हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की तृतीया को वराह जयंती मनाई जाती है. इस दिन भगवान विष्णु ने वाराह के रूप में तीसरा अवतार लिया था. इसलिए इस दिन भगवान विष्णु एवं भगवान वराह की पूजा-अर्चना करते हैं, और जानें अनजाने हुए पापों के लिए क्षमा याचना करते हैं. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष 26 अगस्त 2025 को वराह जयंती मनाई जाएगी. आइये जानते हैं भगवान विष्णु को वाराह के रूप में क्यों जन्म लेना पड़ा, साथ ही जानेंगे वाराह जयंती सेलिब्रेशन आदि के बारे में
भगवान विष्णु को वराह अवतार क्यों लेना पड़ा?
विष्णु पुराण के अनुसार एक बार हिरण्याक्ष नामक राक्षस पृथ्वी का हरण करके पाताल लोक तलहटी में ले जाकर छिपा दिया. पृथ्वी के डूबने से सभी देवता, ऋषि-मुनि और संपूर्ण मानव समाज के जीवन पर संकट आ गया. उन्होंने भगवान विष्णु से पृथ्वी को बचाने की प्रार्थना की. देवताओं की पुकार पर भगवान विष्णु ने अपनी नाक (या नासिका) से वराह (सुअर) का रूप धारण समुद्र में जलमग्न पृथ्वी पूर्व स्थिति में स्थापित किया और दैत्य हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी वासियों की रक्षा की. इसलिए इस दिवस विशेष को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है. यह भी पढ़ें : Ganesh Chaturthi 2025 Invitation Card in Marathi: गणेश चतुर्थी के लिए प्रियजनों को WhatsApp और Facebook के जरिए भेजें ये ई-इनविटेशन कार्ड
वराह जयंती का मूल तिथि एवं पूजा का शुभ मुहूर्त .
भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया प्रारंभः 12.35 PM (25 अगस्त 2025)
भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया समाप्तः 01.54 PM (26 अगस्त 2025)
उदया तिथि के अनुसार 26 अगस्त 2025 को वराह जयंती मनाई जाएगी.
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्तः 01.40 PM से 04.15 PM तक
ज्योतिषियों के अनुसार भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करने से संपूर्ण प्रतिफल प्राप्त होगा.
अभिजीत मुहूर्तः 11.34 AM 12.25 PM (भगवान विष्णु की पूजा के लिए यह सबसे शुभ मुहूर्त है)
वराह जयंती की पूजा विधि
वराह जयंती पर विष्णु भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत एवं पूजा का संकल्प लेते हैं. पूजा स्थल के समीप स्थल पर गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें. विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान विष्णु को पहले पंचामृत फिर गंगाजल से स्नान करायें. धूप दीप प्रज्वलित करें. पीला फूल, पीला चंदन, तुलसीदल और फल में मिठार्ई और फल अर्पित करें. निम्न मंत्र का जाप करें.
‘ॐ वराहाय नमः’ का जाप करें. पौराणिक कथा सुनें और अंत में विष्णु जी की आरती उतारें. इस दिन गरीबों को दान देने से दोहरे पुण्य की प्राप्ति होती है.











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