंडिबुग्यो वेरिएंट का कोई प्रामाणिक टीका नहीं है, इसलिए चिकित्सा टीमें पूरी तरह से 'सपोर्टिव केयर' पर निर्भर हैं. इसमें मरीजों को लगातार रिहाइड्रेट करना और लक्षणों के आधार पर उपचार देना शामिल है, जो शुरुआती दौर में शुरू होने पर मरीज के बचने की संभावना को काफी बढ़ा देता है.
संक्रमण को रोकने के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. WHO और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियां कांगो और युगांडा के स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि सुरक्षित अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल लागू किए जा सकें, ग्रामीण क्लीनिकों में संक्रमण नियंत्रण के सख्त उपाय किए जा सकें और लोगों को लक्षण दिखते ही तुरंत रिपोर्ट करने के लिए शिक्षित किया जा सके.
(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2026 02:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

