Shab E Meraj Mubarak 2025 HD Images: शब-ए-मेराज (Shab E Meraj) 2025 हर साल 27 रजब को मनाया जाता है. यह वह रात थी जब हज़रत मुहम्मद (PBUH) सात आसमानों की यात्रा करके अल्लाह सर्वशक्तिमान से मिले थे. शब-ए-मेराज भारत में 28 जनवरी 2025 की शाम से शुरू होगा. शब-ए-मिराज, जिसे अल-इसरा वल मेराज या लैलात अल मिराज के नाम से भी जाना जाता है, वह रात है, जब हजरत मुहम्मद (SAW) ने सात आसमानों की यात्रा की और अल्लाह (SWT) से मिले. यह हिजरी महीने रजब की 27वीं रात थी. अल्लाह ने हजरत जिब्राइल (RA) से पवित्र पैगंबर मुहम्मद (PBUH) को स्वर्ग में लाने के लिए कहा. यह कुरान और हदीस में वर्णित कुछ घटनाओं में से एक है. यही कारण है कि दुनिया भर के मुसलमान विशेष प्रार्थना करते हैं और अल्लाह से क्षमा मांगते हैं.
इस्लाम में, अल इसरा वल मिराज (27 रजब) को वह रात माना जाता है, जिसमें प्यारे पैगंबर ने प्रसिद्ध रात्रि यात्रा और स्वर्गारोहण शुरू किया था, जिसे शब-ए-मिराज के नाम से भी जाना जाता है. पैगम्बर मुहम्मद (PBUH) की रात्रि यात्रा और स्वर्गारोहण एक चमत्कारी घटना थी, जिसके दौरान उन्होंने मक्का से यरूशलेम में मस्जिद अल-अक्सा तक की यात्रा की और फिर एक ही रात में स्वर्ग में चढ़ गए. इसरा मक्का से मस्जिद अल-अक्सा तक की रात्रि यात्रा है. मिराज मस्जिद अल-अक्सा से स्वर्ग तक की यात्रा है. अरबी में इसे अल इसरा वल मिराज के नाम से जाना जाता है, जबकि बांग्ला, फारसी, ईरानी, पाकिस्तानी और भारतीय बोलियों में इस प्रसिद्ध यात्रा को कभी-कभी शब-ए-मिराज या मिराज की रात के नाम से भी जाना जाता है.
इस अवसर पर आप इन एचडी इमेजेस, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स, फोटोज और वॉलेपपर्स के जरिए शब-ए-मेराज मुबारक कह सकते हैं.
शब-ए-मेराज मुबारक

शब-ए-मेराज मुबारक 2025

शब-ए-मेराज मुबारक

शब-ए-मेराज मुबारक

शब-ए-मेराज मुबारक

यह वह समय था जब पैगंबर (PBUH) को पहली बार पांच निर्धारित दैनिक प्रार्थनाएं दी गईं. उन्होंने अन्य पैगंबरों को भी प्रार्थना में नेतृत्व किया और उनमें से कुछ से मुलाकात की. इस यात्रा में पैगंबर (PBUH) ने कई असाधारण दृश्य देखे. यह उस समय के विश्वासियों के लिए विश्वास की परीक्षा भी थी और सच्चे विश्वासियों के लिए चमकने का अवसर भी. जिस ऐतिहासिक काल में रात्रि यात्रा और स्वर्गारोहण हुआ, वह वह काल था जब पैगंबर मुहम्मद अपने कुछ सबसे प्रिय परिवार के सदस्यों और समर्थकों की लगातार मृत्यु के बाद तीव्र कठिनाई और दुःख का सामना कर रहे थे, साथ ही ताइफ़ के लोगों की क्रूर अस्वीकृति का भी सामना कर रहे थे. ऐसा माना जाता है कि यह मक्का से मदीना की ओर हिजरा (प्रवास) से एक साल पहले हुआ था.













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