एलियंस के होने, न होने पर क्या कहते हैं वैज्ञानिक
अगर वाकई एलियन्स होंगे और हमें-हमारी बनाई दुनिया को देखेंगे, तो हमारे बारे में क्या सोचेंगे? और अगर एलियन्स हमारी दुनिया में आए तो उन्हें देखना, खोजना, जानना हमारे हाथ में होगा या नहीं? जानिए, वैज्ञानिकों की राय.
अगर वाकई एलियन्स होंगे और हमें-हमारी बनाई दुनिया को देखेंगे, तो हमारे बारे में क्या सोचेंगे? और अगर एलियन्स हमारी दुनिया में आए तो उन्हें देखना, खोजना, जानना हमारे हाथ में होगा या नहीं? जानिए, वैज्ञानिकों की राय.क्या इस अगाध ब्रह्मांड में हमारा ही ग्रह इकलौता है, जहां जीवन है? क्या कहीं किसी और ग्रह पर भी जीवन फल-फूल रहा होगा? अगर हां, तो वो जीवन कैसा होगा? कैसे होंगे वो जीव? हम जैसे, हमारे ग्रह के साथी जीवों जैसे, या हमारी कल्पना से भी परे? कई पीढ़ियों से हम इंसान एलियन्स की कल्पना करते हुए ऐसे सवाल सोचते और पूछते आए हैं. लेकिन बमुश्किल ही कभी हम ये पूछते हैं कि अगर एलियन्स होंगे और हमें-हमारी बनाई दुनिया को देखेंगे, तो हमारे बारे में क्या सोचेंगे?
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यूएफओ फाइल्स: बराक ओबामा का बयान, ट्रंप का एलान
2026 का चौथा महीना शुरू ही हुआ है और एलियन्स की जिज्ञासा और उस जिज्ञासा से जुड़े अनगिनत सवालों पर अमेरिका में काफी नई चीजें हो चुकी हैं. फरवरी में, एक पॉडकास्ट में गए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से सवाल पूछा गया कि क्या वाकई एलियन्स हैं? इसपर ओबामा ने जवाब दिया, "वो वाकई हैं, लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा है. और, ना ही उन्हें एरिया 51 में रखा गया है."
अमेरिका का एक पूर्व राष्ट्रपति, जिसकी अति गोपनीय फाइलों तक पहुंच रही हो, जब यह कहे कि एलियंस सच में हैं, तो स्वाभाविक है चर्चा होगी ही. चर्चा हुई, तो ओबामा ने सफाई देते हुए एक बयान जारी किया. इसमें लिखा, "आंकड़ों के हिसाब से देखें, तो ब्रह्मांड इतना विशाल है कि वहां जीवन मौजूद होने की संभावना अच्छी है. लेकिन सोलर सिस्टमों के बीच की दूरी इतनी ज्यादा है कि एलियन्स हमारे यहां आए हों, इसकी संभावना कम है. और, बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में मैंने ऐसा कोई सबूत नहीं देखा कि दूसरे ग्रह के जीवों ने हमसे कोई संपर्क किया हो. सच में!"
इसके ठीक बाद, 19 फरवरी को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का सोशल मीडिया पर एलान आया. ट्रंप ने लिखा कि इस विषय में लोगों की बेहद दिलचस्पी के मद्देनजर वह अमेरिकी रक्षा मुख्यालय 'पेंटागन' समेत बाकी सरकारी एजेंसियों को निर्देश दे रहे हैं कि वे परग्रही जीवों और यूएफओ से जुड़ी जानकारियों और फाइलों की पहचान करें और उन्हें जारी करें. इतना ही नहीं, ट्रंप ने इल्जाम लगाया कि ओबामा ने गोपनीय जानकारी सार्वजनिक कर दी है. ट्रंप ने यूएफओ के अस्तित्व पर अपनी राय भी दी, कहा वह नहीं जानते यूएफओ असलियत में हैं या नहीं.
इसके बाद, मार्च के आखिरी दिन अमेरिकी सांसद और रिपब्लिकन पार्टी की सदस्य एना पॉलिना लूना ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को एक चिट्ठी भेजी. लिखा, यूएपी (अनआइटेंडिफाइड एनॉमलस फेनॉमना) नजर आने के कथित मामलों से जुड़ी जो करीब चार दर्जन फाइलें हैं उन्हें एक ओवरसाइट कमेटी टास्क फोर्स के सुपुर्द किया जाए. लूना ने दलील दी कि अमेरिका के संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास हवा में यूएपी की मौजूदगी, सेना की सुरक्षा के लिए खतरा हैं.
अमेरिका में एलियन्स और यूएफओ में लोगों की कितनी दिलचस्पी?
