लंदन के ईलिंग अस्पताल में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जब एक 20 वर्षीय महिला ने फर्जी डॉक्टर बनकर एक मरीज को एक रहस्यमय पदार्थ का इंजेक्शन लगा दिया. महिला का नाम क्रुएना जद्राफकोवा है, जो बगैर किसी मेडिकल प्रशिक्षण के इस कृत्य को अंजाम दे रही थी. इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया है.
19 अप्रैल को हुई इस घटना में, जद्राफकोवा ने सफेद कोट, स्टेथोस्कोप, मेडिकल दस्ताने और पीले बैज के साथ मरीज को एक अनजाने तरल पदार्थ का इंजेक्शन दिया. यह मरीज अस्पताल में ड्रग्स के सेवन या ड्रग्स के असर से उबरने के लिए इलाज के लिए भर्ती था. जद्राफकोवा ने मरीज को बताया कि यह दवाई उसे शांत कर देगी, लेकिन बाद में यह सामने आया कि उसे कोई मेडिकल प्रशिक्षण नहीं था.
इस घटना के बाद, पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में उसने सामान्य हमला (Common Assault) स्वीकार किया. अदालत ने उसे एक साल की सामुदायिक सेवा (Community Order) की सजा सुनाई, जिसमें उसे NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस) के किसी भी केंद्र में बिना नियुक्ति के प्रवेश करने से मना किया गया है. अदालत ने यह भी कहा कि जद्राफकोवा का डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन यह कोई अधिकारिक कारण नहीं हो सकता.
Hospital security up after fake doctor injects man https://t.co/3lzvp7dXha
— BBC News (UK) (@BBCNews) December 20, 2024
अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस जांच में पूरा सहयोग दिया और सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की. अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा, "यह घटना बेहद असामान्य थी, और हमने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो सकें."
इस घटनाक्रम से यह भी सवाल खड़ा होता है कि बिना पहचान पत्र के कोई व्यक्ति कैसे अस्पताल में मरीजों के पास पहुंच सकता है. हालांकि, जद्राफकोवा के वकील ने इसे उसकी सहानुभूति और देखभाल का तरीका बताया, लेकिन इस घटना से यह स्पष्ट है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाने की जरूरत है.













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