सोन्या हल के इनक्यूबेटर में 13 मार्च 2011 को जन्मी एक छोटी-सी सफेद पंखों वाली चूज़ी जो बाद में पर्ल बनी आज दुनिया की सबसे उम्रदराज़ मुर्गी के तौर पर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. पर्ल ने हाल ही में 14 साल और 69 दिन पूरे किए, और अपने जीवन में तमाम बाधाओं को पार करते हुए यह अनोखा मुकाम हासिल किया. जहां आमतौर पर घरेलू मुर्गियों (Gallus Gallus Domesticus) का औसत जीवनकाल 3 से 10 वर्षों के बीच होता है, वहीं पर्ल ने न सिर्फ उम्र की इस सीमा को पार किया, बल्कि अपने जीवन में कई चुनौतियों का भी सामना किया. जिसमें एक क्षतिग्रस्त पैर, गंभीर गठिया, रैकून का हमला, और यहां तक कि चिकन पॉक्स तक शामिल है. मुर्गियों को भी चिकन पॉक्स होता है. यह भी पढ़ें: Viral Video: केरल के व्यक्ति ने एक मिनट में एक हाथ से 122 नारियल तोड़कर बनाया गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड
पर्ल के मालिकों का मानना है कि उसका लंबा जीवन उनके लगातार देखभाल और अपार प्यार की वजह से संभव हुआ. हल परिवार न केवल उसे एक पालतू जानवर की तरह, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं. शुरुआत में पर्ल अपनी दूसरी मुर्गियों के साथ बाहर के पिंजरे में रहती थी, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी और उसकी गतिशीलता कम होने लगी, सोन्या ने उसे अपने घर के लॉन्ड्री रूम में एक शांत और सुरक्षित जगह दे दी जहाँ वह आराम से और स्नेहपूर्वक रह सके.
दुनिया की सबसे उम्रदराज मुर्गी पर्ल
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इस बूढ़ी मुर्गी को टेक्सास की गर्मी असहनीय लगती है और ज़्यादा समय बाहर बिताने के बाद वह हांफने लगती है, हालांकि वह रोज़ बाहर घूमने जाती है और धूप में अपने पंख फैलाती है. अपनी ज़्यादा उम्र के कारण वह ठीक से चल नहीं पाती, लेकिन वह सरपट दौड़ सकती है और अपने गठियाग्रस्त पैरों और पंजों को फैलाने की कोशिश करती है," सोन्या उरगी की मालिक ने आगे कहा.













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