ये जो यूएपी है, उसका मतलब है हवा, जमीन या समंदर में कोई ऐसी चीज या घटना जिसे तत्काल ना पहचाना जा सके, ना उनकी व्याख्या की जा सके. आसान भाषा में समझें, तो अफवाहों या कन्सपिरेसी थिअरी के बाजार में जो 'यूएफओ' के नाम से प्रचलित है, उसे सरकारी और वैज्ञानिक भाषा में यूएपी कहते हैं. लोगों का इस विषय में असीम आकर्षण है.
अगर अमेरिका की ही बात करें, तो साल 2021 में प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे में करीब दो तिहाई लोगों ने कहा उपलब्ध जानकारियों के आधार पर उनका अनुमान है कि दूसरे ग्रहों पर 'इंटेलिजेंट लाइफ' मौजूद है. तकरीबन 50 फीसदी लोगों ने कहा, ये जो सेना के लोग यूएफओ देखने की बात करते हैं वो पृथ्वी के बाहर जीवन होने का "पक्का" या "संभावित" सबूत हैं.
इंसान को आखिर क्यों जाना है चांद पर?
आखिर क्यों बहुत से लोग इसपर यकीन करते हैं, इसका कारण शायद मनोविज्ञान से भी जुड़ा हो. जैसा कि कैलिफोर्निया स्थित सैटी इंस्टिट्यूट (सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस) के अध्यक्ष बिल डायमंड कहते हैं, "हम नहीं सोचना चाहते कि इस असाधारण ढंग के और समझ से परे विशाल ब्रह्मांड में यह अकेली जगह है जहां जीवन और इंटेलिजेंस और यहां तक कि तकनीक भी उभर आई है."
इस ख्वाहिश को एक पंक्ति में समझाते हुए बिल कहते हैं, "ये एक तरह से हम इंसानों के बारे में बताता है, हम अकेले नहीं होना चाहते."
पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन की कितनी संभावना?
अपार-अनंत ब्रह्मांड में अरबों आकाशगंगा हैं. हर एक आकाशगंगा में अरबों तारे. इस अबूझ गिनती का परिमाण इतना विशाल है कि कहीं और जीवन मौजूद होने की संभावना बढ़ जाती है. मिशिगन यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोनॉमी के प्रोफेसर एडविन बर्गिन तो पढ़ाते भी यही हैं, पृथ्वी से परे कहीं और जीवन की तलाश के बारे में.
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उनका मानना है कि अगर समझदार परग्रही जीव विशाल दूरी पार करके पृथ्वी तक पहुंच गए, तो वे यकीनन खुद को छिपाएंगे नहीं. खुद को, अपनी पहचान को जाहिर कर देंगे, "अव्यवस्था पैदा करने में मानव जाति के झुकाव" के बावजूद. एलियन्स के नजरिये से सोचने की कोशिश करते हुए वह बताते हैं, "मुझे लगता है कि वे हमें ऐसे देखेंगे मानो हम सनकी हों... लेकिन वो खुद को प्रकट करेंगे. मेरा मतलब है, यहां क्यों आना अगर आपको बैठकर गौर ना करना हो."
लोएब भी ब्रह्मांड में कहीं और जीवन के मौजूद होने की संभावना देखते हैं. वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के गैलिलियो प्रॉजेक्ट के प्रमुख भी हैं, जो कि वैज्ञानिक तरीके से एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल के साक्ष्य खोजने से जुड़ा है. परग्रही हमारे बारे में क्या सोचेंगे, इसकी कल्पना करते हुए वह कहते हैं, "वे शायद हमपर हंस रहे हों. हो सकता है वे हमें देख रहे हों, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं हम शिकारी ना बन जाएं, कि हम उनके लिए खतरनाक ना बन जाएं."
क्या यूएफओ सच में हैं, और हां तो उनके बारे में कौन जानता है?
इसके जवाब में बिल डायमंड कहते हैं, "बिल्कुल, यूएपी और यूएफओ जैसी चीजें हैं." वह आगे समझाते हैं, "लोग आकाश में ऐसी चीजें देखते हैं जिन्हें वे फौरन पहचान नहीं पाते, ना उनकी पहचान इस रूप में कर पाते हैं कि क्या वो इंसानी इंजीनियरिंग जैसे कि प्लेन या ड्रोन या हेलिकॉप्टर या पक्षी जैसे जानवर हैं. और इसलिए वे नहीं जानते कि वो क्या चीज है."
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तो क्या चीजें इसलिए रहस्य लगने लगती हैं क्योंकि पहली नजर में हमें वो समझ नहीं आतीं? तो क्या क्या यूएफओ देखने के ज्यादातर दावे इसी का नतीजा हैं?
