नई दिल्ली/इम्फाल: मणिपुर (Manipur) में लोकतांत्रिक सरकार (Elected Government) की बहाली के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) यानी बीजेपी (BJP) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह (Yumnam Khemchand Singh) को अपने विधायक दल का नेता चुना है. 62 वर्षीय खेमचंद सिंह मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री (13th Chief Minister of Manipur) के रूप में एन. बीरेन सिंह (N. Biren Singh) का स्थान लेंगे. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब 13 फरवरी 2025 को लगाए गए साल भर पुराने राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने वाली है. खेमचंद आज शाम पद की शपथ लेंगे. यह भी पढ़ें: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटा: युमनाम खेमचंद सिंह होंगे नए मुख्यमंत्री, निर्वाचित सरकार की बहाली के लिए गृह मंत्रालय की अधिसूचना जारी
राजनीतिक सफर और करियर
मैतेई समुदाय के एक प्रमुख चेहरा युमनाम खेमचंद सिंह इम्फाल पश्चिम के 'सिंगजामेई' निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में 'डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी' (DRPP) के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरू किया और 2013 में औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हुए.
बीजेपी में उनका कद तेजी से बढ़ा. वे 2017 में पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए और 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) रहे। इसके बाद 2022 में दोबारा चुनाव जीतने के बाद, उन्होंने बीरेन सिंह सरकार में शिक्षा, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया.
ताइक्वांडो मास्टर और निजी उपलब्धियां
खेमचंद केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित मार्शल आर्टिस्ट भी हैं. उन्हें भारत में ताइक्वांडो को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है और वे 'असम ताइक्वांडो एसोसिएशन' के संस्थापक भी रहे हैं.
दिसंबर 2025 में, उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की जब वे सियोल, दक्षिण कोरिया में 'ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन' (GTTF) से पारंपरिक ताइक्वांडो में '5वीं डैन ब्लैक बेल्ट' प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बने. उनके सहयोगियों का मानना है कि उनकी खेल वाली अनुशासित पृष्ठभूमि उनके प्रशासनिक कामकाज में भी झलकती है.
'पुल' की भूमिका और हालिया संदर्भ
राजनीतिक विश्लेषक खेमचंद के चयन को जातीय सुलह की एक रणनीतिक कोशिश के रूप में देख रहे हैं. हालिया जातीय संघर्ष के दौरान, उन्हें कई अन्य नेताओं की तुलना में एक निष्पक्ष व्यक्ति के रूप में देखा गया है.
दिसंबर 2025 में, वे नागा-बहुल उख्रुल जिले के एक राहत शिविर में विस्थापित कुकी-जो निवासियों से मिलने गए थे. 2023 में संघर्ष शुरू होने के बाद से वे ऐसे क्षेत्रों का दौरा करने वाले पहले मैतेई विधायक बने, जिससे उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी जो समुदायों के बीच संवाद शुरू करने की क्षमता रखता है.
विवाद और चुनौतियां
साफ-सुथरी छवि के बावजूद, खेमचंद का कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा. स्पीकर (2017-2022) के रूप में उन पर दलबदल कानून के मामलों में देरी करने के आरोप लगे. यह मामला इतना बढ़ा कि 2020 में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था.
मुख्यमंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी चुनौती मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच गहरे अविश्वास को कम करना होगा. हाल के वर्षों में उनके घर को भी प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया था और अक्टूबर 2023 में उनके आवास पर ग्रेनेड हमला भी हुआ था.
समावेशी शासन की ओर कदम
नई सरकार को अधिक समावेशी बनाने के लिए कैबिनेट में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं.
| संभावित पद | नाम | समुदाय |
| मुख्यमंत्री | युमनाम खेमचंद सिंह | मैतेई |
| उप-मुख्यमंत्री | नेमचा किपगेन (संभावित) | कुकी-जो |
| उप-मुख्यमंत्री | नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) से | नागा |
केंद्र सरकार का यह ढांचागत बदलाव राज्य में बहु-जातीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के इरादे को दर्शाता है, ताकि राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य में शांति और विकास की नई शुरुआत हो सके.













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