मुंबई: अंतरिक्ष में मची एक बड़ी हलचल के कारण मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को पृथ्वी एक शक्तिशाली G4-श्रेणी (Severe) के भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) की चपेट में है. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (National Oceanic and Atmospheric Administration) यानी एनओएए (NOAA) ने इसे पिछले दो दशकों का सबसे भीषण सौर तूफान बताया है. रविवार को सूर्य से निकले एक विशाल 'कोरोनल मास इजेक्शन' (CME) के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. इसके प्रभाव से दुनिया भर के आसमान में रंगीन रोशनी यानी 'अरोरा बोरियालिस' (Aurora Borealis) का दुर्लभ नजारा देखने को मिल रहा है. यह भी पढ़ें: चांद की सैर करेगा आपका नाम: NASA के आर्टेमिस II मिशन के लिए ऐसे प्राप्त करें अपना 'डिजिटल बोर्डिंग पास'
क्या होता है भू-चुंबकीय (सौर) तूफान?
जब सूर्य की सतह से अरबों टन आवेशित कण (प्लाज्मा) तेज गति से अंतरिक्ष में फैलते हैं और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो इसे भू-चुंबकीय तूफान कहा जाता है. ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे आसमान में हरे, लाल और बैंगनी रंग की नाचती हुई रोशनी दिखाई देती है. इसे उत्तरी गोलार्ध में 'अरोरा बोरियालिस' और दक्षिणी गोलार्ध में 'अरोरा ऑस्ट्रेलिस' कहा जाता है.
किन देशों में दिखेगा नजारा?
आम तौर पर यह रोशनी केवल ध्रुवीय क्षेत्रों (जैसे अलास्का या नॉर्वे) में दिखती है, लेकिन G4 श्रेणी का तूफान होने के कारण यह काफी दक्षिण तक खिसक गई है:
- यूरोप और एशिया: पुर्तगाल, फ्रांस, जर्मनी और चीन के उत्तरी हिस्सों में पहले ही अद्भुत नजारे देखे जा चुके हैं.
- अमेरिका: अमेरिका के लगभग 28 राज्यों में आज रात इसके दिखने की संभावना है.
क्या भारत में भी दिखाई देगी 'उत्तरी रोशनी'?
भारत जैसे कम अक्षांश (Low Latitude) वाले देशों में अरोरा का नग्न आंखों से दिखना अत्यंत दुर्लभ है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लद्दाख (हानले और स्पीति घाटी) जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खगोलविद 'लॉन्ग-एक्सपोजर' फोटोग्राफी के जरिए गहरे लाल रंग की चमक (SAR arc) को कैद कर सकते हैं. आम जनता के लिए यह रोशनी देख पाना कठिन होगा, लेकिन एस्ट्रो-फोटोग्राफर्स के लिए 2026 का यह सौर अधिकतम (Solar Maximum) एक बड़ा अवसर है.
तकनीक और बुनियादी ढांचे पर खतरा
यह सौर तूफान केवल विजुअल ट्रीट नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के लिए चुनौती भी है:
- पावर ग्रिड: बदलता चुंबकीय क्षेत्र बिजली लाइनों में करंट पैदा कर सकता है, जिससे वोल्टेज में अस्थिरता आ सकती है.
- नेविगेशन और संचार: जीपीएस (GPS) सिग्नल्स में बाधा आ सकती है और विमानन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाला रेडियो संचार कुछ समय के लिए ठप हो सकता है.
- सैटेलाइट: अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों के संचालन में भी समस्या आने की आशंका जताई गई है. यह भी पढ़ें: Chandra Grahan 2026: भारत में इस दिन दिखेगा 'ब्लड मून' का अद्भुत नजारा; होली से ठीक पहले लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, जानें सूतक काल और समय
कैसे देखें यह दुर्लभ नजारा?
अगर आप ऐसी जगह हैं जहाँ अरोरा दिखने की संभावना है, तो विशेषज्ञ रात 10:00 बजे से रात 2:00 बजे के बीच शहर की रोशनी से दूर अंधेरे वाले खुले आसमान की ओर देखने की सलाह देते हैं. यदि रोशनी आंखों से धुंधली दिखे, तो स्मार्टफोन के 'नाइट मोड' में 3-5 सेकंड के एक्सपोजर के साथ फोटो लेने पर असली रंग उभर कर आ सकते हैं.
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तूफान का असर 21 जनवरी की देर रात तक कम होने लगेगा, हालांकि इसके अवशेष अगले 24 घंटों तक अरोरा को सक्रिय रख सकते हैं.












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