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जर्मनी ने जंगल की आग सूंघने वाली इलेक्ट्रानिक नाक बनाई

बर्लिन के एक स्टार्ट अप ने ऐसा उपकरण बनाया है जिसमें लगे ताकतवर सेंसर इलेक्ट्रॉनिक नाक की तरह काम करते हैं.

जर्मनी ने जंगल की आग सूंघने वाली इलेक्ट्रानिक नाक बनाई
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बर्लिन के एक स्टार्ट अप ने ऐसा उपकरण बनाया है जिसमें लगे ताकतवर सेंसर इलेक्ट्रॉनिक नाक की तरह काम करते हैं. यह जंगल में आग लगने पर उसकी जानकारी देने में इस्तेमाल होगी.मिनटों में जंगली आग सूंघने वाले इन सेंसरों का परीक्षण जर्मनी के ब्रांडनबुर्ग इलाके में चल रहा है जो सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है. उत्तरपूर्व जर्मनी के एबर्सवाल्ड जंगलों में इस उपकरण के लिए पहुंचे हैं ड्राएआड नेटवर्क्स नाम के स्टार्ट अप के सह-संस्थापक युर्गेन मूलर. यह उपकरण दो साल पहले बनाया गया था. इसमें बेहद संवेदनशील सेंसर लगे हैं जिन्हें जर्मनी की इंजीनियरिंग फर्म बॉश ने बनाया है. मूलर बताते हैं कि यही सेंसर नाक की तरह काम करते हैं जिन्हें पेड़ों पर लगाया गया है. ये सेंसर तापमान, आर्द्रता और हवा के दबाव का भी पता लगाता है. मूलर ने बताया, "हम 10-15 मिनट में धधकती आग का पता लगा सकते हैं, इससे पहले कि वह फैल जाए."

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कैसे काम करता है सेंसर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह सेंसर जंगल में शुरूआती आग और दूसरी लपटों के बीच अंतर बता सकता है जैसे किसी डीजल ट्रक से निकली भभक. एबर्सवाल्ड में मौजूद अपनी लैब में मूलर इस उपकरण को अलग-अलग किस्म की जंगली आग के बीच भेद करना भी सिखा रहे हैं. इसके लिए वह कई तरह की लकड़ियों से निकलने वाले धुएं का इस्तेमाल करते हैं. इससे सेंसर को यह पता चलता है कि किस तरह की आग लगी है. जैसे ही आग का पता चलता है, डाटा एक क्लाउड मॉनिटरिंग सिस्टम में जाता है और स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना तुरंत मिलती है.

पायलट परियोजना के तहत एबर्सवाल्ड जंगलों में करीब 400 सेंसर लगाए गए हैं यानी हर एक हेक्टेयर पर एक उपकरण की व्यवस्था की गई है. ड्राएआड नेटवर्क्स का कहना है कि अमेरिका, ग्रीस और स्पेन समेत दुनिया भर के दस देशों में इस सेंसर का परीक्षण चल रहा है. कंपनी ने पिछले ही साल 10,000 सेंसर बेचे हैं.

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बड़े काम की नाक

ब्रांडनबुर्ग जंगल में फॉरेस्ट फायर प्रोटेक्शन अधिकारी रायमुंड एंगेल का मानना है कि यह सेंसर जंगल में आग का पता लगाने का बेहतर माध्यम है. 105 टावरों के ऊपर लगे कैमरा 360 डिग्री घूम कर आस-पास की जमीन की निगरानी करते हैं जो पहले इंसानों का काम था. एंगेल इन कैमरों की मदद से निकली तस्वीरों को बहुत करीब से जांचते हैं और खतरे का पता लगते ही अलार्म बजाते हैं. 2022 में जंगलों में 521 आग के मामलों में ब्रांडेनबुर्ग सबसे ज्यादा बुरी तरह प्रभावित रहा. एंगले कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजह से जंगलों वाले इलाकों में मौसम काफी हद तक भूमध्यसागरीय इलाकों की तरह है जहां तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जाता है. जितनी जल्दी आग का पता चलेगा, हालात को उतनी जल्दी काबू में लाया जा सकता है.

एसबी/एनआर (एएफपी)

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 18, 2023 03:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).