हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि किसी लड़की को केवल "आई लव यू" चिल्लाना, यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 ('पॉक्सो अधिनियम') की धारा 7 के तहत परिभाषित यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा, जब तक कि उसके साथ "यौन इरादा" न हो. आरोपी को बरी करने के आदेश को बरकरार रखते हुए, न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा, "प्रतिवादी ने चिल्लाकर "आई लव यू" कहकर उसके प्रति अपने प्यार का इजहार किया. इस बिंदु पर यह देखा जाना चाहिए कि यह "प्रेम का इजहार" करते हुए उसका अकेला कृत्य था, और उसके बयानों और उसके दोस्तों के बयानों की बारीकी से जांच करने पर यह तथ्य सामने आएगा कि यह उसकी "यौन इच्छा" के इरादे से नहीं किया गया था. इस प्रकार, ऐसा प्रतीत होता है कि केवल उसके कथित इजहार को ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 के तहत "यौन हमला" नहीं माना जाएगा." मामले के विवरण के अनुसार, घटना 14 अक्टूबर, 2019 को हुई, जब अभियोक्ता (15 वर्षीय लड़की) अपनी सहेलियों के साथ स्कूल से घर लौट रही थी. तब आरोपी उसके पास आया और "आई लव यू" चिल्लाकर उससे अपने प्यार का इज़हार किया. यह भी पढ़ें: 7/11 Mumbai Blast Case: यह गंभीर मामला है; बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची महाराष्ट्र सरकार, 23 जुलाई को होगी सुनवाई
लड़की से सिर्फ़ "आई लव यू" कहना यौन उत्पीड़न नहीं है
Chhattisgarh HC has held that merely shouting “I love you” to a girl does not constitute sexual harassment under Section 7 of POCSO Act, unless accompanied with 'sexual intent'.
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— Live Law (@LiveLawIndia) July 24, 2025
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