फिनलैंड का औलू और स्लोवाकिया का त्रेंचीन, इस साल यूरोप की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनेंगे. जानिए 'यूरोपियन कैपिटल्स ऑफ कल्चर' किस तरह सीमा के बंटवारे से परे जाकर संस्कृति के तार से लोगों को जोड़ता है.त्रेंचीन, पश्चिमी स्लोवाकिया का एक बेहद खूबसूरत शहर है. यह शहर के ऊपर चट्टान पर बने अपने ऐतिहासिक किले के लिए मशहूर है. किले के नीचे एक बड़े चौक के आसपास शहर का केंद्र बसा है, जहां बने कैफे और बार शहर की शोभा बढ़ाते हैं.
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पुराने शहर में स्थित भव्य सिनेगॉग (यहूदी उपासना स्थल) को हाल ही में फिर से बनाया गया है. यह त्रेंचीन की सदियों पुरानी यहूदी विरासत का अहम प्रतीक है. आज यह सिनेगॉग शहर की विरासत में अहम स्थान रखता है. यह पर्यटक आकर्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र भी है.
लगभग 55,000 की आबादी वाला त्रेंचीन, स्लोवाकिया के अन्य हिस्सों की तरह कम जनसंख्या की समस्या से जूझ रहा है. इसकी एक बड़ी वजह राजनीतिक असहमति को भी माना जाता है. प्रधानमंत्री रॉबेर्त फीसो के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार से कई लोग असंतुष्ट हैं.
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कट्टर राष्ट्रवादी ताकतों के साथ बढ़ता गठजोड़, यूरोपीय संघ और नाटो के साथ टकरावपूर्ण रवैया और रूस समर्थक नीतियों को बढ़ावा देने वाली उनकी राजनीति देशभर में गहरी चिंता का कारण बनी हुई है. इसके विरोध में, स्लोवाकिया के लोग बार-बार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते हैं. नियमित रूप से हो रहे प्रदर्शन मौजूदा सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध का संकेत देते हैं.
पूरे शहर में उत्सव
त्रेंचीन अपनी रूढ़िवादी छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है. राष्ट्रीय राजनीति के खिलाफ यह शहर खुद को अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके से पेश करने की कोशिश कर रहा है. उसी तरह, जैसे अमेरिका के ऑस्टिन शहर ने किया था. उसने राजनीतिक रूप से रूढ़िवादी प्रांत टेक्सास में अपनी अलग पहचान बनाई.
त्रेंचीन में बदलाव की सोच को आकार देने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं. रोशनी से बनी अनोखी कलाकृतियों के जरिए 'त्रेंचीन लाइट आर्ट फेस्टिवल' शहर की कहानी को नए अंदाज में बयान करता है. साथ ही, नई शुरुआत का एहसास भी देता है.
इसके अलावा 'लाइवलि नेबरहुड्स' परियोजना शहर के अलग-अलग मोहल्लों को अलग-अलग तरीकों से आपस में जोड़ती है, ताकि सामाजिक भेदभाव और अंतर कम किया जा सके. "यूरोपियन कैपिटल ऑफ कल्चर" के अंतर्गत इस शहर का नारा है, अवेकनिंग क्यूरियॉसिटी. यानी, जिज्ञासा जगाना.
इस एजेंडा के तहत हो रहे कार्यक्रमों में कैबरे प्रस्तुतियां, मोहल्ला उत्सव और ऐसी गतिविधियां शामिल हैं, जो सामाजिक मेलजोल और एकता को बढ़ावा दें. शहर को उम्मीद है कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए वह युवाओं में आकर्षण का केंद्र बन सकता है.
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हाल ही में त्रेंचीन शहर के सांस्कृतिक केंद्र का नवीनीकरण किया गया है. इसमें करीब 80 लाख यूरो की लागत आई. अब यहां डांस और थिएटर हॉल के साथ-साथ स्टूडियो, वर्कशॉप और एक पेशेवर फिल्म स्टूडियो भी है. इनके जरिए यह शहर कला और संस्कृति से जुड़े लोगों को आकर्षित करना चाहता है.
