विदेश

महाशक्तियों की नई दुनिया में ताकत का वर्चस्व: जर्मन चांसलर

जर्मनी के चांसलर मैर्त्स के मुताबिक पुरानी विश्व व्यवस्था बिखर रही है और नया वर्ल्ड ऑर्डर सूकून देने वाला नहीं है.

महाशक्तियों की नई दुनिया में ताकत का वर्चस्व: जर्मन चांसलर
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी के चांसलर मैर्त्स के मुताबिक पुरानी विश्व व्यवस्था बिखर रही है और नया वर्ल्ड ऑर्डर सूकून देने वाला नहीं है. उन्होंने यूरोप और अमेरिका की साझेदारी पर फिर से जोर दिया है.जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने भी गुरुवार को दावोस में ग्रीनलैंड के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन के बदलते दौर जिक्र किया. विश्व आर्थिक फोरम को संबोधित करते हुए जर्मन चांसलर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया अब एक ऐसे दौर में दाखिल हो चुकी है, जहां रूस और चीन, अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने कहा, "महाशक्तियों वाली नई दुनिया ताकत, क्षमता और जरूरत पड़ने पर शक्ति से स्थापित हो रही है. यह सूकून पहुंचाने वाला कतई नहीं है."

चांसलर मैर्त्स ने कहा कि यूरोप के नाटो साझेदारों को आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ज्यादा कदम उठाने होंगे, "हम डेनमार्क, ग्रीनलैंड, उत्तर को रूसी खतरे से बचाएंगे. हम ट्रांस अटलांटिक साझेदारी के स्थापित सिद्धांतों संप्रभुता और अखंडता पर अडिग रहेंगे." बातचीत के जरिए एक साझा हित तक पहुंचने की वकालत करते हुए यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के चासंलर ने कहा, "हम डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका की बातचीत का इन्हीं सिंद्धातों के तहत समर्थन करते हैं."

ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बदले रुख का स्वागत करते हुए मैर्त्स ने कहा, "यह अच्छी खबर है कि हम सही दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. मैं राष्ट्रपति ट्रंप के बीती रात दिए गए बयान का स्वागत करता हूं, यह आगे बढ़ने का सही रास्ता है." ट्रंप को यूरोपीय चिंताओं के समाधान का सुझाव देते हुए जर्मन चांसलर ने यह भी कहा, "हालिया महीनों की झल्लाहट और गुस्से के बावजूद, हमें ट्रांस अटलांटिक पार्टनरशिप को खारिज नहीं करना चाहिए."

यूरोप के दबाव में बदले ट्रंप के सुर

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड डील का जवाब देते हुए गुरुवार को कहा कि उनका देश अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं कर सकता है. एक दिन पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शिकरत के लिए दावोस पहुंचे ट्रंप ने कहा था कि वह नाटो प्रमुख के साथ आर्कटिक की सुरक्षा के लिए "भविष्य की एक डील का ढांचा" बनाने पर सहमत हो गए हैं.

ट्रंप ने दावोस में ही ग्रीनलैंड के मुद्दे पर आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की अपनी धमकी को भी वापस ले लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह ग्रीनलैंड के लिए गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम पर भी बातचीत कर रहे हैं. 175 अरब डॉलर के इस कई परतों वाले सिस्टम के तहत अमेरिका पहली बार अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की सोच सकता है. ट्रंप ने इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी और कहा कि इस पर अभी बातचीत चल रही है.

ट्रंप के इन बयानों के बाद, नाटो के महासचिव और नीदरलैंड्स के पूर्व प्रधानमंत्री मार्क रुटे ने कहा कि उन्होंने डेनमार्क की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में जब रुटे से पूछा गया कि क्या ट्रंप के प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत ग्रीनलैंड, डेनमार्क की राजशाही का हिस्सा बना रहेगा तो रुटे ने कहा, "आज रात राष्ट्रपति के साथ बाचतीच में यह मुद्दा आया ही नहीं."

डेनमार्क ने भी सुझाया आगे का रास्ता

दावोस से आए इन बयानों के बाद डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन ने कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा पूरे नाटो के लिए अहम है. पीएम ने कहा कि उन्होंने, रुटे से इस बारे में दो बार बात भी की है. एक बार ट्रंप और रुटे की मुलाकात से पहले और फिर उसके बाद. फ्रेडेरिक्सन ने कहा कि डेनमार्क अपने साझेदारों के साथ सकारात्मक संवाद चाहता है. इस संवाद में अमेरिका का गोल्डन डोम प्रोग्राम भी शामिल है, लेकिन "यह हमारी क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए होना चाहिए."

नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने भी गुरुवार को कहा, रुटे ने "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मुलाकात में संप्रभुता से समझौते का कोई भी प्रस्ताव नहीं रखा." उन्होंने कहा कि डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच बातचीत होती रहेगी और इसका मकसद "ग्रीनलैंड में, आर्थिक या सैन्य रूप से रूस और चीन को कोई कदम न जमाने देने" का लक्ष्य होगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 22, 2026 09:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).