साल 1947 में अमेरिका के न्यू मेक्सिको में एक मलबा बरामद किया था. शुरू में सेना ने कहा कि वो किसी उड़न तश्तरी (फ्लाइंग डिस्क) का हिस्सा था. फिर बाद में उसे वेदर बलून बताया गया. यहां से शुरू हुई उत्सुकता ने एक विशाल बरगद का रूप लिया और साजिशों-कयासों की झड़ी लग गई.
आम जनता के बीच एलियन्स को लेकर बढ़ी उत्सुकता फिल्मों के रास्ते पॉपुलर कल्चर में शामिल हो गई. मगर, हमारी ज्यादातर कल्पनाएं बताती हैं कि एलियन्स आक्रामक होंगे, हमें नुकसान पहुंचाएंगे, हमसे लड़ेंगे, हमारे यहां तबाही मचाएंगे. हमारी कल्पनाएं ऐसी क्यों है, इसपर ड्यूक यूनिवर्सिटी में विज्ञान फंतासी पढ़ाने वालीं प्रिसेला वाल्ड की एक थिअरी है.
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वाल्ड बताती हैं, "मुझे लगता है कि हम जैसे हैं, उसकी यह एक परछाईं है. कि हम एलियन्स को उसी तरह पेश करते हैं, जिस तरह हम एक-दूसरे के साथ बर्ताव करते हैं. इसलिए एलियन्स हमारे यहां आ रहे हैं, वो हमपर जीत पाना चाहते हैं, वो हिंसक हैं. ये किसकी तरह सुनाई देता है? ये हम जैसा सुनाई देता है."
लेकिन क्या उन कन्सपिरेसी थिअरीज में कोई दम है कि एलियन्स के साथ एनकाउंटर की बातें गुप्त रखी जा रही हैं? 56 साल की डेबी दिमित्रो मेडिकल फील्ड में एक पेशेवर हैं. उनका दावा है कि दो अलग-अलग मौकों पर उन्हें मिशिगन के आकाश में कोई चीज देखी. एक बार, वो कोई हरे रंग की चीज थी जो ना विमान जैसी थी ना हेलिकॉप्टर जैसी.
दिमित्रो इस संभावना से इनकार नहीं करतीं कि वो किसी तरह का ड्रोन हो सकता है. मगर, जहां तक यूएफओ या परग्रहियों की बात है, तो उनकी दिलचस्पी यह जानने में है कि सरकार क्या जानती है, "मेरा मानना है कि इस बारे में और जानकारी है. मैं अब उसे जानना चाहती हूं. मेरा दिमाग खुला है. मैं वैज्ञानिक साक्ष्य पर भरोसा करती हूं."
"अगर एलियन्स हमसे बात करना चाहें, तो करेंगे"
टेमथी गेलेडैट, अमेरिका के एक रिटायर्ड एडमिरल हैं. उनकी राय में सबूत साफ दिखाते हैं कि आसमान और समंदर में यूएपी सक्रियता है. गेलेडैट 'नेशनल ओशिएनिक एंड अटमॉस्फैरिक एडमिनिस्ट्रेशनल' में बतौर एडमिनिस्ट्रेटर भी काम कर चुके हैं. वह बताते हैं, "गैर-इंसानी बुद्धिमानी उन्हें चलाती या नियंत्रित करती है, यह बिल्कुल सच है. हमने क्रैश हुए क्राफ्ट को बरामद किया है. हम नहीं जानते कि उनका स्रोत परग्रही है या नहीं."
साल 2024 में अमेरिकी संसद में यूएपी को लेकर जो सुनवाई हुई थी, उसमें गेलेडैट ने भी हिस्सा लिया था. वह सरकारी फाइलों को सार्वजनिक करने के समर्थक हैं. गेलेडैट बताते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने फाइलें जारी करने का जो वादा किया है, उसमें लोगों की काफी दिलचस्पी है. वह सवालिया अंदाज में कहते हैं, "अज्ञानता, कब से एक अच्छी राष्ट्रीय रणनीति है? चाहे वो डरावना हो, नुकसान पहुंचाने वाला हो या ना हो, या सबका मिश्रण हो, मुझे लगता है कि सच की तलाश करना हमारे हित में है."
वहीं, बिल डायमंड को नहीं लगता कि "एलियन से सच में मुठभेड़ को गुप्त रखा जा सकता है." वह बताते हैं, "अगर किसी सभ्यता ने तारों के बीच सफर करने में महारत हासिल कर लिया है, तो उनके पास हमारी सोच और कल्पनाओं से भी कहीं ज्यादा तकनीक और क्षमताएं हैं. अगर वे हमसे बात करना चाहें, तो करेंगे. अगर ना चाहें, तो नहीं करेंगे. अगर वो चाहें कि हम उन्हें देखें, तो वे दिखाई देंगे. अगर ना चाहें, तो नहीं दिखेंगे!"
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 04, 2026 07:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

