Noida: टेक पेशेवर युवराज मेहता की मौत का सच: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने और हार्ट फेल्योर का खुलासा
नोएडा तकनीशियन युवराज मेहता (Photo Credis: X/@theskindoctor13)

नोएडा: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 (Greater Noida’s Sector 150) में शुक्रवार रात एक दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर (Software Engineer) युवराज मेहता (Yuvraj Mehta) की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सुलझ गई है. सोमवार, 19 जनवरी को आई रिपोर्ट के अनुसार, युवराज की मौत पानी में डूबने के कारण दम घुटने (Asphyxiation) से हुई थी. इसके साथ ही रिपोर्ट में 'हार्ट फेल्योर' का भी जिक्र है, जो संभवतः बर्फीले पानी में लंबे संघर्ष और अत्यधिक शारीरिक व मानसिक तनाव के कारण हुआ.  यह भी पढ़ें: Sudden Death in Assam: असम के जोरहाट में बेटे का रिजल्ट लेने स्कूल पहुंचे पिता की हार्ट अटैक से मौत, खुशियां गम में बदलीं

हादसे वाली रात क्या हुआ था?

यह घटना शुक्रवार (16 जनवरी) की आधी रात को हुई जब युवराज अपने गुरुग्राम स्थित कार्यालय से सेक्टर 150 में अपने घर लौट रहे थे. घने कोहरे के कारण उनकी कार अनियंत्रित होकर एक गहरे निर्माणाधीन गड्ढे में जा गिरी, जो जलभराव के कारण सड़क के बराबर दिख रहा था.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार गिरने के बाद युवराज बाहर निकलने में सफल रहे थे और कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च से मदद के लिए इशारा कर रहे थे. हालांकि, करीब दो घंटे के संघर्ष के बाद रात 1:45 बजे उनकी कार पूरी तरह पानी में समा गई.

बचाव दल पर लगे गंभीर आरोप

युवराज के पिता राजकुमार मेहता, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक हैं, उन्होंने बचाव दल पर पेशेवर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर मौजूद थीं, लेकिन वे ठंडे पानी और अंदर सरियों के होने का डर बताकर गड्ढे में उतरने से कतराते रहे.

एक चश्मदीद डिलीवरी एजेंट मनिंदर ने बताया कि जब प्रशासनिक अधिकारी पीछे हटे हुए थे, तब उन्होंने खुद कमर में रस्सी बांधकर करीब 50 मीटर अंदर तक तैरने की कोशिश की, लेकिन तब तक कार पूरी तरह डूब चुकी थी.

दो रियल एस्टेट कंपनियों पर FIR

इस घटना के बाद पुलिस ने दो बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों, 'एमजे विशटाउन प्लानर लिमिटेड' और 'लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है. आरोप है कि कंपनियों ने निर्माणाधीन स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया था, जिसके कारण यह जानलेवा हादसा हुआ.

सेक्टर 150 के निवासियों का कहना है कि उन्होंने पहले भी इस खतरनाक स्थल के बारे में कई बार शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया. यह भी पढ़ें: Student Sudden Death: क्लासरूम में पढ़ाई के दौरान अचानक टेबल से नीचे गिरी छात्रा, हार्ट अटैक से हुई मौत, आंध्र प्रदेश के रामचंद्रपुरम का सीसीटीवी आया सामने: VIDEO

प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल

एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने अंततः युवराज का शव बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस घटना ने स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड के पास वॉटर-रेस्क्यू के लिए जरूरी उपकरणों और प्रशिक्षण की कमी को उजागर कर दिया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है कि क्या डेवलपर्स और संबंधित अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.