विद्वानों के अनुसार कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए हर व्यक्ति काली-पूजा ( Kali Puja) कर सकता है. यह पूजा वैदिक विधि से करें, तांत्रिक विधि से नहीं, क्योंकि तांत्रिक पूजा में विशेष नियम, साधना और सावधानी की जरूरत होती है. पूजा का उद्देश्य भक्ति, आत्मिक शांति और देवी की कृपा प्राप्त करना हो.
गृहस्थ के लिए सरल काली पूजा विधि:
काली पूजा के लिए खुद के साथ पूजा स्थल की स्वच्छता बहुत जरूरी है. सुबह स्नान के पश्चात मां काली का ध्यान कर पूजा एवं व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल पर एक चौकी स्थापित करें, इस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं. इस पर गंगाजल का छिड़काव करें. चौकी पर मां काली की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. धूप दीप प्रज्वलित करें. निम्न मंत्र का 108 बार त्रुटि रहित मंत्रोच्चारण करें. यह भी पढ़ें : Diwali 2025 Dates? दिवाली कब है 20 या 21 अक्टूबर? जानें धनतेरस, गोवर्धन-पूजा एवं भाईदूज की पंचांग अनुसार तिथियां एवं मुहूर्त!
शुद्ध होकर दीप जलाएं, पुष्प चढ़ाएं।
‘ॐ क्रीं कालीकायै नमः’
भोग में गुड़, नारियल और चावल का हलवा बनाएं. काली चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती उतारें. इसके पश्चात हाथ जोड़कर पूजा पाठ में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें.
काली पूजा शुभ मुहूर्त और समय
कार्तिक अमावस्या आरंभ: 06.29 AM (21 अक्टूबर 2025)
कार्तिक अमावस्या समाप्त: 04.55 AM (22 अक्टूबर 2025)
निशिता काल पूजा मुहूर्त: 11.55 PM से 12.44 AM तक (21-22 अक्टूबर, 2025)
सावधानियां:
किसी अयोग्य पुरोहित अथवा गैर जानकार व्यक्ति से तांत्रिक विधियों से काली पूजा कत्तई न करवाएं, ना ही स्वयं करें. अगर काली पूजा के मंत्रों का सही उच्चारण नहीं कर सकते, तो स्वयं काली पूजा करने से बचें. इससे मानसिक और पारिवारिक अशांति हो सकती है. साधारण वैदिक विधि, मंत्र, आरती, भोग और दीप-अर्पण आदि से काली मां को प्रसन्न किया जा सकता है.













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