Karthik Purnima 2019: कार्तिक पूर्णिमा पर दीप-दान कर प्राप्त करें अक्षुण्य पुण्य! साथ ही जानें क्या करें और क्या नहीं
कार्तिक पूर्णिमा 2019 (Photo credits: YouTube)

Karthik Purnima 2019: पौराणिक पुस्तकों में ही नहीं वेद पुराणों में भी कार्तिक मास का व्यापक महत्व बताया गया है. मान्यतानुसार इसी कार्तिक मास में श्रीहरि चातुर्मास के बाद योग-निद्रा से जागते हैं, तो वहीं भगवान शिव ने अत्याचारी त्रिपुरासुर का संहार भी किया था. इसी खुशी में देव से लेकर मानव तक सभी कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के पश्चात दीपदान करके खुशियां मनाते हैं. इसीलिए इस दिन किए गए दीपदान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस वर्ष आज 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा मनाया जा रहा है. इस दिन दीपदान के महत्व को देखते हुए देश भर से श्रद्धालु काशी स्थित गंगा घाट पहुंचते हैं, जो काशी नहीं आ पाते, वे करीबी क्षेत्रों में स्थित नदियों अथवा सरोवरों में स्नान कर दीपदान करते हैं. मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन दीपदान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मन में व्याप्त बुरी भावनाएं एवं नकारात्मक सोच खत्म होती हैं. कार्तिक पूर्णिमा के दिन कोई भी कार्य काफी सोच-विचार कर करना चाहिए. ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि इस दिन कौन से कार्य करने चाहिए और कौन से नहीं...

जानें क्या करें

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल गंगा स्नान अवश्य करें. अगर यह संभव नहीं हो पा रहा है तो घर में स्नान वाले पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर उसी से स्नान करें.

* कहते हैं कि इस दिन बुआ, बहन अथवा ब्राह्मण को नए वस्त्र का दान करने से अक्षुण्य पुण्य की प्राप्ति होती है.

* कार्तिक पूर्णिमा को सायंकाल के समय चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल और कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए, इससे मन शांत और सकारात्मक रहता है

* इस दिन गौ-दान, गाय के दूध का दान, केला, अमरूद, चावल, तिल अथवा आंवले में से कम से कम किसी एक चीज का दान अवश्य करना चाहिए.

* स्वच्छ जल में दूध, शहद एवं लाल पुष्प मिलाकर पीपल के वृक्ष को अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं. मान्यता है कि इस दिन पीपल के वृक्ष पर माता लक्ष्मी वास करती हैं.

* यह श्रीहरि का विशिष्ठ दिन होता है. इसलिए इस दिन बहुत से लोग सत्यनारायण भगवान की कथा भी सुनते हैं. साथ ही मन में यह विश्वास रखें कि इससे श्रीहरि प्रसन्न होंगे.

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान-ध्यान करके प्रातःकाल घर अथवा दफ्तर के मुख्यद्वार पर आम्र पल्लव एवं पुष्प से बना तोरण बांधें. शाम के समय मुख्यद्वार पर रंगोली बनाएं एवं माँ लक्ष्मी के नाम से एक दीपक जलाए. मान्यता है कि ऐसे ही घरों में माता लक्ष्मी प्रवेश करती हैं.

* कोशिश करें इस दिन गरीबों अथवा भिखारियों को भरपेट भोजन अवश्य कराएं.

* आज के दिन दो, पांच, सात अथवा नौ घी के दीये जलाकर पवित्र नदीं में प्रवाहित करें. इस तरह दीपदान करने से देवगण प्रसन्न होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.

* इस दिन तुलसी का पूजन करें और साथ ही एक दीप तुलसी के पौधे के समीप जला कर रखे.

ऐसा करने से बचें

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. यह मनुष्य को नकारात्मकता की तरफ ले जाती है.

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी भी बुजुर्ग व्यक्ति का अपमान अथवा उनके लिए बुरे शब्दों का प्रयोग नहीं करें.

* आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो पूरे कार्तिक मास तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए, लेकिन अगर यह संभव नहीं है तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए. यह आपके भीतर की नकारात्मकता को खत्म करती है.

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन संभोग आदि से परहेज रखना चाहिए. ज्योतिषियों के अनुसार ऐसा करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है.

* इस दिन किसी विकलांग, भिखारी अथवा गरीब व्यक्ति का अपमान न करें.

* कार्तिक पूर्णिमा को बेजुबान अथवा निरीह पशु-पक्षियों को न मारें न परेशान करें.

* इस दिन घर में पूजा-पाठ अथवा खुशी-खुशी व्यवहार करना चाहिए, विवाद अथवा झगड़ों से दूर रहें.

* कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए इस दिन न ही तुलसी का पौधा उखाड़ें, ना ही किसी काम के लिए तुलसी के पत्ते तोड़ें.

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन उड़द, मसूर, करेला, बैंगन और हरी सब्जियां का सेवन न करें.

* कार्तिक पूर्णिमा के दिन मूर्ति विसर्जन नहीं करना चाहिए, ना ही किसी देवता का नाम लेकर उन्हें अपशब्द कहना चाहिेए.

नोट- इस लेख में दी गई तमाम जानकारियों को प्रचलित मान्यताओं के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है और यह लेखक की निजी राय है. इसकी वास्तविकता, सटीकता और विशिष्ट परिणाम की हम कोई गारंटी नहीं देते हैं. इसके बारे में हर व्यक्ति की सोच और राय अलग-अलग हो सकती है.