FACT CHECK: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में SC/ST/OBC समुदाय के पुजारियों को वेद-मंत्र पढ़ने पर जेल भेजा गया. एक्स यूजर @bhikkhuasanga ने इस वीडियो को शेयर करते हुए आरोप लगाया कि जाति के आधार पर इन संतों को प्रताड़ित किया गया है और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उल्लंघन हुआ है. लेकिन जब हमने इस वायरल दावे की पड़ताल की तो सच कुछ और ही निकला. सबसे पहली बात, यह वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं बल्कि उत्तराखंड का है.
दूसरी अहम बात, इन लोगों को जाति या वेद मंत्र पढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि फर्जी साधु बनकर धोखाधड़ी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के चलते गिरफ्तार किया गया है.
मैं @myogiadityanath जी से पूछना चाहता हूँ — क्या इन संतों को सिर्फ इसलिए जेल भेजा जा रहा है क्योंकि वो SC/ST/OBC समुदाय से आते हैं? क्या उनका अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने वेद-मंत्र का उच्चारण किया?
अगर किसी धर्मशास्त्र में लिखा है कि शूद्र मंत्र नहीं पढ़ सकते, तो वो धर्म… pic.twitter.com/C5rI9EGlop
— Bhikkhu Asanga Vajra (@bhikkhuasanga) July 15, 2025
200 से ज्यादा फर्जी बाबा गिरफ्तार
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में ‘ऑपरेशन कालनेमी’ की शुरुआत की है, जिसका मकसद फर्जी बाबाओं और साधुओं की पहचान करना और उन्हें कानून के शिकंजे में लाना है. इस अभियान के तहत अब तक 200 से ज्यादा फर्जी बाबाओं को पकड़ा जा चुका है. हरिद्वार की श्यामपुर पुलिस ने हाल ही में 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जो साधु के वेश में घूम रहे थे.
जांच में पता चला कि इनमें से कई मुस्लिम युवक भी थे, जो हिंदू साधु बनकर रह रहे थे. इन लोगों के पास साधु-संत बनने से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज या प्रमाण नहीं था.
धर्म की आड़ में हो रही थी ठगी
चार धाम यात्रा और कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान ये फर्जी साधु श्रद्धालुओं को ठगते थे और धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर अपराध करते थे. पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों का जाति, धर्म या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है. सरकार का साफ कहना है कि ‘ऑपरेशन कालनेमी’ का मकसद सच्चे संतों की पहचान को सुरक्षित रखना और धर्म की आड़ में हो रही ठगी को रोकना है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद इस अभियान को शुरू किया और पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि धार्मिक ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
जातिगत भेदभाव का दावा गलत
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर फैलाया गया जातिगत भेदभाव का दावा गलत और भ्रामक है. ऐसे वायरल पोस्ट्स न सिर्फ अफवाह फैलाते हैं, बल्कि लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को भी भड़काने का काम करते हैं.
इस वीडियो और गिरफ्तारी का जाति, धर्म या वेद मंत्र पढ़ने से कोई लेना-देना नहीं है. गिरफ्तारी फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के आरोपों पर की गई है. ‘ऑपरेशन कालनेमी’ का मकसद ऐसे ही ढोंगियों को बेनकाब करना है.













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