नई दिल्ली: भारत में पवित्र महीना रमजान (Ramadan 1447 AH) अपने दूसरे दिन में प्रवेश कर चुका है. शुक्रवार 20 फरवरी 2026 को देश भर में लाखों मुसलमान अपना दूसरा रोजा रख रहे हैं. इस्लाम में रोजे की शुरुआत सूर्योदय से पहले 'सेहरी' (Sehri) खाकर की जाती है और सूर्यास्त के समय 'इफ्तार' (Iftar) के साथ इसे खोला जाता है. भारत के विशाल भौगोलिक विस्तार के कारण, पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच इन समयों में कई मिनटों का अंतर होता है. आज के रोजे की औसत अवधि लगभग 12 घंटे 40 मिनट रहने की उम्मीद है. जानें 20 फरवरी को मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, चेन्नई, कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, नोएडा, गाजियाबाद, भोपाल, अहमदाबाद, रांची, श्रीनगर और तिरुवनंतपुरम के लिए सेहरी और इफ्तार क्या सही समय है. यह भी पढ़ें: Ramzan Sehri–Iftar Time Table Calendar 2026: रमजान के पाक महीने का पहला रोजा आज, यहां देखें दिल्ली, मुंबई लखनऊ समेत प्रमुख शहरों का 30 दिन का सेहरी-इफ्तार टाइम टेबल
रमजान 2026: प्रमुख शहरों में सेहरी और इफ्तार का समय (20 फरवरी)
नीचे दी गई तालिका भारत के मुख्य शहरों के लिए आज के सटीक समय को दर्शाती है:
| शहर | सेहरी का समय (समाप्त) | इफ्तार का समय (शुरू) |
| दिल्ली | 05:35 AM | 06:16 PM |
| मुंबई | 05:51 AM | 06:40 PM |
| कोलकाता | 04:50 AM | 05:36 PM |
| चेन्नई | 05:17 AM | 06:16 PM |
| हैदराबाद | 05:28 AM | 06:28 PM |
| बेंगलुरु | 05:28 AM | 06:27 PM |
| लखनऊ | 05:21 AM | 06:02 PM |
| श्रीनगर | 05:45 AM | 06:23 PM |
| पटना | 05:07 AM | 05:48 PM |
| जयपुर | 05:44 AM | 06:24 PM |
| अहमदाबाद | 05:54 AM | 06:38 PM |
| भोपाल | 05:36 AM | 06:19 PM |
| रांची | 05:03 AM | 05:46 PM |
| तिरुवनंतपुरम | 05:24 AM | 06:30 PM |
मौसम और भौगोलिक स्थिति का प्रभाव
इस साल रमजान की शुरुआत वसंत ऋतु के आगमन के साथ हुई है, जिससे उत्तर भारत में मौसम तुलनात्मक रूप से सुहावना बना हुआ है. हालांकि, चेन्नई और तिरुवनंतपुरम जैसे दक्षिण भारतीय शहरों में श्रीनगर जैसे उत्तरी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी अधिक गर्मी महसूस की जा सकती है. यह भी पढ़ें: Ramadan 2026 Special Namaz : तरावीह और अन्य विशेष नमाजों का महत्व और तरीका जानें
रमजान का आध्यात्मिक महत्व
रमजान इस्लामी कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना है, जो उस समय की याद दिलाता है जब पैगंबर मोहम्मद पर कुरान की पहली आयतें नाजिल (अवतरित) हुई थीं। इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक होने के नाते, यह महीना गहरे आध्यात्मिक चिंतन, आत्म-अनुशासन और भक्ति का समय है.
उपवास (सॉम) के माध्यम से रोजेदार न केवल भूख-प्यास पर नियंत्रण रखते हैं, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि, दान-पुण्य (जकात) और सामुदायिक एकता का भी संदेश देता है. मस्जिदों में विशेष रात्रिकालीन प्रार्थनाएं (तरावीह) इस महीने के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक समृद्ध करती हैं.












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