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नेपाल में उग्र विरोध प्रदर्शन; पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी की जलकर मौत, नेताओं के घर बने हिंसा का निशाना

नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है. देशभर में Gen Z के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन लगातार हिंसक रूप ले रहे हैं. राजधानी काठमांडू समेत कई हिस्सों में नेताओं के घरों, सरकारी इमारतों और संवैधानिक संस्थानों पर हमले किए जा रहे हैं.

नेपाल में उग्र विरोध प्रदर्शन; पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी की जलकर मौत, नेताओं के घर बने हिंसा का निशाना
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काठमांडू: नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है. देशभर में Gen Z के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन (Nepal Protests) लगातार हिंसक रूप ले रहे हैं. राजधानी काठमांडू समेत कई हिस्सों में नेताओं के घरों, सरकारी इमारतों और संवैधानिक संस्थानों पर हमले किए जा रहे हैं. हिंसा का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब पूर्व प्रधानमंत्री झलानाथ खनाल की पत्नी, राजलक्ष्मी चित्राकर (Rajalakshmi Chitrakar) घर में मौजूद थीं और प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी. गंभीर झुलसने के कारण उनकी मौत कृतिपुर बर्न अस्पताल में हो गई.

इसी तरह प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और झलानाथ खनाल के आवासों पर भी हमला किया और कई घरों को आग के हवाले कर दिया.

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नेताओं पर भी जानलेवा हमले

पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक के घर को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया, जबकि उन्होंने एक दिन पहले ही इस्तीफा दे दिया था. विदेश मंत्री अर्जुना राणा प्रदर्शन के दौरान घायल हो गईं. ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का का घर भी आग की भेंट चढ़ा. वित्त मंत्री बिष्णु पौडेल पर तो सड़क पर हमला हुआ. एक वीडियो में दिखा कि उन्हें प्रदर्शनकारियों ने दौड़ाकर पीटा और लात-घूसे मारे.

संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे प्रदर्शनकारी

गुस्साई भीड़ यहीं नहीं रुकी. प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन और सुप्रीम कोर्ट जैसे अहम सरकारी ठिकानों को भी निशाना बनाया. यहां तक कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निजी आवास पर भी तोड़फोड़ की गई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

क्यों भड़की हिंसा?

इन प्रदर्शनों की शुरुआत सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ हुई थी. सरकार के फैसले से नाराज युवाओं ने आंदोलन शुरू किया, जो धीरे-धीरे हिंसक रूप ले बैठा. शुरुआत में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया बैन किया. इसके खिलाफ युवाओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू किया. हालात बेकाबू होने पर ओली ने बैन हटा भी दिया, लेकिन तब तक विरोध की आग पूरे देश में फैल चुकी थी.

जान-माल का नुकसान

इन प्रदर्शनों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग घायल हैं. कई पुलिस थानों, सरकारी दफ्तरों और पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई. कई सरकारी अधिकारी राजधानी काठमांडू छोड़कर भागने को मजबूर हुए.

सड़कों पर प्रदर्शनकारी “KP चोर, देश छोड़” और “भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई करो” जैसे नारे लगाते दिखे. इससे साफ है कि यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह भ्रष्टाचार और सत्ता विरोध का बड़ा जनआंदोलन बन चुका है.

प्रधानमंत्री का इस्तीफा

लगातार बढ़ती हिंसा और बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया. हालांकि इस्तीफे के बाद भी स्थिति सामान्य होती नजर नहीं आ रही है और पूरे देश में तनाव बरकरार है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 09, 2025 07:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).