औलू: 'सांस्कृतिक जलवायु परिवर्तन'
फिनलैंड की गिनती दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में की जाती है. 'वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट 2025' में भी यह देश शीर्ष देशों में शामिल था. यह अपने हॉकी खिलाड़ियों, सॉना, हैवी मेटल बैंड्स और कुछ अतरंगे वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे एयर गिटार और रबर बूट फेंकने की प्रतियोगिताओं के लिए जाना जाता है.
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यही फिनलैंड मशहूर मोबाइल कंपनी नोकिया का भी घर है. इस वजह से यह देश वैश्विक तकनीक का एक केंद्र भी बना. इसके अलावा फिनलैंड अपनी कला और संस्कृति के लिए भी काफी मशहूर है.
2026 में औलू अपनी सभी खूबियों को दुनिया के सामने पेश करना चाहता है. करीब 2.20 लाख की आबादी वाला यह शहर फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी से लगभग 600 किलोमीटर दूर बसा है.
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नोकिया ने औलू में अपना एक कैंपस शुरू किया है, जहां 5G और 6G तकनीकों पर काम होता है. साथ ही, यहां अनुसंधान और शिक्षा पर भी खास जोर दिया जाता है. वहीं, प्रकृति के साथ करीबी जुड़ाव औलू के कला जगत की खासियत है.
बर्फ, सॉना और रोशनी
आयोजनों की रूपरेखा काफी महत्वाकांक्षी है. इनका मकसद नए और अनोखे अनुभवों को मिलाना, संस्कृति के जरिए लोगों को साथ लाना और कला व प्रकृति को अनूठे तरीके से जोड़ना है. इन कार्यक्रमों में फिनलैंड की पहचान से जुड़ी चीजें शामिल हैं. जैसे कि बर्फ, सॉना और रोशनी व अंधेरे का मेल. लगातार बदलता मौसम कार्यक्रम का केंद्र है.
औलू के लिए 'यूरोपियन कैपिटल ऑफ कल्चर' का विषय "सांस्कृतिक जलवायु परिवर्तन" है. यह न केवल सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध करने की बात करता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी याद दिलाता है.
यूरोप अपने शहरों को संस्कृति से क्यों पहचान देता है
1985 में ग्रीस की संस्कृति मंत्री, मेलीना मैर्कूरी और फ्रांस के उनके समकक्ष, जैक्स लॉग्य ने 'यूरोपियन सिटी ऑफ कल्चर' की शुरूआत की थी. इसका मकसद शीत युद्ध के बाद यूरोप में पनपी सांस्कृतिक दूरी को कम करना था.
संस्कृति के यूरोपीय शहर का पहला खिताब एथेंस को मिला. आने वाले सालों में यह ईयू के सबसे कामयाब सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हो गया.
यूरोपीय आयोग के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश यूरोप की संस्कृतिक विविधता और समृद्धि को दिखाना, लोगों में साझा यूरोपीय पहचान की भावना बढ़ाना और शहरों के विकास में संस्कृति की भूमिका को मजबूत करना है. साल 1985 से लेकर अब तक पेरिस और मैड्रिड जैसे बड़े महानगरों सहित 70 से भी ज्यादा कई छोटे-बड़े शहरों और कस्बों को यह खिताब मिल चुका है.
2023 में यूरोपीय आयोग के लिए किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 2013 से 2022 के बीच मेजबान शहरों ने औसतन 1,000 से 1,200 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं. इनमें कुल 3.85 करोड़ लोग शामिल हुए हैं. चुने गए शहरों में पर्यटकों की संख्या औसतन 30 से 40 फीसदी तक बढ़ जाती है. यह अंतरराष्ट्रीय पहचान सांस्कृतिक पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा देती है.
