Janmashtami 2025 Sanskrit Wishes: श्री कृष्णजन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभकामनाः! प्रियजनों संग शेयर करें संस्कृत के ये Shlokas, WhatsApp Messages और Facebook Greetings
कृष्ण जन्माष्टमी 2025 (Photo Credits: File Image)

Janmashtami 2025 Sanskrit Wishes: हिंदू धर्म में वैसे तो साल भर में कई पर्व मनाए जाते हैं, जिनका अपना एक विशेष महत्व बताया जाता है. वहीं हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Shri Krishna Janmashtami)  का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) के आठवें अवतार श्रीकृष्ण (Shri Krishna) को समर्पित है. ऐसी मान्यता है कि इस पावन तिथि पर द्वापर युग में श्रीहरि ने मथुरा नगरी में माता देवकी और वासुदेव कीआठवीं संतान श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था, इसलिए उनके जन्मोत्सव को हर्षोल्लास से मनाया जाता है. इस साल 16 अगस्त 2025 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है. माना जाता है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, साथ ही जन्माष्टमी (Janmashtami) का व्रत रखने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन कान्हा की पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सारे संकट दूर होते हैं, उनकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके जीवन में खुशहाली आती है. ऐसे में इस बेहद पावन अवसर पर आप संस्कृत के इन शानदार विशेज, श्लोक, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर करके प्रियजनों से श्री कृष्णजन्माष्टमी महोत्सवस्य शुभकामनाः कह सकते हैं.

1- वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वरः।
जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम।।
भावार्थ: राधा वृन्दावन की देवी हैं और कृष्ण वृन्दावन के स्वामी हैं. जीवन और धन में मेरी मंजिल हमेशा राधा और कृष्ण हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 (Photo Credits: File Image)

2- भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम्।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनङ्गरङ्गसागरं नमामि कृष्णनागरम्॥१॥
भावार्थ: मैं नटखट श्रीकृष्ण की पूजा करता हूं, जो नंद के लाल हैं. व्रज के एकमात्र आभूषण, जो भक्तों के सभी पापों को नष्ट कर देते हैं और उनकी इच्छाओं को पूरा करते हैं. जो अपने सिर पर मोर पंख धारण करते हैं, जो मधुर ध्वनि वाली बांसुरी बजाते हैं और जो प्रेम का सागर हैं.

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 (Photo Credits: File Image)

3- सुखावसाने त्विदमेव सारं दुःखावसाने त्विदमेव गेयम्। देहावसाने त्विदमेव जप्यं गोविंद दामोदर माधवेति॥
भावार्थ: सुख के अंत में यही सार है और दुख के अंत में यही गीत है. अपने अंतिम समय में गोविंद, दामोदर, माधव का जप करते रहना चाहिए.

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 (Photo Credits: File Image)

4- श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे। त्रायस्व माम् केशव लोकनाथ गोविंद दामोदर माधवेति॥
भावार्थ: हे भगवान कृष्ण, भगवान विष्णु, हे भगवान मुरारी, आप अपने भक्तों पर दयालु हैं. हे केशव, विश्व के स्वामी, गोविंद, दामोदर, माधव, मेरी रक्षा करें.

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 (Photo Credits: File Image)

5- श्री कृष्ण जन्माष्टमी, नित्यानन्दैकरसं सच्चिन्मात्रं स्वयञ्ज्योतिः। पुरुषोत्तममजमीशं वन्दे श्रीयादवाधीशम्॥ कृष्णजन्माष्टमीशुभकामनाः
भावार्थ: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शाश्वत आनंद का एकमात्र सत्य और आत्म-प्रकाश है. मैं भगवान के परम व्यक्तित्व, जो यादवों के स्वामी हैं, उनको नमस्कार करता हूं. कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं.

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 (Photo Credits: File Image)

गौरतलब है कि कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार को मनाने के लिए इस दिन घरों और मंदिरों में कान्हा के जन्मोत्सव की सुंदर झाकियां सजाई जाती हैं, भजन-कीर्तन किए जाते हैं. भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से कान्हा की पूजा की जाती है, भव्य श्रृंगार कर रात्रि में 12 बजे उनका जन्म कराया जाता है. श्रीकृष्ण के साथ ही इस दिन माता देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है. श्रीकृष्ण के मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है, पूजा-अनुष्ठान के अलावा भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है. रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म कराया जाता है, फिर खीरा काटकर उन्हें अर्पित किया जाता है और पंजीरी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है.