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नासा का आर्टेमिस II मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा की ओर बढ़ा ओरियन यान; रॉकेट से सफलतापूर्वक हुआ अलग

नासा के ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. चंद्रमा की यात्रा पर निकले ओरियन अंतरिक्ष यान ने रॉकेट के ऊपरी हिस्से से सफलतापूर्वक अलग होकर अपनी स्वतंत्र उड़ान शुरू कर दी है. 50 साल बाद मानव एक बार फिर चंद्रमा के करीब जा रहा है.

नासा का आर्टेमिस II मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा की ओर बढ़ा ओरियन यान; रॉकेट से सफलतापूर्वक हुआ अलग
ओरियन अंतरिक्ष यान रॉकेट के ऊपरी चरण से सफलतापूर्वक अलग हो गया (Photo/X@NASA)

फ्लोरिडा: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (American space agency NASA) ने बुधवार को अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है. फ्लोरिडा (Florida) के केनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से सफल लॉन्चिंग के कुछ घंटों बाद, ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान (Spacecraft) अपने रॉकेट के ऊपरी चरण से सफलतापूर्वक अलग हो गया है. नासा (NASA) ने पुष्टि की है कि यान अब स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और अंतरिक्ष यात्री वर्तमान में "प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशंस" (Proximity Operations) का परीक्षण कर रहे हैं. यह भी पढ़ें: नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन: 50 साल बाद फिर चंद्रमा की ओर रवाना होंगे इंसान, आज होगा लॉन्च

मैनुअल रूप से यान संभाल रहे अंतरिक्ष यात्री

नासा द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, ओरियन यान में सवार अंतरिक्ष यात्री यान को मैनुअल रूप से संचालित करने का अभ्यास कर रहे हैं. यह परीक्षण भविष्य के मिशनों में दूसरे अंतरिक्ष यान के साथ जुड़ने (Docking) की प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. यान ने सफलतापूर्वक अपने सोलर एरे विंग्स (सौर पैनल) भी खोल लिए हैं, जिससे अब इसे सूर्य से ऊर्जा मिलनी शुरू हो गई है.

50 साल बाद ऐतिहासिक चंद्र यात्रा

यह मिशन पिछले 50 से अधिक वर्षों में चंद्रमा के चारों ओर पहला मानवयुक्त फ्लाईबाई (Lunar Flyby) है. इससे पहले 1969 में अपोलो 11 मिशन के जरिए मानव पहली बार चंद्रमा पर उतरा था. आर्टेमिस II मिशन को स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए लॉन्च पैड 39B से रवाना किया गया है.

नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने इस लॉन्च को अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक निर्णायक क्षण बताया है. उन्होंने कहा, 'आर्टेमिस II केवल एक मिशन नहीं, बल्कि चंद्रमा पर स्थायी रूप से रुकने और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचने की हमारी नींव है.' यह भी पढ़ें: NASA Artemis II Moon Mission 2026: 6 मार्च को लॉन्च होगा आर्टेमिस II, 50 साल बाद चांद के करीब जाएंगे इंसान

मिशन में शामिल टीम और लक्ष्य

लगभग 10 दिनों के इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: नासा के रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन.

यह टीम चंद्रमा के उस "डार्क साइड" (Far Side) की तस्वीरें और डेटा एकत्र करेगी, जिसे इंसान बहुत कम देख पाए हैं. यान पृथ्वी की ऊँची कक्षा में जाने के बाद एक 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' प्रक्रिया के जरिए चंद्रमा की कक्षा की ओर बढ़ेगा.

वापसी और भविष्य की राह

मिशन के दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए कई छोटे उपग्रह (CubeSats) भी तैनात किए जाएंगे.  चंद्रमा का चक्कर लगाने के बाद, यह दल पृथ्वी की ओर लौटेगा और प्रशांत महासागर में स्पलैशडाउन (समुद्र में उतरना) के साथ मिशन का समापन होगा. नासा के अनुसार, यह परीक्षण उड़ान भविष्य में चंद्रमा की सतह पर इंसानों के रहने और गहरे अंतरिक्ष की खोज के रास्ते खोलेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 02, 2026 12:41 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).