Puthandu 2026 Wishes in Hindi: विश्वभर में बसे तमिल समुदाय के लिए 14 अप्रैल 2026 का दिन बेहद खास है. इस दिन तमिल नववर्ष यानी 'पुथांडु' (Puthandu) का त्योहार पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. तमिल सौर कैलेंडर के पहले महीने 'चिथिरई' की शुरुआत होने के कारण इसे 'वरुशा पिरप्पू' भी कहा जाता है. मेष संक्रांति के पावन अवसर पर आने वाला यह पर्व नई शुरुआत, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. पुथांडु के दिन तमिल परिवारों में सुबह की शुरुआत विशेष धार्मिक अनुष्ठानों से होती है. लोग जल्दी उठकर स्नानादि के पश्चात नए वस्त्र धारण करते हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं.
इस दिन 'कन्नी' (Kanni) देखने की एक अनूठी परंपरा है. इसके तहत नववर्ष की सुबह सबसे पहले शुभ वस्तुओं जैसे सोना, चांदी, फल, फूल और दर्पण को देखा जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से आने वाला पूरा साल सुखद और संपन्न बीतता है. लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर रंगीन चावल के पाउडर से सुंदर 'कोलम' (रंगोली) बनाते हैं, जो स्वागत और सकारात्मकता का प्रतीक है.
तमिल भाषी लोग इस दिन एक-दूसरे को ‘पुथांडु वाल्टतुक्का’ कहकर शुभकामनाएं देते हैं, जिसका सरल अर्थ है 'नए साल की हार्दिक बधाई'. आधुनिक युग में इस परंपरा को डिजिटल माध्यमों ने और विस्तार दिया है. आज के दिन लोग WhatsApp स्टिकर्स, एचडी इमेजेस और जीआईएफ ग्रीटिंग्स के माध्यम से दूर बैठे रिश्तेदारों और मित्रों को डिजिटल शुभकामनाएं भेजकर पर्व की खुशी साझा करते हैं.





पुथांडु का भोजन जीवन के विभिन्न अनुभवों का मिश्रण होता है. इस दिन विशेष रूप से 'मंगा पचड़ी' (Mangai Pachadi) बनाई जाती है. इसमें गुड़, नीम के फूल, कच्चा आम और इमली का उपयोग किया जाता है. यह व्यंजन मीठे, कड़वे, खट्टे और नमकीन स्वादों का मिश्रण होता है, जो यह संदेश देता है कि जीवन में सुख-दुख और सफलता-विफलता का समान महत्व है और हमें हर परिस्थिति का स्वागत करना चाहिए.
पुथांडु का समय भारत के अन्य हिस्सों में भी उत्सव का होता है. भौगोलिक दूरियां होने के बावजूद, यह पर्व भारतीय सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है. 14 अप्रैल के आसपास ही अन्य राज्यों में भी इसी भावना के साथ त्योहार मनाए जाते हैं:
- केरल: विशु (Vishu)
- पंजाब और हरियाणा: बैसाखी (Baisakhi)
- असम: बोहाग बिहू (Bohag Bihu)
- ओडिशा: पना संक्रांति (Pana Sankranti)
तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्सों में इसे 'चित्तिरै विशु' के नाम से भी पुकारा जाता है. यह त्योहार न केवल एक कैलेंडर की शुरुआत है, बल्कि यह परिवार और समुदाय को एक सूत्र में पिरोने का अवसर भी प्रदान करता है.













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