हजारों साल पुरानी ममी में पैदा हुई यीस्ट से वैज्ञानिकों ने बनाई ब्रेड
ओतेत्जी द आइसमैन नाम की एक हजारों साल पुरानी फ्रोजन ममी की आंत में यीस्ट पैदा होता रहा.
ओतेत्जी द आइसमैन नाम की एक हजारों साल पुरानी फ्रोजन ममी की आंत में यीस्ट पैदा होता रहा. इसका पता लगाने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने इससे ब्रेड बनाई है.करीब 5,300 साल पहले ओएत्जी ऑस्ट्रिया और इटली की सीमा पर आल्प्स में घूम रहा था. उसी वक्त पीठ में एक तीर लगने से उसकी मौत हो गई. यह तब की बात है जब मिस्र के पिरामिड नहीं बने थे. पहाड़ों की बर्फ में वह हजारों साल तक दबा रहा.
1991 में दो जर्मन पैदल यात्रियों को इटली के दक्षिणी टिरोल इलाके में उसके अवशेष मिले जो ममी में बदल चुके थे. हालांकि बर्फ में दबे होने की वजह से ये अवशेष काफी अच्छी तरह संरक्षित थे. उसके बाद से इन अवशेषों को एक बर्फीले कब्र में माइनस छह डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा गया है. वैज्ञानिकों को ओएत्जी का सावधानी से अध्ययन करने का मौका मिला है जिससे प्राचीन मानव के जीवन के बारे में इतिहास की परतों में दबी अहम जानकारियां मिल रही हैं. बुधवार को माइक्रोबियोम जर्नल में प्रकाशित नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, इटली की एक टीम ने इस फ्रोजेन अवशेष में सक्रिय प्राचीन और आधुनिक सूक्ष्मजीव का पता लगाया है. रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखक यूरेक रिसर्च इंस्टीट्यूट के मोहम्मद सारहान ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "हमें यीस्ट मिला जिसकी हमें बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी."
बढ़िया खमीर
वैज्ञानिकों ने देखा कि चार अलग अलग तरह के यीस्ट शून्य से नीचे के तापमान पर ओएत्जी की आंत, त्वचा और उस भूरे पानी में जिंदा रहे जब उसके शरीर का बर्फ थोड़ा पिघला था. इस तरह के यीस्ट बेहद ठंडी जगह पर ही जिंदा रह सकते हैं जैसे कि अंटार्कटिका. माना जा रहा है कि इन्होंने उसके शरीर में तब प्रवेश किया होगा जब उसकी मौत हो चुकी थी.
जीनों का विश्लेषण करने से पता चला है कि ओएत्जी की आंत में, "डीएनए के नुकसान के स्तर की तुलना सूक्ष्मजीवों से की जा सकती है." इससे पता चलता है कि यीस्ट ने उसके शरीर में मौत के तुरंत बाद प्रवेश किया.
वैज्ञानिकों ने इसके बाद आंत से मिले यीस्ट को फ्रिज में रिप्रोड्यूस किया. सारहान ने कहा, "अगर आप किसी से कहेंगे कि आपके पास यीस्ट है तो वह तुरंत पूछेगा, क्या हम इसे ब्रेड के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं." तो फिर उन्होंने खमीर वाली ब्रेड बनाने की कोशिश की. सारहान ने माना, "तुरंत तो उसने काम नहीं किया." फिर उन्होंने हंसते हुए कहा हालांकि तीन महीने तक कोशिश करने के बाद, "हमारे पास एक बेहद अच्छा खमीर था." इस रिसर्च में इस यीस्ट के लिए ज्यादा गंभीर संभावित इस्तेमाल की भी कोशिशें हुईं.
1991 में जब ममी मिली थी तब शुरुआत में इसे एक आम शव की तरह ही देखा गया. फेनॉल नाम का एक रसायन इस पर इस्तेमाल किया गया ताकि शरीर में फंगस को विकसित होने से रोका जा सके. हालांकि यह अनोखा यीस्ट फेनॉल को खाने में सफल हुआ. इसका मतलब है कि यह भविष्य में जहरीले वातावरण में रसायनों को तोड़ने में मदद कर सकता है.
प्राचीन सूक्ष्म जीवों के भीतर
ओएत्जी के शरीर में सिर्फ यीस्ट ही चौंकाने वाली चीज नहीं थी. सूक्ष्मजीवों का अध्ययन करने पर आंत में एक खास तरह का बैक्टीरिया मिला जो आधुनिक इंसानों की आंत में नहीं मिलता है. औद्योगिक दुनिया के वासियों में भले ही यह बैक्टीरिया ना मिले लेकिन सारहान का कहना है कि अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में कबीले में रहने वाले लोगों में यह बैक्टीरिया मिला है. ऑस्ट्रिया के हालश्टाट के नमक की खदान में संरक्षित 3000 साल पुराने मल में भी यह मिला है.
सारहान ने समझाया कि ओएत्जी और कांस्य युग के साल्ट माइनर ज्यादा फाइबर और संपूर्ण अनाज खाते थे. यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि क्या इस यीस्ट ने ममी को नुकसान पहुंचाया है. सारहान के मुताबिक इस यीस्ट पर अभी और रिसर्च की जरूरत होगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 05, 2026 11:10 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

