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अमेरिका में डाटा सेंटर को लेकर क्यों हो रहा भारी विरोध

अमेरिका में तेजी से डाटा सेंटर बन रहे हैं.

अमेरिका में डाटा सेंटर को लेकर क्यों हो रहा भारी विरोध
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिका में तेजी से डाटा सेंटर बन रहे हैं. इससे पर्यावरण, लोगों की सेहत और बिजली की आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय लोगों के भारी विरोध के चलते दर्जनों प्रोजेक्ट या तो रुक गए हैं या उनमें देरी हो रही है.अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के छोटे से ग्रामीण इलाके फ्रेडरिक काउंटी में अमेजॉन का एक बड़ा डाटा सेंटर बनाया जा रहा था. शुरुआत में कम्युनिटी एक्टिविस्ट एलिजाबेथ बाउर को इससे कोई खास आपत्ति नहीं थी. लेकिन जब इस प्रोजेक्ट को लगभग 1,000 एकड़ में और बढ़ा दिया गया एवं लोगों की चिंताओं पर ध्यान दिए बिना इसके लिए हरियाली तथा खेती की जमीन का इस्तेमाल किया जाने लगा, तो उन्होंने इसका विरोध करने का फैसला किया.

बाउर दूसरे स्थानीय लोगों के साथ मिलकर, रिहायशी इलाकों के इतने पास हो रहे इस निर्माण कार्य का विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि इससे उड़ने वाली धूल और प्रदूषण के कारण इलाके के लोगों में अस्थमा की बीमारी और ज्यादा बढ़ रही है. बाउर ने कहा, "अगर डाटा सेंटर सही जगह पर हों, तो मुझे कोई समस्या नहीं है. लेकिन अगर वे खेती लायक अच्छी जमीन ले लें, तो मुझे यह मंजूर नहीं है.”

डाटा सेंटर के खिलाफ तेज हो रहा विरोध

अमेरिका में डाटा सेंटरों के खिलाफ दोनों प्रमुख पार्टियों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) के नेताओं और समर्थकों का विरोध बढ़ता जा रहा है. देश भर में हो रहे प्रदर्शनों के जरिए लोग राजनेताओं से इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. अमेरिका का ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया' (डीसी), मैरीलैंड और वर्जीनिया का इलाका इस विरोध का मुख्य केंद्र बना हुआ है. सिर्फ वर्जीनिया में ही इस समय लगभग 640 डाटा सेंटर सूचीबद्ध हैं.

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यह विवाद सिर्फ निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय तक पड़ने वाले असर से भी जुड़ा है. डाटा सेंटर को चएक्टिविस्टलाने के लिए बहुत भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है. पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के मुताबिक, एक डाटा सेंटर में उतनी बिजली की खपत होती है जितनी एक लाख घरों में इस्तेमाल होती है.

हालांकि, अभी जिन डाटा सेंटर का निर्माण हो रहा है, वे इससे 20 गुना ज्यादा बिजली इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी मुख्य वजह एआई को विकसित और इस्तेमाल करने के लिए डाटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की बढ़ती जरूरत है. कुल मिलाकर, इस समय अमेरिका की पूरी बिजली की खपत में डाटा सेंटरों की हिस्सेदारी 4.4 फीसदी है. लेकिन इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ‘गोल्डमैन सैक्स' के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2027 के आखिर तक यह बढ़कर 8.5 फीसदी तक पहुंच सकती है.

काफी ज्यादा बिजली और पानी की खपत

फ्रेडरिक में चल रही यह लड़ाई पूरे अमेरिका में फैले तनाव को दिखाती है. अमेरिका में पहले से ही 4,600 डाटा सेंटर हैं. यह संख्या दुनिया के 10 प्रमुख देशों के कुल डाटा सेंटर से भी लगभग 1,000 ज्यादा है.

अमेरिका के लगभग 40 फीसदी नागरिक किसी न किसी डाटा सेंटर के 5 मील के दायरे में रहते हैं. चूंकि 1,500 से भी ज्यादा नए डाटा सेंटर अभी बन रहे हैं, इसलिए यह संख्या और बढ़ना तय है. दुनिया में कहीं भी इतने ज्यादा डाटा सेंटर नहीं हैं, जितने कि उत्तरी वर्जीनिया में हैं. यह सब लोगों की नाराजगी के बीच हो रहा है. हाल ही में हुए गैलप पोल से पता चला है कि 71 फीसदी लोग अपने इलाकों में डाटा सेंटर बनाने का विरोध करते हैं.

