नई दिल्ली, 29 मई: ब्रह्मांड और खगोल विज्ञान (Universe and Astronomy) में रुचि रखने वालों के लिए आगामी रविवार, 31 मई की रात बेहद खास होने जा रही है. इस दिन रात के आकाश में एक दुर्लभ खगोलीय घटना (Astronomical Phenomenon) दिखाई देगी, जिसे 'ब्लू मून' (Blue Moon) कहा जाता है. यह स्थिति तब बनती है जब एक ही अंग्रेजी कैलेंडर महीने के भीतर दो बार पूर्ण चंद्रमा या पूर्णिमा (Purnima) का संयोग बनता है. मई महीने की शुरुआत में ही 1 मई को पहली पूर्णिमा देखी जा चुकी है, और अब 31 मई को महीने का दूसरा पूर्ण चंद्र दिखाई देगा. इस विशेष घटना के कारण वर्ष 2026 में सामान्य 12 पूर्णिमा के बजाय कुल 13 पूर्णिमा दर्ज की जाएंगी. यह भी पढ़ें: Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, दिल्ली से मुंबई-बेंगलुरु तक भारत में कब दिखेगा 'ब्लड मून'? जानें टाइमिंग
क्या है 'ब्लू मून' के पीछे का वैज्ञानिक कारण?
कैलेंडर आधारित ब्लू मून की घटना चंद्र चक्र (Lunar Cycle) और ग्रेगोरियन कैलेंडर के बीच मामूली अंतर के कारण होती है. चंद्रमा को अमावस्या से पूर्णिमा तक का अपना एक पूरा चक्र (फेज) पूरा करने में लगभग 29.5 दिन का समय लगता है.
चूंकि अधिकांश कैलेंडर महीनों की अवधि 30 या 31 दिनों की होती है, इसलिए समय का चक्र कभी-कभी इस तरह संरेखित (Align) हो जाता है कि 30 दिनों की खिड़की के भीतर दो पूर्णिमा आ जाती हैं. बोलचाल की भाषा में 'ब्लू मून' कहे जाने के बावजूद, इसका नाम पूरी तरह से केवल समय के सूचक पर आधारित है और इससे चंद्रमा के भौतिक रंग में कोई बदलाव नहीं आता है. सामान्य वायुमंडलीय परिस्थितियों में चंद्रमा अपने मानक मोतिया सफेद या भूरे रंग में ही चमकता हुआ दिखाई देगा.
इस बार 'माइक्रोमून' का भी बन रहा है अद्भुत संयोग
31 मई को होने वाली यह खगोलीय घटना खगोलविदों के लिए इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक 'माइक्रोमून' (Micromoon) के साथ मेल खा रही है. माइक्रोनमून तब होता है जब पूर्णिमा का चरम उस समय आता है जब चंद्रमा अपनी अंडाकार कक्षा में पृथ्वी से अपनी सबसे दूर की दूरी (Apogee) पर होता है.
इस बढ़ी हुई दूरी के कारण, यह ब्लू मून एक औसत पूर्ण चंद्रमा की तुलना में लगभग छह से सात प्रतिशत छोटा और थोड़ा कम चमकदार दिखाई देगा. खगोलविदों का कहना है कि हालांकि नग्न आंखों से इसके आकार में आई इस कमी को पहचानना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन 'मून इल्यूजन' (चंद्रमा का भ्रम) नामक एक संवेदी घटना के कारण, चंद्रोदय के ठीक बाद क्षितिज के पास होने पर यह चंद्र चक्र आश्चर्यजनक रूप से बड़ा दिखाई दे सकता है. यह भी पढ़ें: NASA Artemis II Moon Mission 2026: 6 मार्च को लॉन्च होगा आर्टेमिस II, 50 साल बाद चांद के करीब जाएंगे इंसान
कब और कैसे देख सकेंगे ब्लू मून?
खगोलीय गणना के अनुसार, 31 मई को यह ब्लू मून पूर्व दिशा से उदित होगा. हालांकि, यह आकाश में थोड़ा नीचे और कन्या (Virgo) तारामंडल के ठीक दाईं ओर दिखाई देगा. एक मासिक कैलेंडर घटना के रूप में, ब्लू मून अपेक्षाकृत दुर्लभ होते हैं, जो औसतन हर दो से तीन साल में एक बार घटित होते हैं.
इससे पहले स्काईवाचर्स ने अगस्त 2023 में मासिक ब्लू मून देखा था, और इस सप्ताह के बाद अगला ऐसा संयोग दिसंबर 2028 में बनने का अनुमान है. इस घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण या दूरबीन की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह आम जनता के लिए पूरी तरह से सुलभ है. भौगोलिक स्थिति के आधार पर, यदि स्थानीय मौसम साफ रहता है, तो सूर्यास्त के ठीक बाद चंद्रमा के क्षितिज को पार करते ही इसे देखने का सबसे उत्तम समय शुरू हो जाएगा.











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