Chath Maha Parva 2025: छठ और महिला सशक्तिकरण, जानें श्रद्धा से शक्ति तक की एक पवित्र और अनुशासित गाथा!
छठ पूजा 2025 (Photo Credits: File Image)

   चार दिवसीय छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का एक ऐसा उत्सव हैजो आस्थाअनुशासन और आत्मबल का दिव्य संगम है. यह मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पावन पर्व हैजिसमें नारी की श्रद्धा और शक्ति दोनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. छठ महज एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहींबल्कि महिला सशक्तिकरण की गाथा भी है, जहां स्त्री अपनी सीमाओं से परे जाकर पूरे समाज को ऊर्जाआशा और संतुलन का संदेश देती है.

शक्ति बाहर से नहीं भीतर से आती है

    चार दिनों तक चलने वाला छठ का पर्व महिलाओं की अटूट श्रद्धा और दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचायक है. निर्जला व्रतदिन-रात की तपस्यास्वच्छताअनुशासन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की जाने वाली प्रार्थना आदि दर्शाते हैं कि भारतीय नारी सिर्फ भावनात्मक रूप से नहींबल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी कितनी सशक्त है. छठ व्रत रखने वाली महिला अपने आत्मबल से यह सिद्ध करती है कि सच्ची शक्ति बाहर से नहींबल्कि भीतर से आती है. यह भी पढ़ें : ‘अबकी बार, मोदी सरकार’, ‘ठंडा मतलब कोका कोला’… लिखने वाले एड गुरु Piyush Pandey का निधन, भारतीय विज्ञापन जगत में शोक की लहर

सृजन, संरक्षण और संकल्प का प्रतीक है शक्ति

   छठ पर्व में व्रती महिलाएं अपने लिए नहींबल्कि पूरे परिवारसमाज और प्रकृति के संतुलन के लिए व्रत रखती हैं. वे समुद्र, नदीतालाब या घाट पर घुटनों तक पानी में खड़े होकर पहले अस्त होते सूर्य को, और अगले दिन उदय होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं, उनकी उपासना करती हैं. सूर्यदेव की यह पूजा-अर्चना वस्तुतः ऊर्जाजीवन और समानता की पूजा है. इस कठोर प्रक्रिया में स्त्री स्वयं 'शक्तिका रूप धारण कर लेती है, जो सृजनसंरक्षण और संकल्प की प्रतीक है.

सदियों पुरानी है महिला सशक्तिकरण की जड़ें

आज के दौर में जब महिला सशक्तिकरण की बातें अधिकांश मंच पर होती हैंतब छठ का पावन पर्व, हमें याद दिलाता है कि भारतीय परंपराओं में महिला सशक्तिकरण की जड़ें सदियों से मौजूद हैं. यह पर्व बताता है कि सशक्तिकरण केवल अधिकार प्राप्त करने का नाम नहींबल्कि अपनी जिम्मेदारियों और क्षमताओं को पहचानने की प्रक्रिया भी है.

छठ पर्व की हर व्रत रखने वाली महिला इसका एक जीवंत उदाहरण है. श्रद्धा से शक्ति तक की यात्रा का. यह दर्शाती है कि आस्था में भी अपार ऊर्जा छिपी होती हैजो न केवल उसे बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है. इस तरह छठ केवल सूर्य उपासना का पर्व नहींबल्कि स्त्री के आत्मबलधैर्य और सशक्तिकरण की अनंत कथा है.