माक्रों ने की मांग, ट्रंप के टैरिफों के खिलाफ एक्शन ले यूरोपीय संघ
डॉनल्ड ट्रंप ने यूरोप के आठ बड़े देशों पर ग्रीनलैंड विवाद के चलते टैरिफ लगाने की धमकी दी है.
डॉनल्ड ट्रंप ने यूरोप के आठ बड़े देशों पर ग्रीनलैंड विवाद के चलते टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इसके बाद फ्रांस ने यूरोपीय संघ से दबाव विरोधी तंत्र को सक्रिय करने की गुजारिश की है.यूरोपीय संघ के देशों पर डॉनल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड की मांग के चलते संकट काफी बढ़ गया है. डॉनल्ड ट्रंप ने यूरोप के देशों पर नए टैरिफ लगा दिए हैं. रविवार को कई यूरोपीय नेताओं और सांसदों ने यूरोपीय संघ से मांग की कि वह पहली बार अपने "दबाव विरोधी तंत्र” का इस्तेमाल करे और उसे सक्रिय करे. इमानुएल माक्रों ने इस मांग का नेतृत्व किया. यूरोपीय संघ का यह आर्थिक तंत्र उस स्थिति में लागू होता है, जब उस पर किसी कदम को उठाने के लिए बाहरी दबाव डाला जा रहा हो. इसके तहत यूरोपीय संघ टैरिफ लगा सकता है, सेवाओं और बाजार तक पहुंच सीमित कर सकता है या एफडीआई को रोक सकता है.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने यूरोप के कई अहम देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की. ये टैरिफ 1 फरवरी से लागू होने हैं. फिलहाल इन्हें 10 फीसदी रखा गया है लेकिन डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर 1 जून तकग्रीनलैंड, अमेरिका को देने पर फैसला नहीं हुआ तो इन टैरिफों को बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा. इसी खींचतान के बीच अमेरिका और यूरोप के संबंध अपने सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं.
यूरोपीय संघ के राजदूतों की आपात बैठक
डॉनल्ड ट्रंप के यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने के कदम का यूरोप के देशों ने कड़ा विरोध किया है. यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों की ओर से इससे चीन और रूस को फायदा होने की बात भी कही गई है.
इस बीच फिलहाल यूरोपीय संघ के अध्यक्ष देश साइप्रस ने ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संघ के मुख्यालय में, यूरोपीय संघ के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई है. फ्रांस की ओर से संकेत मिला है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों, यूरोपीय प्रतिक्रिया को एकजुट करने और दबाव विरोधी तंत्र लागू किए जाने पर सहमति जुटाने की कोशिश में हैं.
यूरोपीय संसद पर भी इस टैरिफ का असर दिखा है. कुछ सांसदों ने बताया है कि स्थिति ऐसी है कि यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते का काम भी रुक सकता है. वहीं इस मामले में ब्रिटेन ने कहा है कि इस मामले में कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता है. इटली ने भी टैरिफ धमकी को "गलती” कहा है.
खतरे में नाटो का भविष्य
डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाए जाने की सूचना, अपने सोशल मीडिया ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके दी थी. जिन आठ देशों पर ट्रंप ने टैरिफ लगाए, वो हैं, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड. फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने अमेरिका के इस कदम पर एकजुटता के साथ प्रतिक्रिया देने की बात कही है. हालांकि इस तरह की खींचतान के चलते यूरोप और अमेरिका के सुरक्षा सहयोग संगठन नाटो का भविष्य भी खतरे में नजर आ रहा है.
डॉनल्ड ट्रंप बार-बार दोहराते रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम है. इसकी भौगोलिक स्थिति की रणनीतिक अहमियत है. वहां बड़े खनिज भंडार हैं. इसके साथ ही उन्होंने इनका अमेरिका के लिए इस्तेमाल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं किया है. डॉनल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि यूरोपीय देशों ने बहुत खतरनाक खेल खेला है.
यूरोपीय देशों ने हाल में डेनमार्क के अनुरोध पर सीमित सैन्य कर्मियों को ग्रीनलैंड भेजा. मकसद आर्कटिक सुरक्षा का भरोसा देना और सैन्य अभ्यास रहा. ट्रंप इससे नाखुश रहे. जबकि यूरोपीय देशों का कहना है कि यह सिर्फ सहयोगियों के साथ साझा अभ्यास था, ऐसा किसी को धमकाने के लिए नहीं किया गया.
ना यूरोप में समर्थन ना अमेरिका में
हाल में अमेरिका में कराए गए एक सर्वे में सामने आया कि 20 फीसदी से भी कम अमेरिकी चाहते हैं कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बना लिया जाए. कुछ अमेरिकी सांसदों ने भी डॉनल्ड ट्रंप के यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने के कदम की आलोचना की है. उन्हें लगता है कि इससे नाटो में दरार गहरी होगी और चीन और रूस जैसे विरोधी देशों को फायदा मिलेगा.
डेनमार्क और ग्रीनलैंड में डॉनल्ड ट्रंप के कदम के खिलाफ जारी प्रदर्शन तेज हो गए हैं. स्थानीय लोग स्वायत्तता बनाए रखने की मांग कर रहे हैं और नारे लगा रहे हैं कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है.
सबसे खराब दौर में ट्रांसअटलांटिक संबंध
ग्रीनलैंड की रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के पास रहती है. हालांकि यहां अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस मौजूद है. साथ ही ग्रीनलैंड पर भी नाटो की सामूहिक सुरक्षा संधि लागू है. इसीलिए यूरोप का कहना है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा की चिंताओं को नाटो के सुरक्षा गठबंधन ढांचे के भीतर ही सुलझाया जाए, वैसे व्यापारिक दबाव से नहीं, जैसा ट्रंप बना रहे हैं.
अटलांटिक पार के रिश्तों की परीक्षा जारी है. यूरोप संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की बात कर रहा है, वहीं अमेरिका, ग्रीनलैंड को अपनी सुरक्षा और संसाधनों से जोड़कर दिखाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में फिलहाल अटलांटिक पार के देशों के संबंध अपने सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 19, 2026 12:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

