तेहरान: अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच हुए दो सप्ताह के ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता (Iran’s Supreme Leader) मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अपनी सभी सैन्य इकाइयों को 'युद्धविराम' (Cease Fire) का पालन करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है. ईरानी सरकारी मीडिया (Iranian State Media) (IRIB) पर प्रसारित एक बयान में खामेनेई ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश शत्रुता में एक अस्थायी ठहराव है, लेकिन इसे युद्ध का अंत नहीं माना जाना चाहिए. यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति; इजरायली पीएम नेतन्याहू बोले- 'हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी रहेगी जंग'
'हमारी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं'
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस संदेश को और कड़ा करते हुए कहा कि यह युद्धविराम पूरी तरह से सशर्त है. परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि शत्रु की ओर से कोई भी छोटी सी चूक या उकसावा होता है, तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा. बयान में कहा गया, 'यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सैन्य शाखाओं को सर्वोच्च नेता के आदेश का पालन करना चाहिए और फायरिंग रोकनी चाहिए.'
ट्रंप की चेतावनी और समझौते की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर नियोजित विनाशकारी सैन्य हमलों को 14 दिनों के लिए स्थगित करने की घोषणा के बाद आया है. ट्रंप ने साफ किया था कि यह मोहलत केवल तभी दी गई है जब तेहरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और सभी हमले बंद करने पर सहमत हुआ है.
इससे पहले ट्रंप ने एक कड़ी चेतावनी में कहा था कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो एक "पूरी सभ्यता" जोखिम में पड़ सकती है. अमेरिकी सेना ने ईरान के पुलों और पावर प्लांट जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की पूरी तैयारी कर ली थी. यह भी पढ़ें: Iran-US Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप ने की 14 दिनों के सीजफायर की घोषणा, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को तैयार
रणनीतिक ठहराव, समर्पण नहीं
ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम उसकी ओर से कोई आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि एक 'रणनीतिक ठहराव' (Tactical Pause) है. दूसरी ओर, अमेरिका इस समय का उपयोग क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रियायतें हासिल करने हेतु कर रहा है.
वैश्विक बाजारों की नजर
फिलहाल स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है. वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग के खुलने की खबरों से बाजारों ने राहत की सांस ली है, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई अभी भी गहरी है. कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन किसी भी पक्ष की एक छोटी सी गलती इस क्षेत्र को फिर से युद्ध की आग में झोंक सकती है.












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