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खतरनाक कंटेंट पर एक्शन! ऑस्ट्रेलिया में अब बच्चे नहीं चला पाएंगे YouTube, सरकार ने सोशल मीडिया पर लगाया बैन

ऑस्ट्रेलिया ने हानिकारक कंटेंट के चलते बच्चों के लिए YouTube को भी अपने सोशल मीडिया बैन में शामिल कर लिया है. इस नियम को तोड़ने वाली कंपनियों पर दिसंबर से भारी जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं, यूट्यूब ने इस फैसले का विरोध करते हुए खुद को सोशल मीडिया नहीं, बल्कि एक वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म बताया है.

खतरनाक कंटेंट पर एक्शन! ऑस्ट्रेलिया में अब बच्चे नहीं चला पाएंगे YouTube, सरकार ने सोशल मीडिया पर लगाया बैन

Australia YouTube Ban: ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए फैसला किया है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगने वाले बैन में अब YouTube को भी शामिल किया जाएगा. यह एक अहम फैसला है, क्योंकि पहले सरकार ने यूट्यूब को इस बैन से बाहर रखने का सोचा था, लेकिन अब अपना फैसला बदल दिया है.

यह फैसला क्यों लिया गया?

ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेट पर नजर रखने वाली एक संस्था ने हाल ही में एक रिसर्च की थी. इस रिसर्च में यह बात सामने आई कि 10 से 15 साल के 37% बच्चों ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब पर कोई न कोई नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट देखा है. यह आंकड़ा किसी भी दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ज्यादा था. इसी रिपोर्ट के बाद सरकार पर यूट्यूब को भी बैन में शामिल करने का दबाव बढ़ गया.

फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसी दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों का भी यही कहना था कि सिर्फ यूट्यूब को इस नियम से छूट देना गलत और नाइंसाफी होगी.

सरकार का क्या कहना है?

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक बयान में कहा, "सोशल मीडिया की एक सामाजिक जिम्मेदारी होती है और इसमें कोई शक नहीं कि ऑस्ट्रेलियाई बच्चों पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का बुरा असर पड़ रहा है. अब इस पर रोक लगाने का समय आ गया है." उन्होंने आगे कहा, "सोशल मीडिया हमारे बच्चों को सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा है, और मैं ऑस्ट्रेलियाई माता-पिता को बताना चाहता हूं कि हम उनके साथ हैं."

नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना

यह नया कानून इस साल दिसंबर से लागू होगा. अगर कोई भी सोशल मीडिया कंपनी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बने इस कानून को तोड़ती है, तो उस पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 270 करोड़ रुपये) तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

YouTube ने क्या कहा?

इस फैसले पर YouTube के एक प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी सरकार के साथ बातचीत जारी रखेगी और अगले कदमों पर विचार करेगी. यूट्यूब का मानना है कि वह सोशल मीडिया नहीं है. प्रवक्ता ने कहा, "हमारा मानना साफ है: YouTube एक वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म है, जहां अच्छी क्वालिटी का कंटेंट मुफ्त में मिलता है और इसे अब टीवी स्क्रीन पर ज्यादा देखा जाता है. यह सोशल मीडिया नहीं है."

इन चीजों पर नहीं होगी पाबंदी

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह पाबंदी ऑनलाइन गेमिंग, मैसेजिंग ऐप्स (जैसे वॉट्सऐप) और पढ़ाई-लिखाई या स्वास्थ्य से जुड़ी वेबसाइट्स पर लागू नहीं होगी. सरकार का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म से बच्चों को उतना खतरा नहीं है. संचार मंत्री अनिका वेल्स ने कहा कि ये नियम सिर्फ बनाकर छोड़ नहीं दिए जाएंगे, बल्कि इन्हें लागू करने में पूरी मदद भी की जाएगी ताकि बच्चों को एक सुरक्षित ऑनलाइन माहौल मिल सके.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 30, 2025 06:42 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).