सफलताएं और असफलताएं
इसके जरिए ही 1990 में स्कॉटलैंड का ग्लासगो एक औद्योगिक शहर की पहचान से बाहर निकलकर सांस्कृतिक केंद्र बन गया. साल 2010 में जर्मनी के पश्चिमी हिस्से में एस्सेन शहर के आसपास स्थित रुअर क्षेत्र ने इस खिताब का इस्तेमाल कर खुद को औद्योगिक दौर के बाद एक नए रूप में पेश किया. पुरानी कोयला खदानों को सांस्कृतिक इलाकों में बदल दिया गया. औद्योगिक इमारतें, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शुमार हो गईं.
गुफाओं के बीच बसा शहर मतेरा कभी इटली के लिए शर्मिंदिगी समझा जाता था. यही शहर 2019 में यूरोपीय पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर सामने आया.
हालांकि, हर शहर के लिए यह कार्यक्रम सफल साबित नहीं हुआ. कुछ शहरों को इससे काफी नुकसान भी हुआ. जैसे 1999 में वाइमार सांस्कृतिक राजधानी बना. इसके बाद यहां करीब 70 लाख पर्यटक आए, लेकिन अंत में यह शहर 1.3 करोड़ यूरो के घाटे में डूब गया.
साल 2019 में सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर प्लोवदिव (बुल्गारिया) को काफी सफलता मिली थी. मगर, उसपर यह आरोप भी लगे कि कुछ समुदायों, खासतौर पर शहर की रोमा अल्पसंख्यक आबादी को कार्यक्रमों से काफी हद तक बाहर रखा जा रहा था.
पूर्वी जर्मनी के केमनित्स शहर के लिए सांस्कृतिक राजधानी वाला साल अभी-अभी खत्म हुआ है. शहर को उम्मीद थी कि इस खिताब से वह दक्षिणपंथी चरमपंथी छवि से छुटकारा पा सकेगा. 2018 में हुए धुर-दक्षिणपंथी उपद्रव के बाद यह छवि शहर के साथ जुड़ गई थी. आलोचकों का कहना है कि 'कैपिटल ऑफ कल्चर' का यह कार्यक्रम दक्षिणपंथी चरमपंथ से निपटने में कोई ठोस उपलब्धि नहीं हासिल कर सका.
इसके चलते भले ही शहरों को ईयू की ओर से भरपूर प्रचार और आर्थिक मदद मिलती है, लेकिन कई पूर्व सांस्कृतिक राजधानियों में यह पहल टिकाऊ साबित नहीं हो पाई. वे इस खिताब को सांस्कृतिक रणनीति से जोड़ सकने में सफल नहीं हो पाए.
जैसा कि साल 2023 में इस कार्यक्रम के असर का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए यूरोपीय संस्कृति आयुक्त, इलियाना इवानोवा ने कहा, "कैपिटल ऑफ कल्चर कोई एक साल का उत्सव नहीं, बल्कि बदलाव की एक प्रक्रिया है."
स्थिरता है मुख्य विचार
हाल के वर्षों में कई यूरोपीय सांस्कृतिक राजधानियां स्थिरता, सामाजिक भागीदारी और डिजिटल नवाचार पर ध्यान दे रही हैं. ईयू के कई कार्यक्रम ऐसे प्रॉजेक्ट्स को समर्थन देते हैं जो कला को शहरी पर्यावरण, सर्कुलर इकॉनमी और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं.
इस लिहाज से औलू को इस साल परीक्षा की जमीन माना जा सकता है, जहां जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संस्कृति को माध्यम बनाया जा रहा है.
वहीं, त्रेंचीन सोशल सस्टेनिबिलिटी पर ध्यान दे रहा है. यानी जिज्ञासा, शिक्षा और लोगों की भागीदारी किस तरह एक मजबूत लोकतांत्रिक समाज की नींव बनती है.
दरअसल, यही इस यूरोपीय परियोजना का मूल विचार भी है: संस्कृति की समान भाषा, देशों की सीमाओं से आगे बढ़कर लोगों को आपस में जोड़ती है.












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