एक अकेला डाटा सेंटर हर दिन 50 लाख गैलन तक पानी इस्तेमाल कर सकता है. उतना ही जितना 50,000 की आबादी वाला एक पूरा शहर करता है. फिर भी, इन्हें अक्सर ऐसे इलाकों में बनाया जाता है जो पहले से ही पानी की भारी कमी झेल रहे हैं. ‘यूएस ड्राउट मॉनिटर' के मुताबिक, फ्रेडरिक काउंटी इस समय खुद गंभीर सूखे से जूझ रहा है.

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में बायोस्टैटिस्टिक्स की प्रोफेसर फ्रांसेस्का डोमिनिसी ने कहा कि टेक कंपनियां भी अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर देती हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "वे पानी से जुड़ी समस्याओं पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही हैं. वे उन जगहों को प्राथमिकता देती हैं जहां जमीन सस्ती मिल सके और जहां स्थानीय नेता तेजी से मंजूरी दे सकें.”

ईंधन का ज्यादा खर्च और वायु प्रदूषण

जिन राज्यों में डाटा सेंटर बहुत ज्यादा हैं, वहां पिछले पांच वर्षों में बिजली की कीमतों में 267 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में एनवायरनमेंटल लॉ की प्रोफेसर हैना वाइजमैन कहती हैं, "बिजली कंपनियां डाटा सेंटर को बिजली पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछा रही हैं. लेकिन इन नई लाइनों का सारा खर्चा आम बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़कर उनसे वसूला जा रहा है.”

यह चिंता भी जताई जा रही है कि डाटा सेंटर बिजली ग्रिड पर इतना ज्यादा बोझ बढ़ा सकते हैं कि उन्हें मजबूरी में बैकअप के लिए डीजल जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. फ्रेडरिक काउंटी की ही बात करें, तो वहां बनने वाले डाटा सेंटर में 99 डीजल जनरेटर लगाने की योजना है, जिससे सेहत के लिए कई तरह के गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डोमिनिसी कहती हैं, "बारीक धूल कणों (फाइन पार्टिकुलेट मैटर) का असर अगर बहुत कम स्तर पर भी हो, तब भी जन्मजात बीमारियों, सांस और दिल की बीमारियों, दिमाग से जुड़ी समस्याओं और असमय मौत का खतरा बढ़ जाता है. ये कण स्थानीय वन्यजीवों के लिए भी खतरा बनते हैं और पेड़-पौधों के विकास व पैदावार को कम कर देते हैं.”

डाटा सेंटर के लिए कौन तय करता है नियम-कानून

स्थानीय लोगों पर पड़ रहे बुरे असर के बावजूद, वाइजमैन कहती हैं कि डाटा सेंटर की लोकेशन तय करने का फैसला ज्यादातर नगर पालिका या स्थानीय प्रशासन (म्यूनिसिपैलिटी) के हाथ में ही होता है. इसके अलावा, कई राज्य डाटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों के लिए ऐसे ढीले नियम-कानून बनाते हैं जिनसे वे बस्तियों या प्राकृतिक क्षेत्रों के पास भी तेजी से डाटा सेंटर बना सकते हैं.

वाइजमैन ने आगे कहा, "कई स्थानीय सरकारों ने जमीन के इस्तेमाल को लेकर कोई कड़े नियम-कानून न बनाने का फैसला किया है. ऐसे में डाटा सेंटर बनाने वाली कंपनियां जो चाहें वह करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हो जाती हैं.”

राष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने 2025 के कार्यकारी आदेश ‘रिमूविंग बैरियर्स टू अमेरिकन लीडरशिप इन एआई' (एआई में अमेरिकी नेतृत्व की राह की बाधाओं को दूर करना) के तहत डाटा सेंटरों के निर्माण के लिए कागजी प्रक्रियाओं और सरकारी नियमों को आसान कर दिया है.

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कई टेक कंपनियों ने इस बात पर जोर दिया है कि स्थानीय निकाय गोपनीयता समझौतों पर दस्तखत करें, ताकि आम लोगों को इस बारे में पूरी जानकारी न मिल सके कि ये परियोजनाएं कितनी बड़ी हैं और इनमें प्राकृतिक संसाधनों का कितना अधिक इस्तेमाल होगा. इसलिए, स्थानीय निवासियों की राय लेने के बजाय, वे अपनी योजनाएं तैयार करने के लिए सीधे नगर पालिका के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं.

