Solar Flare News: 1 फरवरी से सूर्य में लगातार तेज़ सोलर फ्लेयर्स (Solar Flares) देखे जा रहे हैं, जिनकी वजह से पृथ्वी पर रेडियो कम्युनिकेशन में रुकावट दर्ज की गई है. इस बढ़ती सौर गतिविधि को लेकर भारत की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) समेत कई वैश्विक एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. इस सप्ताह सूर्य ने शक्तिशाली सौर ज्वालाएँ छोड़ीं, जिससे अफ्रीका और यूरोप में संक्षिप्त रेडियो व्यवधान उत्पन्न हुआ. भारत के इसरो ने संभावित ब्लैकआउट की चेतावनी दी है और अपने उपग्रहों की बारीकी से निगरानी कर रहा है क्योंकि सौर गतिविधि उच्च बनी हुई है, जल्द ही और अधिक भड़कने की उम्मीद है. Solar Eclipse September 2025 Date, Time: कब लग रहा है साल का आखिरी सूर्यग्रहण, क्या यह भारत में दिखाई देगा? एक क्लिक में जानें सबकुछ
कब और कैसे हुआ असर?
बुधवार, 4 फरवरी को सूर्य से एक बेहद शक्तिशाली X-क्लास सोलर फ्लेयर निकला, जिसका असर पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल पर पड़ा. इसकी वजह से अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में रेडियो सिग्नल अस्थायी रूप से बाधित हो गए. भारत में भी संभावित रेडियो ब्लैकआउट को लेकर चेतावनी जारी की गई है.
सोलर फ्लेयर्स क्या होते हैं और क्यों खतरनाक हैं?
सोलर फ्लेयर्स सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा और विकिरण (Radiation) के अचानक विस्फोट होते हैं, जो रोशनी की गति से चलते हुए करीब 8 मिनट में पृथ्वी तक पहुंच जाते हैं. वैज्ञानिक इन्हें A, B, C, M और X श्रेणियों में बांटते हैं. X-क्लास सबसे शक्तिशाली होती है. ये रेडियो कम्युनिकेशन, नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा बन सकती हैं. कई बार इनके साथ CME (Coronal Mass Ejection) भी होती है, जिससे जियोमैग्नेटिक तूफान और बड़े पैमाने पर बिजली गुल होने जैसी घटनाएं हो सकती हैं.
हालिया रेडियो बाधा की वजह क्या है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक सूर्य के एक सक्रिय सनस्पॉट क्षेत्र AR4366 से लगातार M और X-क्लास फ्लेयर्स निकल रहे हैं. इससे पहले भी सूर्य से X1.5 और X8.4 श्रेणी के फ्लेयर्स देखे गए थे. नासा के अनुसार, इन फ्लेयर्स से निकली तीव्र एक्स-रे रेडिएशन ही रेडियो ब्लैकआउट की मुख्य वजह बनी.
अचानक इतना सक्रिय क्यों हुआ सूर्य?
सूर्य इस समय अपने लगभग 11 साल के सोलर साइकल के सक्रिय चरण में है. इस दौरान सनस्पॉट्स ज्यादा बनते हैं और उनमें चुंबकीय अस्थिरता बढ़ जाती है, जिससे बार-बार ऊर्जा विस्फोट होते हैं.
ISRO का अलर्ट—भारत में क्या असर होगा?
ISRO ने कहा है कि सभी भारतीय सैटेलाइट्स की कड़ी निगरानी की जा रही है। एजेंसी ने चेताया है कि अगर सौर गतिविधि इसी तरह जारी रही तो रेडियो कम्युनिकेशन बाधित हो सकता है. नेविगेशन सिस्टम पर असर पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल बड़े पैमाने पर पावर ब्लैकआउट का खतरा कम है.
आगे क्या हो सकता है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी सोलर फ्लेयर्स देखने को मिल सकते हैं. अगर कोई शक्तिशाली CME सीधे पृथ्वी से टकराई, तो असर ज्यादा व्यापक हो सकता है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंतरिक्ष एजेंसियां सूर्य की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.













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