Hariyali Amavasya 2025: शिव-गौरी पूजा, दान और वृक्षारोपण का पावन पर्व है हरियाली अमावस्या? जानें इसका महत्व, मुहूर्त, पूजा विधि इत्यादि!
श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है. सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है. महाराष्ट्र में इसे ‘गटारी अमावस्या’, आंध्र प्रदेश में ‘चुक्कल अमावस्या’ और उड़ीसा में ‘चितलगी अमावस्या’ के नाम से मनाया जाता है.
श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है. सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है. महाराष्ट्र में इसे ‘गटारी अमावस्या’, आंध्र प्रदेश में ‘चुक्कल अमावस्या’ और उड़ीसा में ‘चितलगी अमावस्या’ के नाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की विधि-विधान से पूजा तथा व्रत करने और पूजा के पश्चात दान करने और हर व्यक्ति को एक पौधा लगाने से दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहता है. इस वर्ष 24 जुलाई 2025, गुरुवार को हरियाली अमावस्या का पर्व मनाया जायेगा. आइए जानते हैं हरियाली अमावस्या का महत्व पूजा विधि और इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें.
हरियाली अमावस्या मूल तिथि
हरियाली अमावस्या प्रारंभः 02.28 AM, (24 जुलाई 2025, गुरुवार)
हरियाली अमावस्या समाप्तः 12.40 AM, (25 जुलाई 2025, शुक्रवार)
हरियाली अमावस्या का महत्व
भारत में हरियाली अमावस्या का पर्व स्थानीय रीति-रिवाज एवं परंपराओं के साथ मनाया जाता है. इस दिन मंदिरों में श्रद्धालु का तांता लगा रहता है. खासकर वृंदावन, मथुरा, द्वारकाधीश और वृंदावन में बांके बिहारी मंदिरों में भगवान कृष्ण के दर्शनार्थ भारी तादाद में श्रद्धालु आते हैं. इस दिन वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला की दिव्यता देखते है. कृष्ण मंदिरों के अलावा देश के विभिन्न शिव मंदिरों में भी लोग शिव जी की पूजा-अनुष्ठान आदि करते हैं. इस दिन पूजा के दरमियान हरियाली अमावस्या की व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए, तभी पूजा पूरी होती है.
हरियाली अमावस्या पूजा विधि
सावन के अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. देवी पार्वती एवं भगवान शिव का ध्यान कर व्रत-पूजा का संकल्प लें. पूजा शुरू करने से पूर्व सुहागन स्त्रियां देवी पार्वती को सिंदूर जरूर लगाएं. पूजा के पश्चात हरी चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, चुनरी आदि सुहाग की वस्तुओं के साथ मिठाइयों के दान का भी विधान है. इससे सुहागिनों के सुहाग की आयु लंबी होती है, घर में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है. इस दिन बहुत से लोग पीपल और तुलसी के पेड़ की पूजा तथा परिक्रमा कर, मालपुए का भोग भी चढ़ाते हैं.
इसके साथ ही इस दिन पितरों को तिल का तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं.
हरियाली अमावस्या व्रत कथा
प्राचीनकाल में एक राजा की बहू ने मिठाई खाकर पति से झूठ बोला कि मिठाई चूहे ने खाई है. यह सुन चूहे को गुस्सा आया, उसने असली चोर पकड़ने का संकल्प लिया. एक दिन राजा के आवास पर कुछ अतिथि पधारे. उन्हें अतिथि-गृह में ठहराया गया. चूहे ने बहु के कुछ कपड़े अतिथि घर में रख दिया. बहु के कपड़े अतिथि घर में देख लोग तरह-तरह की बातें करने लगे. राजा ने बहु को घर से निकाल दिया. घर के बाहर एक पीपल का पेड़ था. राजा की पत्नी अपने अन्य महिला सदस्यों के साथ इस पेड़ की पूजा करती और गुड़ का प्रसाद बांटती थीं. एक दिन राजा वहां से गुजर रहे थे, उन्होंने दीयों की बात सुनी. वहां सारे जलते दीयों के बीच एक दीया बुझा दिखा. दीयों ने पूछा, तुम्हें तेल क्यों नहीं मिला. दीये ने कहा मुझे राजा की बहु तेल देती थी, राजा ने बहु को घर से निकाल दिया, तबसे मुझे कोई तेल नहीं देता. तब राजा ने अफसोस जताते हुए बहु को बुला लिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 17, 2025 10:33 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

