Karadaiyan Nombu 2023: पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें करती हैं यह व्रत! जानें व्रत-पूजा के नियम, मुहूर्त, महात्म्य एवं व्रत-कथा?
करादयान नोम्बू तमिल समुदाय की विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है. दक्षिण भारतीय कैलेंडर अथवा तमिल कैलेंडर के अनुसार पंगुनी महीने के पहले दिन मीना संक्रांति के समय मनाया जाता है. इसे करादयान नोनबू के नाम से भी जाना जाता है.
करादयान नोम्बू तमिल समुदाय की विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है. दक्षिण भारतीय कैलेंडर अथवा तमिल कैलेंडर के अनुसार पंगुनी महीने के पहले दिन मीना संक्रांति के समय मनाया जाता है. इसे करादयान नोनबू के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन विशेष रूप से तैयार किए गए प्रसाद या निवेद्यम का नाम है और नोम्बु शब्द का शाब्दिक अर्थ व्रत (उपवास) है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार करादयान नोम्बू का पर्व इस वर्ष 15 मार्च 2023 को मनाया जायेगा. यहां करादयान नोम्बू के व्रत एवं नियमों के बारे में बात करेंगे.
करादयान नोम्बू व्रत का महात्म्य!
मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान को मृत्यु के देवता यम से इसी दिन पुनर्जीवित कराया था. इस पौराणिक कथा के अनुसार करादयान नौम्बू को सावित्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सुहागन महिलाएं पीला वस्त्र पहनकर देवी अपने पति की अच्छी सेहत एवं दीर्घायु के लिए देवी गौरी की पूजा करती हैं तथा उन्हें करादयान नौम्बू नैवेद्यम अर्पित करती हैं. इसके पश्चात वे अपने पति के नाम का पवित्र पीला सूती धागा बाँधती हैं, जिसे मंजल सरदु अथवा नौम्बू चरडू कहते हैं. कहा जाता है कि इस दिन कुंवारी कन्याएं भी करादयान नौम्बू व्रत के साथ पूजा करती हैं, और देवी गौरी से सुयोग्य वर की कामना करती हैं. यह भी पढ़ें : Shiv Jayanti Tithi 2023 Rangoli Design: शिव जयंती पर देखें कुछ खास व लेटेस्ट रंगोली डिजाईन, देखें विडियो
करादायन नोम्बू व्रत तिथि एवं पूजा का शुभ मुहूर्त!
करादायन नोम्बू तमिलनाडु में मनाया जाने वाला आध्यात्मिक तमिल व्रत पर्व है, जो मीना संक्रांति के समय मनाया जाता है. विशेषकर तब जब तमिल माह मासी समाप्त होता है और माह पंगुनी शुरू होता है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष करादायन नोम्बू पर्व 15 मार्च 2023 दिन बुधवार को मनाया जायेगा. इस दिन प्रातः 06.29 AM से 06.47 AM तक पूजा कर लेनी चाहिए.
क्या है व्रत एवं पूजा के नियम!
सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें. देवी कामाक्षी का ध्यान करें. कामाक्षी देवी की प्रतिमा अथवा तस्वीर पर पुष्प चढ़ाएं. पूरे मंदिर को पुष्प से सजाएं. अब पान का पत्ता और पीला धागा रखकर पूजा शुरू करें कामाक्षी वृथम की स्तुति करें. पीले रंग के धागे पर दो चमेली के पुष्प बांधें, देवी के सामने इसे समर्पित कर पूजा का समापन करें. अंत में गर्भनाल बांध कर पति का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. ध्यान रहे यह पूजा सुबह-सवेरे ही की जाती है.
करादायन नोम्बू व्रत कथा!
एक पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने यह जानते हुए कि वह जिस लकड़हारे सत्यवान से विवाह करने जा रही है, उसको ज्यादा दिन जीवित नहीं रहेगा, विवाह किया था. विवाहोपरांत बाद पति-पत्नी जंगल से लकड़ियां लेने गए हुए थे. सत्यवान पेड़ से लकड़ियां काट रहा था, तभी अचानक उसकी मृत्यु हो गई. सावित्री अपने पति को पुनर्जीवन दिलाने के लिए अपने पति के शव के पास ही देवी गौरी की कठोर तपस्या करने बैठ गई. सावित्री की कठोर तपस्या से यमराज विचलित हो गये. उन्होंने सावित्री की परीक्षा लेने के लिए प्रश्न किये, जिसका सावित्री ने बड़े धैर्य से जवाब दिया. अंततः यमराज सावित्री के उत्तर से प्रभावित हुए, और उन्होंने सत्यवान को पुनर्जीवित कर दिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 09, 2023 04:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

