Harela 2025 Wishes: हरेला (Harela) की जड़ें प्राचीन हिंदू परंपराओं में हैं और यह हिंदू कैलेंडर के श्रावण महीने से गहराई से जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यह भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक है. यह त्योहार प्रकृति, उर्वरता और कृषि का उत्सव मनाता है, और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने वाले अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है. हरेला आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण (सावन माह) के पहले दिन मनाया जाता है. इसकी तिथि हर साल बदलती रहती है. हिंदू कैलेंडर के श्रावण माह में मनाया जाने वाला श्रावण हरेला, वर्षा ऋतु (मानसून) के आगमन का प्रतीक है. हरेला का अर्थ है "हरियाली का दिन" यह किसानों के लिए एक शुभ दिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन वे अपने खेतों में बुवाई का चक्र शुरू करते हैं. यह भी पढ़ें: Harela 2025: प्रकृति, परंपरा और हरियाली का उत्सव है उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला, जानें इसके बारें में
यह उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र के लोगों द्वारा मनाया जाता है. प्रचलित मान्यता के अनुसार, यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह के धार्मिक उत्सव का प्रतीक है. ग्रामीण समुदाय भगवान शिव और देवी पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाते हैं. इन्हें डिकारे या डिकर कहते हैं. यह त्यौहार अच्छी फसल और समृद्धि की प्रार्थना के साथ मनाया जाता है. 2020 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 16 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. वार्षिक अवकाशों के मौजूदा कैलेंडर में राज्य सरकार ने हरेला पर अप्रतिबंधित अवकाश घोषित किया है. नीचे दिए गए ग्रीटिंग्स भेजकर हरेला की बधाई दे सकते हैं.
1. हरी भरी बने रहे फुलवारी सबकी,
हरी भरी बने रहे खुशियां सबकी,
हरा भरा हो हर घर मंगल काज,
हरियाली सा खिले हर घर परिवार,
हरेला की शुभकामनाएं

2. आप सभी लोगों को उत्तराखंड के लोकप्रिय पर्व
हरेले की हार्दिक शुभकामनाएं!

3. प्रकृति को समर्पित उत्तराखंड के लोकपर्व
हरेला की हार्दिक शुभकामनाएं

4. हरेला पर्व, हरियाली और खुशहाली का त्योहार,
आप सभी को मुबारक हो!

5. यह पर्व आपके जीवन में हरियाली और खुशहाली लाए.
हरेला की हार्दिक शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश में एक ही दिन में व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए थे. इसके लिए हरेला पर्व पर मिलने वाले अप्रतिबंधित अवकाश को सार्वजनिक अवकाश में बदलने का प्रस्ताव रखा गया था. अब हर साल हरेला पर्व पर सार्वजनिक अवकाश रहता है. हरेला पर्व लोगों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ता है. पर्यावरण संरक्षण उत्तराखण्ड की संस्कृति में रहा है.













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