Solar Storm 2026: सूर्य की 'एक्टिव रीजन 14366' से निकला शक्तिशाली X8.1 फ्लेयर; भारत में रेडियो ब्लैकआउट और GPS बाधा की चेतावनी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

Solar Storm 2026:  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) यानी इसरो (ISRO) ने हाल ही में सूर्य (Sun) पर हुई हलचल के बाद भारत के अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे और संचार प्रणालियों के लिए हाई अलर्ट (High Alert) जारी किया है.  बुधवार, 4 फरवरी 2026 को अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि सूर्य के 'एक्टिव रीजन 14366' (Active Region 14366) से एक X8.1 श्रेणी का सौर फ्लेयर (X8.1-Class Flare) निकला है.  यह इस साल का अब तक का सबसे शक्तिशाली सौर विस्फोट है, जिससे भारत में हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार, GPS नेविगेशन और सैटेलाइट ऑपरेशन्स के प्रभावित होने की संभावना है. यह भी पढ़ें: भीषण G4 सौर तूफान की पृथ्वी से टक्कर: दुनिया भर में दिखेगा 'अरोरा बोरियालिस' का नजारा, जानें क्या भारत में भी दिखाई देगी आसमान में रंगीन रोशनी?

X8.1 फ्लेयर: इस साल का सबसे भीषण सौर विस्फोट

फरवरी की शुरुआत से ही सूर्य के चुंबकीय रूप से जटिल सनस्पॉट क्लस्टर से कई बड़ी सौर ज्वालाएं (Solar Flares) निकल रही हैं. इनमें से सबसे शक्तिशाली X8.1 विस्फोट 1 फरवरी को हुआ था, जिसे आधुनिक उपग्रह निगरानी के इतिहास में शीर्ष 20 सबसे शक्तिशाली सौर घटनाओं में गिना जा रहा है.

कोलकाता स्थित 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च' (IISER) के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सक्रियता 'सोलर मैक्सिमम' का परिणाम है.  यह सूर्य के 11 साल के चक्र का वह चरण है जब सूर्य अत्यधिक सक्रिय हो जाता है और पृथ्वी की ओर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा के बड़े विस्फोट भेजता है.

संचार और बिजली ग्रिड पर संभावित प्रभाव

हालांकि सौर फ्लेयर से जमीन पर इंसानों को सीधा शारीरिक खतरा नहीं होता, लेकिन वे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (आयनोस्फीयर) को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं. ISRO ने निम्नलिखित प्रमुख जोखिमों की पहचान की है:

  • रेडियो ब्लैकआउट: विमानन, समुद्री और आपातकालीन सेवाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले हाई-फ्रीक्वेंसी (HF) रेडियो सिग्नल अस्थायी रूप से पूरी तरह ठप हो सकते हैं.
  • सैटेलाइट बाधाएं: ISRO अपने 50 से अधिक परिचालन उपग्रहों की निगरानी कर रहा है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स में होने वाली किसी भी गड़बड़ी को रोका जा सके.
  • GPS में त्रुटि: नेविगेशन सिस्टम की सटीकता कम हो सकती है, जिससे लॉजिस्टिक्स और रक्षा क्षेत्रों में दिक्कत आ सकती है.
  • पावर ग्रिड स्थिरता: अत्यधिक शक्तिशाली फ्लेयर बिजली के ट्रांसफार्मर पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे ग्रिड फेल होने का खतरा रहता है.

भारत का सुरक्षा कवच: आदित्य-L1 मिशन

ISRO की टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के निदेशक अनिल कुमार ने पुष्टि की है कि सभी ग्राउंड स्टेशनों को अलर्ट कर दिया गया है. इस स्थिति में भारत का सौर वेधशाला मिशन, आदित्य-L1, रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में कार्य कर रहा है.

पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित यह अंतरिक्ष यान सौर विकिरण और चुंबकीय क्षेत्र पर रीयल-टाइम डेटा प्रदान कर रहा है. आदित्य-L1 द्वारा भेजे गए डेटा की मदद से भारतीय वैज्ञानिक सौर तूफान के पृथ्वी तक पहुंचने से 24 से 48 घंटे पहले ही अग्रिम चेतावनी जारी करने में सक्षम हैं.

पूर्वानुमान: कब तक रहेगा खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि सबसे तीव्र फ्लेयर पहले ही निकल चुके हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है,क्योंकि संबंधित सनस्पॉट क्षेत्र अभी भी पृथ्वी की ओर है. अगले 24 से 48 घंटों में एक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकता है, जिससे मध्यम स्तर की भू-चुंबकीय हलचल होने की संभावना है. वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि इस सप्ताह के अंत तक रुक-रुक कर रेडियो ब्लैकआउट की घटनाएं हो सकती हैं.