वाइजमैन ने यह भी बताया कि टेक और डेवलपमेंट कंपनियां अब जोनिंग (जमीन के इस्तेमाल) और बिजली की खपत के मानक तय करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. उन्होंने कहा, "वे डाटा सेंटरों के लिए बिजली की खास दरें तय करने की राज्य की सभी नियामक और कानूनी प्रक्रियाओं में शामिल हो रही हैं. अब ऐसा लग रहा है कि तकनीक के क्षेत्र की कंपनियां स्थानीय निकायों के अधिकारों को खत्म करने वाले राज्य के विधायी प्रस्तावों में भी ज्यादा से ज्यादा दखल दे रही हैं.”

विरोध का सामना कैसे करती हैं टेक कंपनियां

टेक कंपनियों की दलील है कि डाटा सेंटर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के एक अध्ययन से पता चला है कि इनसे स्थानीय लोगों को सिर्फ निर्माण कार्य के दौरान कुछ समय के लिए ही रोजगार मिलता है, पक्की या लंबी अवधि वाली टेक नौकरियां नहीं.

हालांकि, ऐसे भी संकेत मिल रहे हैं कि ये कंपनियां स्थानीय समुदायों के बीच भरोसा बनाना चाहती हैं. मार्च में, माइक्रोसॉफ्ट ने डाटा सेंटर के विकास के लिए स्थानीय सरकारों के साथ गोपनीयता समझौतों का इस्तेमाल बंद कर दिया. कंपनी का कहना था कि वह अपने पड़ोसियों (स्थानीय लोगों) के साथ बेहतर भरोसा कायम करना चाहती है. वहीं मेटा का कहना है कि वह डाटा सेंटर के निर्माण में कम-कार्बन वाले कंक्रीट का परीक्षण और इस्तेमाल कर रही है.

डोमिनिसी कहती हैं कि उन्हें भविष्य का एक ‘ऐसा रास्ता दिखता है जिसमें दोनों पक्षों की जीत है'. इससे तकनीक के क्षेत्र में भी प्रगति होगी और स्थानीय लोगों को भी फायदा पहुंचेगा. उन्होंने कहा, "मैं चाहूंगी कि डाटा सेंटरों के सभी प्रभावों का किसी निष्पक्ष वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए मूल्यांकन किया जाए और फिर डाटा सेंटर इस नुकसान को जितना हो सके कम करने के लिए कदम उठाएं.”

अस्थायी तौर पर लग रही रोक

ऐसा लगता है कि स्थानीय लोगों के विरोध का असर होता दिख रहा है. अभी पिछले ही हफ्ते, न्यूयॉर्क बड़े पैमाने के नए डाटा सेंटरों के निर्माण पर एक साल तक की रोक लगाने वाला पहला अमेरिकी राज्य बन गया है. अन्य राज्यों में भी ऐसे प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव रखे गए हैं और कुछ काउंटी व नगर पालिकाओं ने तो अपनी ओर से खुद ही अस्थायी प्रतिबंध जारी कर दिए हैं.

फ्रेडरिक में, बाउर और उनके साथी कार्यकर्ता अपने घर के ठीक पीछे बन रहे डाटा सेंटर का लगातार विरोध कर रहे हैं. उन्होंने काउंटी चुनाव में इस नियम पर जनमत संग्रह कराने के लिए जरूरी हस्ताक्षर भी जुटा लिए थे, लेकिन मैरीलैंड की सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई भी कदम उठाने की संभावना को खारिज कर दिया था.

जनता के भारी विरोध को देखते हुए काउंटी प्रशासन ने नए डाटा सेंटरों के निर्माण पर अस्थायी रोक जरूर लगा दी है, लेकिन इसके बावजूद बाउर को लगता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने फ्रेडरिक के लोगों को निराश किया है. उन्होंने कहा, "आम नागरिकों के पास कोई मौका नहीं है. यह पूरी कोशिश डाटा सेंटरों से लड़ने के लिए नहीं थी, बल्कि लोगों को अपनी बात रखने का मौका देने के लिए थी.”

तमाम अड़चनों के बावजूद, बाउर को अब भी उम्मीद की किरण दिखाई देती है. उनका कहना है कि फ्रेडरिक में होने वाले काउंटी चुनाव में कई ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं जो डाटा सेंटरों के इस विस्तार का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "अगर नई काउंसिल आती है, तो वह इस नक्शे को पूरी तरह से बदल सकती है. हम निराश हैं, लेकिन हार नहीं मान रहे हैं.”

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2026 06:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).