डोनाल्ड ट्रंप के नक्शे पर छिड़ा वैश्विक विवाद: ग्रीनलैंड और कनाडा को बताया अमेरिकी हिस्सा; डैनीश पीएम बोलीं- 'यह बेतुका है' (See Pics)
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बदला हुआ मैप किया शेयर (Photo Credits: AP/TrumpDailyPosts)

वॉशिंगटन/दावोस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने मंगलवार को एक विवादित नक्शा साझा कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है. इस नक्शे में ग्रीनलैंड (Greenland) और कनाडा (Canada) को अमेरिका (America) के हिस्से के रूप में दिखाया गया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए डेनमार्क (Denmark) पर लगातार दबाव बना रहा है. दावोस में 'विश्व आर्थिक मंच' (WEF) के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का अधिग्रहण ‘राष्ट्रीय सुरक्षा' के लिए अनिवार्य है और अब इस मामले में 'पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है.’ यह भी पढ़ें: ट्रंप का नया दांव: 'बोर्ड ऑफ पीस' में स्थायी सीट के लिए देशों को चुकाने होंगे 1 अरब डॉलर; ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में खुलासा

सोशल मीडिया पर 'नक्शा युद्ध' और अमेरिकी दावा

विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं. इनमें से एक तस्वीर में ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ ग्रीनलैंड की धरती पर अमेरिकी झंडा गाड़ते नजर आ रहे हैं.

दूसरी और सबसे विवादास्पद तस्वीर में उत्तरी गोलार्ध का एक नक्शा दिखाया गया है, जहां ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिकी ध्वज के रंगों में रंगा गया है. व्हाइट हाउस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति को पूरा भरोसा है कि अमेरिका के संरक्षण में ग्रीनलैंड सुरक्षित रहेगा, क्योंकि डेनमार्क रूस और चीन जैसी शक्तियों से इस द्वीप की रक्षा करने में ‘अक्षम’ है.

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बदला हुआ नक्शा शेयर किया, जिसमें ग्रीनलैंड को बताया अमेरिकी क्षेत्र 

यूरोप को टैरिफ की धमकी और आर्थिक दबाव

अपनी मांग मनवाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने डेनमार्क सहित आठ यूरोपीय देशों (फ्रांस, जर्मनी, यूके आदि) पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है:

  • 1 फरवरी से: इन देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 10% टैरिफ लगेगा.
  • जून से: यदि ग्रीनलैंड की बिक्री पर समझौता नहीं हुआ, तो यह टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा.

जवाब में, यूरोपीय संघ (EU) ने गुरुवार को एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन बुलाया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने डेनमार्क के साथ एकजुटता जताते हुए चेतावनी दी है कि यह "व्यापार युद्ध" केवल रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा पहुंचाएगा.

नाटो में दरार और डेनमार्क का कड़ा रुख

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने ट्रंप के प्रस्ताव को शुरू से ही ‘बेतुका’ (Absurd) बताया है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड में 'मेक अमेरिका गो अवे' (Make America Go Away) के नारों के साथ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है, क्योंकि डेनमार्क नाटो का संस्थापक सदस्य है और सहयोगी देशों पर आर्थिक दबाव डालना गठबंधन की एकता को खतरे में डाल सकता है. यह भी पढ़ें: Iran On Donald Trump’s Remark: डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर भड़का ईरान, अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा

ग्रीनलैंड इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

21वीं सदी की भू-राजनीति में ग्रीनलैंड एक रणनीतिक केंद्र बन गया है। इसके कारण निम्नलिखित हैं:

  • प्राकृतिक संसाधन: यहां दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements) के विशाल भंडार हैं.
  • शिपिंग रूट्स: पिघलती बर्फ के कारण आर्कटिक में नए व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं.
  • सैन्य बेस: अमेरिका का 'पितुफ़िक स्पेस बेस' (Pituffik Space Base) पहले से ही यहां स्थित है, जिसे अमेरिका पूर्ण स्वामित्व के जरिए और मजबूत करना चाहता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अटलांटिक पार के रिश्तों में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा संकट पैदा कर सकती है.