नई दिल्ली/इम्फाल: मणिपुर (Manipur) में पिछले लगभग एक साल से जारी केंद्रीय शासन का अंत हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने बुधवार, 4 फरवरी 2026 को एक औपचारिक अधिसूचना जारी कर राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने संविधान के अनुच्छेद 356(2) के तहत इस उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए. इस कदम के साथ ही राज्य में निर्वाचित सरकार की बहाली का मार्ग प्रशस्त हो गया है और भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह (Yumnam Khemchand Singh) आज शाम मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेने के लिए तैयार हैं. यह भी पढ़ें: Supreme Court West Bengal SIR Hearing: मतदाता सूची से नाम हटाने पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी
राष्ट्रपति शासन का अंत और नई सरकार का गठन
मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को संवैधानिक मशीनरी के विफल होने और जातीय हिंसा के चलते राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. अब लगभग एक वर्ष बाद, केंद्र ने सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक स्थिरता का आकलन करने के बाद इसे हटाने का निर्णय लिया है.
भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है. वे आज शाम इम्फाल स्थित लोक भवन में आयोजित होने वाले एक गरिमामय समारोह में राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे.
मणिपुर में हटाया गया राष्ट्रपति शासन
President's rule revoked in Manipur: Govt notification.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 4, 2026
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?
62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में एक अनुभवी चेहरा हैं. वे इंफाल की सिंगजामेई विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं. खेमचंद इससे पहले मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
उन्हें राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच एक स्वीकार्य नेता के रूप में देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री के साथ-साथ राज्य में दो उपमुख्यमंत्री भी बनाए जाने की संभावना है, जिनमें से एक कुकी और एक नागा समुदाय से हो सकते हैं, ताकि राज्य में समावेशी शासन का संदेश दिया जा सके.
ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियां
मणिपुर में जातीय संघर्ष के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे ने राजनीतिक संकट पैदा कर दिया था, जिसके बाद केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ा था. राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य में शांति बहाली की कोशिशें जारी रहीं.
- हिंसा का प्रभाव: मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.
- बहाली की मांग: पिछले कई महीनों से राज्य के विभिन्न राजनीतिक दल और निर्वाचित विधायक केंद्र से लोकप्रिय सरकार की वापसी की मांग कर रहे थे.
नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में पूर्ण शांति बहाल करना, विस्थापित लोगों का पुनर्वास करना और समुदायों के बीच विश्वास की खाई को पाटना होगा.













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