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Earthquake in Afghanistan: अफगानिस्तान में 5.3 तीव्रता के भूकंप के तेज झटके, जम्मू-कश्मीर और घाटी में भी महसूस किए गए कंपन

अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके तेज झटके जम्मू-कश्मीर और घाटी में भी महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र जमीन के 190 किमी अंदर था.

Earthquake in Afghanistan: अफगानिस्तान में 5.3 तीव्रता के भूकंप के तेज झटके,  जम्मू-कश्मीर और घाटी में भी महसूस किए गए कंपन

Earthquake in Afghanistan: अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में शनिवार सुबह आए शक्तिशाली भूकंप के झटकों से जम्मू-कश्मीर और कश्मीर घाटी दहल गई. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई है. आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, भूकंप सुबह 8:24 बजे आया, जिसका असर सीमा पार भारतीय क्षेत्रों में भी साफ तौर पर महसूस किया गया.

गहराई और भौगोलिक स्थिति

भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से 190 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था. इसकी भौगोलिक स्थिति 36.55 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.92 डिग्री पूर्वी देशांतर दर्ज की गई है. जमीन के काफी अंदर केंद्र होने के बावजूद, झटकों की तीव्रता इतनी थी कि घाटी के कई हिस्सों में लोग घरों से बाहर निकल आए. फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है.

उच्च जोखिम वाले सिस्मिक जोन में कश्मीर

भू-वैज्ञानिक दृष्टि से कश्मीर घाटी बेहद संवेदनशील और भूकंप संभावित क्षेत्र (High-Seismic Zone) में आती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की भौगोलिक संरचना इसे बड़े भूकंपों के प्रति असुरक्षित बनाती है. शनिवार को आए इन झटकों ने एक बार फिर स्थानीय निवासियों के बीच पुराने विनाशकारी भूकंपों की यादें ताजा कर दी हैं.

विनाशकारी भूकंपों का इतिहास

कश्मीर का इतिहास कई बड़े और जानलेवा भूकंपों का गवाह रहा है.

  • 8 अक्टूबर 2005: रिक्टर स्केल पर 7.6 तीव्रता के भूकंप ने कश्मीर में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 80,000 से अधिक लोगों की जान गई थी. इसका केंद्र पीओके के मुजफ्फराबाद में था.

  • 1885 का बारामूला भूकंप: 30 मई 1885 को आए 6.8 तीव्रता के भूकंप में लगभग 3,000 लोगों की मृत्यु हुई थी.

  • 1555 का भूकंप: ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, 7.6 तीव्रता के एक भूकंप ने कई कस्बों को तबाह कर दिया था और वेशो नदी (River Vesha) का मार्ग तक बदल दिया था.

विशेषज्ञों की सलाह:

लगातार आ रहे भूकंपों के बीच स्ट्रक्चरल इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने घाटी में निर्माण के तरीकों पर चिंता जताई है. विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर में कंक्रीट के भारी मकान भूकंप के झटकों को सोखने में सक्षम नहीं होते और जल्दी गिर जाते हैं.

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि घाटी में 'अर्थक्वेक-फ्रेंडली' (भूकंप-रोधी) मकानों और पारंपरिक लकड़ी आधारित निर्माण शैलियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े संकट के समय जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 18, 2026 11:26 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).