ISRO प्रमुख वी. नारायणन का बड़ा ऐलान, 2027 में अंतरिक्ष जाएगा भारत का 'गगनयान', मार्च में होगा पहला अनक्रूड टेस्ट
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नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन (ISRO Chairman V Narayanan) ने गगनयान मिशन को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट साझा किया है. शुक्रवार को संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने पुष्टि की कि भारत का महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन 'गगनयान' साल 2027 में लॉन्च किया जाएगा. इस ऐतिहासिक यात्रा से पहले इसरो सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के लिए मानवरहित मिशनों की एक श्रृंखला आयोजित करेगा, जिसमें पहला 'G1' मिशन मार्च 2026 में लॉन्च होने की संभावना है.

नारायणन ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा इसरो की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए रॉकेट प्रणालियों से लेकर सॉफ्टवेयर सिमुलेशन तक हर स्तर पर "100 में से 100" स्कोर करना अनिवार्य है. यह भी पढ़े:  ISRO PSLV-C62 Mission Launch Live Streaming: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी 2026 के पहले मिशन में EOS-N1 सैटेलाइट कर रही है तैनात, यहां देखें ऑनलाइन टेलीकास्ट

मार्च 2026 में होगा पहला परीक्षण

मानवयुक्त मिशन से पहले इसरो तीन मानवरहित (Uncrewed) मिशनों की योजना बना रहा है. इसमें 'G1' परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण है, जो मार्च 2026 के लिए प्रस्तावित है.

  • रोबोटिक पेलोड: इस मिशन में 'व्योममित्र' (Vyommitra) नामक एक महिला रोबोट को भेजा जाएगा.

  • उद्देश्य: यह परीक्षण लाइफ सपोर्ट सिस्टम, री-एंट्री (पृथ्वी के वायुमंडल में वापसी) और रिकवरी प्रणालियों की सटीकता की जांच करेगा.

  • प्रगति: G1 मिशन का काम लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है और अब तक 8,000 से अधिक जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं.

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा-ट्रेनिंग

इस मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्री) का चयन किया गया है: शुभंशु शुक्ला, प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप. इसरो प्रमुख ने बताया कि सभी परीक्षण इन यात्रियों की सुरक्षा को और बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं. मिशन के लिए उपयोग होने वाले 'LVM3' रॉकेट को 'ह्यूमन-रेटेड' बनाया जा रहा है, ताकि यह मानव उड़ान के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहे.

इसरो प्रमुख ने हाल ही में हुए पीएसएलवी (PSLV) रॉकेट विफलताओं का गगनयान पर प्रभाव पड़ने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि दोनों कार्यक्रम एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं और जांच के साथ-साथ गगनयान का काम सुचारू रूप से जारी है.

गगनयान मिशन का भविष्य-महत्व

गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (400 किमी) में 3 दिनों के लिए भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित रूप से वापस समुद्र में लैंड कराया जाएगा. यह मिशन भारत के भविष्य के अंतरिक्ष लक्ष्यों की नींव रखेगा:

  1. 2035: भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना.

  2. 2040: चंद्रमा पर मानव भेजने का लक्ष्य.

गगनयान की सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में खड़ा कर देगी जिनके पास अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता है.