Akshaya Tritiya 2026: कब है अक्षय तृतीया? 19 या 20 अप्रैल को लेकर संशय, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व
साल 2026 में अक्षय तृतीया की सही तारीख को लेकर संशय बना हुआ है. जाने-माने ज्योतिषविद डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने पंचांग की गणना के आधार पर शास्त्र सम्मत तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी साझा की है.
Akshaya Tritiya 2026: सनातन धर्म में अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya), जिसे 'आखा तीज' (Akha Teej) भी कहा जाता है, एक अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया के पर्व को हर साल वैशाख मास (Vaishakh Maas) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल इस त्योहार की तारीख को लेकर जनमानस में काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कोई 19 अप्रैल तो कोई 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया बता रहा है. इस संशय को दूर करते हुए प्रख्यात ज्योतिषविद डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने पंचांग के आधार पर शास्त्र सम्मत तिथि स्पष्ट की है. आइए जानते हैं अक्षय तृतीया की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व... यह भी पढ़ें: Akshay Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद बन रहे 5 राजयोग, जानें चंद्र गोचर, पूजा का शुभ मुहूर्त और सोना खरीदने का सही समय
19 अप्रैल को मनाना क्यों है शास्त्र सम्मत?
ज्योतिषविद के अनुसार, पंचांग की गणना बताती है कि तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:45 बजे शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 07:49 बजे समाप्त होगी.
यद्यपि हिंदू धर्म में 'उदयकालिक' तिथि (सूर्योदय के समय वाली तिथि) का महत्व होता है, जिसके अनुसार 20 अप्रैल की तारीख आती है, लेकिन 20 अप्रैल को यह तिथि सुबह बहुत जल्दी समाप्त हो जाएगी. डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, 20 अप्रैल को पूरा दिन मुहूर्त और योग रहित रहेगा. इसलिए, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाना अधिक तर्कसंगत और शास्त्र सम्मत माना जा रहा है.
अबूझ मुहूर्त: बिना पंचांग देखे करें मांगलिक कार्य
अक्षय तृतीया को 'अबूझ मुहूर्त' की श्रेणी में रखा गया है. इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती.
- विवाह और सगाई: इस दिन बिना किसी बाधा के वैवाहिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं.
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश के लिए यह सर्वोत्तम तिथि है.
- नया व्यवसाय: व्यापार की शुरुआत और निवेश के लिए इसे बेहद लाभकारी माना जाता है.
दान और पुण्य का 'अक्षय' फल
शास्त्रों में वर्णित है कि अक्षय तृतीया पर किए गए दान, जप और तप का फल 'अक्षय' होता है, अर्थात वह कभी नष्ट नहीं होता. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद जल, अन्न, सत्तू और वस्त्र का दान करना विशेष पुण्यकारी माना गया है. साथ ही, पितरों के निमित्त किए गए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी इस दिन विशेष फल प्रदान करते हैं.
निवेश और स्वर्ण खरीदारी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया को 'युगादि तिथि' भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन से सतयुग का आरंभ माना जाता है. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना के साथ-साथ इस दिन संपत्ति में निवेश करना अत्यंत शुभ होता है.
- सोना-चांदी: इस दिन स्वर्ण या चांदी खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
- भूमि और भवन: रियल एस्टेट में निवेश या नई संपत्ति का पंजीकरण करना स्थायित्व प्रदान करता है.
मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश न केवल सुरक्षित रहता है, बल्कि उसमें निरंतर वृद्धि भी होती है. माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों के जीवन में धन-वैभव और सुख-शांति बनी रहती है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 17, 2026 12:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

